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{{main|भारत की स्वतन्त्रता}}
 
[[यूरोप|यूरोपीय]] व्यापारियों ने 17वीं सदी से ही [[भारतीय उपमहाद्वीप]] में पैर जमाना आरम्भ कर दिया था। अपनी सैन्य शक्ति में बढ़ोतरी करते हुए [[ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी|ईस्ट इण्डिया कम्पनी]] ने 18वीं सदी के अन्त तक स्थानीय राज्यों को अपने वशीभूत करके [[कंपनी राज|अपने आप को स्थापित]] कर लिया था। [[1857 का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम|1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम]] के बाद [[भारत सरकार अधिनियम 1858]] के अनुसार भारत पर सीधा आधिपत्य ब्रितानी ताज (ब्रिटिश क्राउन) अर्थात ब्रिटेन की राजशाही का हो गया। दशकों बाद नागरिक समाज ने धीरे-धीरे अपना विकास किया और इसके परिणामस्वरूप 1885 में [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] (आई० एन० सी०) निर्माण हुआ।<ref name="sumitsarkar">{{cite book |last=सरकार |first=सुमित |authorlink=सुमित सरकार |title=Modern India, 1885–1947 |trans-title=आधुनिक भारत, १८८५–१९४७ |year=१९८३ |publisher=मैकमिलन |isbn=978-0-333-90425-1 |pages=[https://archive.org/details/modernindia1885100sark/page/1 1–4] | language=en |url=https://archive.org/details/modernindia1885100sark/page/1 en}}</ref><ref name="metcalf conc"/>{{rp|123}} [[प्रथम विश्वयुद्ध]] के बाद का समय ब्रितानी सुधारों के काल के रूप में जाना जाता है जिसमें [[मोंटेगू-चेम्सफोर्ड सुधार]] गिना जाता है लेकिन इसे भी [[रोलेट एक्ट]] की तरह दबाने वाले अधिनियम के रूप में देखा जाता है जिसके कारण स्वरुप भारतीय समाज सुधारकों द्वारा स्वशासन का आवाहन किया गया। इसके परिणामस्वरूप महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों तथा राष्ट्रव्यापी अहिंसक आंदोलनों की शुरूआत हो गयी।<ref name="metcalf conc">{{cite book|last1=मेटकाफ |first1=बी॰ |last2=मेटकाफ |first2=टी॰आर॰|author1-link=:en:Barbara Metcalf|author2-link=:en:Thomas R. Metcalf|date=9 अक्टूबर 2006|title=A Concise History of Modern India |trans-title=भारत का संक्षिप्त इतिहास |edition=द्वितीय |publisher=[[कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस]]| isbn=978-0-521-68225-1 | language = en}}</ref>{{rp|167}}
 
