"बांग्लादेश में धर्म की स्वतंत्रता": अवतरणों में अंतर

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बांग्लादेश इस्लाम के साथ एक मुस्लिम बहुसंख्यक राष्ट्र है, क्योंकि देश का राज्य धर्म बहुसंख्यक और धर्म की स्वतंत्रता को अपने संविधान द्वारा गारंटीकृत है, जिसमें यह सभी नागरिकों को धर्म के बावजूद समान अधिकार देता है। बांग्लादेश में प्रमुख धर्म इस्लाम (90%) है, लेकिन जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण प्रतिशत हिंदू धर्म (9%) का पालन करता है। अन्य धार्मिक समूहों में बौद्ध 0.6%, (अधिकतर थेरवाद), ईसाई (0.3%, ज्यादातर रोमन कैथोलिक), और एनिमिस्ट (0.1%) शामिल हैं। बांग्लादेश की स्थापना एक धर्मनिरपेक्ष राज्य के रूप में की गई थी, लेकिन इस्लाम को राज्य धर्म बना दिया गया। 1980 के दशक में। लेकिन 2010 में, उच्च न्यायालय ने 1972 के संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों का पालन किया। अतिरिक्त कानूनी ग्राम न्यायालयों द्वारा महिलाओं के खिलाफ किए गए क्रूर वाक्यों की शिकायतों के बाद, इस्लामिक एडिट (फतवा) द्वारा दंड के खिलाफ उच्च न्यायालय ने भी अपना रुख मजबूत किया।<ref>{{cite web|url=http://www.banbeis.gov.bd/bd_pro.htm |title=Bangladesh: Country Profile |publisher=Bangladesh Buruae of Educational Information and Statistics |archive-url=https://web.archive.org/web/20110706132048/http://www.banbeis.gov.bd/bd_pro.htm |archive-date=6 July 2011 |accessdate=3 July 2010 |url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web |url=https://2009-2017.state.gov/documents/organization/256513.pdf |title=Bangladesh 2015 International Religious Freedom Report |website=United States Department of State |publisher=[[Bureau of Democracy, Human Rights, and Labor]]}}</ref>
==धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति==
संविधान इस्लाम को राज्य धर्म के रूप में स्थापित करता है, लेकिन यह भी कहता है कि अन्य धर्मों का सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है। मुस्लिम समुदाय से संबंधित इस्लामी कानून नागरिक मामलों में एक भूमिका निभाता है; हालाँकि, इस्लामी कानून का कोई औपचारिक कार्यान्वयन नहीं है, और यह गैर-मुस्लिमों पर नहीं लगाया गया है। पारिवारिक कानून में मुसलमानों, हिंदुओं और ईसाइयों के लिए अलग प्रावधान हैं। विवाह, तलाक और गोद लेने से संबंधित पारिवारिक कानून अलग-अलग लोगों की धार्मिक मान्यताओं पर निर्भर करते हैं। उदाहरण के लिए, मुस्लिम परिवार अध्यादेश के तहत महिलाओं को विरासत में कम और पुरुषों की तुलना में कम तलाक के अधिकार हैं। जेल कोड कैदियों द्वारा धार्मिक त्योहारों के पालन के लिए भत्ते बनाता है, जिसमें पर्व के दिनों के लिए अतिरिक्त भोजन तक पहुंच या धार्मिक उपवास की अनुमति शामिल है। २०१० में, उच्च न्यायालय ने १ ९ ,२ के संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों को रखा। उच्च-कानूनी ग्राम न्यायालयों द्वारा महिलाओं के खिलाफ किए गए क्रूर वाक्यों की शिकायतों के बाद, इस्लामिक एडिट ( फतवा ) द्वारा दंड के खिलाफ उच्च न्यायालय ने भी अपना रुख मजबूत किया।<ref name="Constitution">{{cite web|title=Constitution of the People's Republic of Bangladesh|url=http://www1.umn.edu/humanrts/research/bangladesh-constitution.pdf|website=University of Minnesota|accessdate=26 May 2016}}</ref>
2011 में, सरकार ने धार्मिक कल्याण ट्रस्ट (संशोधन) अधिनियम पारित किया, जो 1983 के ईसाई धार्मिक कल्याण ट्रस्ट अध्यादेश के अनुसार नवगठित ईसाई धार्मिक कल्याण ट्रस्ट के लिए धन प्रदान करता है। 2011 में सरकार ने निहित संपत्ति रिटर्न भी पारित किया। अधिनियम, जो देश की हिंदू आबादी से जब्त संपत्ति के लिए संभावित वापसी को सक्षम करता है। २०१२ में, सरकार ने हिंदू विवाह पंजीकरण अधिनियम पारित किया, जो हिंदुओं को सरकार के साथ विवाह करने का विकल्प प्रदान करता है। इस विधेयक का उद्देश्य हिंदू महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना था, जिनके अधिकार धार्मिक विवाह के तहत संरक्षित नहीं हैं।<ref name="USstate">{{cite web|title=Bangladesh|url=https://2009-2017.state.gov/j/drl/rls/irf/religiousfreedom/index.htm#wrapper|website=US State Department Report on Religion Freedom|accessdate=26 May 2016}}</ref> २०१३ में, सुप्रीम कोर्ट ने संविधान का उल्लंघन करने के लिए सबसे बड़ी इस्लामी राजनीतिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी को रोक दिया, जिससे चुनाव में भाग लेने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। हालाँकि, व्यवहार में प्रतिबंध लागू नहीं किया गया था।
 
= सन्दर्भ =
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