"जीवाणु" के अवतरणों में अंतर

504 बैट्स् जोड़े गए ,  1 वर्ष पहले
छो
सम्पादन सारांश रहित
छो
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन यथादृश्य संपादिका उन्नत मोबाइल सम्पादन
}}
 
'''[https://alarmforstudy.blogspot.com/2019/06/Bacteria.html?m=1 जीवाणु]''' एक एककोशिकीय जीव है। इसका आकार कुछ मिलिमीटर तक ही होता है। इनकी आकृति गोल या मुक्त-चक्राकार से लेकर छड़, आदि आकार की हो सकती है। ये [[अकेन्द्रिक]], कोशिका भित्तियुक्त, एककोशकीय सरल जीव हैं जो प्रायः सर्वत्र पाये जाते हैं।
ये पृथ्वी पर मिट्टी में, अम्लीय गर्म जल-धाराओं में, नाभिकीय पदार्थों में<ref>{{cite journal |author=Fredrickson J, Zachara J, Balkwill D, ''et al'' |title=Geomicrobiology of high-level nuclear waste-contaminated vadose sediments at the Hanford site, Washington state | url=http://aem.asm.org/cgi/content/full/70/7/4230?view=long&pmid=15240306 |journal=Appl Environ Microbiol |volume=70 |issue=7 |pages=4230–41 |year=2004 |pmid=15240306 |doi=10.1128/AEM.70.7.4230-4241.2004}}</ref>, जल में, भू-पपड़ी में, यहां तक की कार्बनिक पदार्थों में तथा पौधौं एवं जन्तुओं के शरीर के भीतर भी पाये जाते हैं। साधारणतः एक ग्राम मिट्टी में ४ करोड़ जीवाणु [[कोशिका|कोष]] तथा १ मिलीलीटर जल में १० लाख [https://alarmforstudy.blogspot.com/2019/06/Bacteria.html?m=1 जीवाणु] पाए जाते हैं। संपूर्ण पृथ्वी पर अनुमानतः लगभग ५X१०<sup>३०</sup> [https://alarmforstudy.blogspot.com/2019/06/Bacteria.html?m=1 जीवाणु] पाए जाते हैं। <ref>{{cite journal |author=Whitman W, Coleman D, Wiebe W |title=Prokaryotes: the unseen majority | url=http://www.pnas.org/cgi/content/full/95/12/6578 |journal=Proc Natl Acad Sci U S a |volume=95 |issue=12 |pages=6578–83 |year=1998|pmid = 9618454 |doi=10.1073/pnas.95.12.6578}}</ref> जो संसार के बायोमास का एक बहुत बड़ा भाग है।<ref>{{cite journal |author=Whitman W, Coleman D, Wiebe W |title=Prokaryotes: the unseen majority |url=http://www.pnas.org/cgi/content/full/95/12/6578 |journal=Proc Natl Acad Sci U S a |volume=95 |issue=12 |pages=6578–83 |year=1998|pmid=9618454 |doi=10.1073/pnas.95.12.6578}}</ref> ये कई तत्वों के चक्र में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, जैसे कि वायुमंडलीय [[नाइट्रोजन]] के स्थरीकरण में। हलाकि बहुत सारे वंश के जीवाणुओं का श्रेणी विभाजन भी नहीं हुआ है तथापि लगभग आधी प्रजातियों को किसी न किसी प्रयोगशाला में उगाया जा चुका है।<ref name=Rappe>{{cite journal |author=Rappé MS, Giovannoni SJ |title=The uncultured microbial majority |journal=Annu. Rev. Microbiol. |volume=57 |issue= |pages=369–94 |year=2003 |pmid=14527284 |doi=10.1146/annurev.micro.57.030502.090759}}</ref> जीवाणुओं का अध्ययन [[बैक्टिरियोलोजी]] के अन्तर्गत किया जाता है जो कि सूक्ष्म जैविकी की ही एक शाखा है।<br />