1930 के दशक के दौरान ब्रितानी कानूनों में धीरे-धीरे सुधार जारी रहे; परिणामी चुनावों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की।<ref name="metcalf conc"/>{{rp|195–197}} अगला दशक काफी राजनीतिक उथल पुथल वाला रहा: [[द्वितीय विश्वयुद्ध में भारत|द्वितीय विश्व युद्ध में भारत की सहभागिता]], कांग्रेस द्वारा असहयोग का अन्तिम फैसला और [[अखिल भारतीय मुस्लिम लीग]] द्वारा [[मुस्लिम राष्ट्रवाद]] का उदय। 1947 में स्वतंत्रता के समय तक राजनीतिक तनाव बढ़ता गया। इस उपमहाद्वीप के आनन्दोत्सव का अंत भारत और पाकिस्तान के विभाजन के रूप में हुआ।<ref name="metcalf conc"/>{{rp|203}}
...it was clear to Attlee that everything depended on the spirit and reliability of the Indian Army:"Provided that they do their duty, armed insurrection in India would not be an insoluble problem. If, however, the Indian Army was to go the other way, the picture would be very different.
...Thus, Wavell concluded, if the army and the police "failed" Britain would be forced to go. In theory, it might be possible to revive and reinvigorate the services, and rule for another fifteen to twenty years, but:It is a fallacy to suppose that the solution lies in trying to maintain the status quo. We have no longer the resources, nor the necessary prestige or confidence in ourselves.| language = en}}</ref>
<ref>{{cite book|author=ब्राउन, जूडिथ मार्गरेट |year=1994|title= Modern India: the Origins of an Asian Democracy |trans-title=आधुनिक भारत: एशियाई लोकतंत्र के मूल |publisher=ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय प्रेस |page=330|isbn= 978-0-19-873112-2 |quote=India had always been a minority interest in British public life; no great body of public opinion now emerged to argue that war-weary and impoverished Britain should send troops and money to hold it against its will in an empire of doubtful value. By late 1946 both Prime Minister and Secretary of State for India recognized that neither international opinion nor their own voters would stand for any reassertion of the raj, even if there had been the men, money, and administrative machinery with which to do so| language = en}}</ref><ref name="sumitsarkar2">{{cite book |author=सरकार, सुमित |year= 1983 |title= Modern India, 1885–1947 |page=[https://archive.org/details/modernindia1885100sark/page/418 418] |publisher=मैकमिलन |isbn=978-0-333-90425-1 |quote=With a war weary army and people and a ravaged economy, Britain would have had to retreat; the Labour victory only quickened the process somewhat |language=en |url=https://archive.org/details/modernindia1885100sark/page/418 }}</ref> अंतिम वायसराय [[लुईस माउंटबेटन, बर्मा के पहले अर्ल माउंटबेटन|लॉर्ड माउंटबेटन]] ने सत्ता हस्तांतरण की तारीख को आगे बढ़ा दिया क्योंकि उन्हें लगा कि, कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लगातार विवाद के कारण अंतरिम सरकार का पतन हो सकता है। उन्होंने सत्ता हस्तांतरण की तारीख के रूप में, द्वितीय विश्व युद्ध, में [[जापान]] के आत्मसमर्पण की दूसरी सालगिरह 15 अगस्त को चुना।<ref>{{cite book|url=http://books.google.com/books?id=q9ebuSG64dkC&pg=PA459 |title=The Proudest Day: India's Long Road to Independence |trans-title= गौरवपूर्ण दिन: भारत की स्वतंत्रता की लम्बी राह |author=एंथोनी रैड, डेविड फिशर |publisher=नोर्टन |year=१९९९ |isbn=9780393318982 |page=४५९ | language = en}}</ref>
978-0-333-90425-1 |quote=With a war weary army and people and a ravaged economy, Britain would have had to retreat; the Labour victory only quickened the process somewhat | language = en}}</ref> अंतिम वायसराय [[लुईस माउंटबेटन, बर्मा के पहले अर्ल माउंटबेटन|लॉर्ड माउंटबेटन]] ने सत्ता हस्तांतरण की तारीख को आगे बढ़ा दिया क्योंकि उन्हें लगा कि, कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लगातार विवाद के कारण अंतरिम सरकार का पतन हो सकता है। उन्होंने सत्ता हस्तांतरण की तारीख के रूप में, द्वितीय विश्व युद्ध, में [[जापान]] के आत्मसमर्पण की दूसरी सालगिरह 15 अगस्त को चुना।<ref>{{cite book|url=http://books.google.com/books?id=q9ebuSG64dkC&pg=PA459 |title=The Proudest Day: India's Long Road to Independence |trans-title= गौरवपूर्ण दिन: भारत की स्वतंत्रता की लम्बी राह |author=एंथोनी रैड, डेविड फिशर |publisher=नोर्टन |year=१९९९ |isbn=9780393318982 |page=४५९ | language = en}}</ref>
ब्रिटिश सरकार ने ब्रिटिश भारत को दो राज्यों में विभाजित करने के विचार को 3 जून 1947 को स्वीकार कर लिया<ref name="jan" /> व ये भी घोषित किया कि उत्तराधिकारी सरकारों को स्वतंत्र प्रभुत्व दिया जाएगा और [[राष्ट्रकुल|ब्रिटिश राष्ट्रमंडल]] से अलग होने का पूर्ण अधिकार होगा।
 
1,05,299

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