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'''पांचवीं''' भयंकर भूल शेख अब्दुल्ला को कश्मीर का "प्रधानमंत्री" बनाकर की। उसी काल में देश के महान राजनेता डॉ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने दो विधान, दो प्रधान, दो निशान के विरुद्ध देशव्यापी आन्दोलन किया। वे परमिट व्यवस्था को तोड़कर श्रीनगर गए जहां जेल में उनकी हत्या कर दी गई। पं॰ नेहरू को अपनी गलती का अहसास हुआ, पर बहुत देर से। शेख अब्दुल्ला को कारागार में डाल दिया गया लेकिन पं॰ नेहरू ने अपनी मृत्यु से पूर्व अप्रैल, १९६४ में उन्हें पुन: रिहा कर दिया।
नेहरू की भूल के कारणवश शायद कांग्रेस पार्टी को ये धारा 370 कमजोर करना पच नहीं रहा है क्योंकि घोटालों और सत्ता में बने रहने के नेहरू और गांधी के नाम का गलत इस्तेमाल किया गया है।।।
 
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बेनामी उपयोगकर्ता