मानव शरीर में जितनी भी मानव कोशिकाएं है, उसकी लगभग १० गुणा संख्या तो [https://alarmforstudy.blogspot.com/2019/06/Bacteria.html?m=1 जीवाणु] कोष की ही है। इनमें से अधिकांश जीवाणु त्वचा तथा अहार-नाल में पाए जाते हैं।<ref>{{cite journal |author=Sears CL |title=A dynamic partnership: celebrating our gut flora |journal=Anaerobe |volume=11 |issue=5 |pages=247–51 |year=2005 |pmid=16701579 |doi=10.1016/j.anaerobe.2005.05.001}}</ref> हानिकारक जीवाणु इम्यून तंत्र के रक्षक प्रभाव के कारण शरीर को नुकसान नहीं पहुंचा पाते। कुछ [https://alarmforstudy.blogspot.com/2019/06/Bacteria.html?m=1 जीवाणु] लाभदायक भी होते हैं। अनेक प्रकार के परजीवी [https://alarmforstudy.blogspot.com/2019/06/Bacteria.html?m=1 जीवाणु] कई रोग उत्पन्न करते हैं, जैसे - हैजा, मियादी बुखार, निमोनिया, [[तपेदिक]] या [[क्षयरोग]], [[प्लेग]] इत्यादि. सिर्फ क्षय रोग से प्रतिवर्ष लगभग २० लाख लोग मरते हैं, जिनमें से अधिकांश उप-सहारा क्षेत्र के होते हैं।<ref>{{cite web | url = http://www.who.int/healthinfo/bodgbd2002revised/en/index.html | title = 2002 WHO mortality data | accessdate = 2007-01-20}}</ref> विकसित देशों में जीवाणुओं के संक्रमण का उपचार करने के लिए तथा कृषि कार्यों में [[प्रतिजैविक]] का उपयोग होता है, इसलिए जीवाणुओं में इन प्रतिजैविक दवाओं के प्रति प्रतिरोधक शक्ति विकसित होती जा रही है। औद्योगिक क्षेत्र में जीवाणुओं की किण्वन क्रिया द्वारा [[दही]], [[पनीर]] इत्यादि वस्तुओं का निर्माण होता है। इनका उपयोग प्रतिजैविकी तथा और रसायनों के निर्माण में तथा [[जैवप्रौद्योगिकी]] के क्षेत्र में होता है।<ref>{{cite journal |author=Ishige T, Honda K, Shimizu S |title=Whole organism biocatalysis |journal=Curr Opin Chem Biol |volume=9 |issue=2 |pages=174–80 |year=2005 |pmid=15811802 |doi=10.1016/j.cbpa.2005.02.001}}</ref><br />
पहले जीवाणुओं को पौधा माना जाता था परंतु अब उनका वर्गीकरण [[प्रोकैरियोट्स]] के रूप में होता है। दूसरे जन्तु कोशिकों तथा [[यूकैरियोट्स]] की भांति [https://alarmforstudy.blogspot.com/2019/06/Bacteria.html?m=1 जीवाणु] कोष में पूर्ण विकसित [[केन्द्रक]] का सर्वथा अभाव होता है जबकि दोहरी झिल्ली युक्त कोशिकांग यदा कदा ही पाए जाते है। पारंपरिक रूप से [https://alarmforstudy.blogspot.com/2019/06/Bacteria.html?m=1 जीवाणु] शब्द का प्रयोग सभी सजीवों के लिए होता था, परंतु यह वैज्ञानिक वर्गीकरण [[१९९०]] में हुई एक खोज के बाद बदल गया जिसमें पता चला कि प्रोकैरियोटिक सजीव वास्तव में दो भिन्न समूह के जीवों से बने हैं जिनका [[क्रम विकास ]] एक ही पूर्वज से हुआ। इन दो प्रकार के जीवों को जीवाणु एवं [[आर्किया]] कहा जाता है।<ref name=autogenerated2>{{cite journal |author=Woese C, Kandler O, Wheelis M |title=Towards a natural system of organisms: proposal for the domains Archaea, Bacteria, and Eucarya| url=http://www.pnas.org/cgi/reprint/87/12/4576 |journal=Proc Natl Acad Sci U S a |volume=87 |issue=12 |pages=4576–9 |year=1990 |pmid=2112744 |doi=10.1073/pnas.87.12.4576}}</ref>
 
== इतिहास ==
27

सम्पादन