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== उद्योग और व्यापार ==
यह औद्योगिक विकास का गलियारा बन चुका है। गुड़गाँव में सूती वस्त्र, यंत्रचालित बुनाई और कृषि उपकरणों से संबंधित उद्योग हैं।हैं।सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी-सक्षम सेवा उद्योग में जिला गुड़गांव से कुल निर्यात वित्त वर्ष 2018 के अंत में 18,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
 
वर्ष 2006-07 में, गुड़गांव से सॉफ्टवेयर निर्यात 15,000 करोड़ रुपये था जबकि 2005-06 में यह 10,700 करोड़ रुपये था।
 
"गुड़गांव में, उद्योग लगभग 40 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, जो राष्ट्रीय औसत से बहुत अधिक है।
गुड़गांव आईटी / आईटीईएस निर्यात 18,000 करोड़ रुपये का है
सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी-सक्षम सेवा उद्योग में जिला गुड़गांव से कुल निर्यात वित्त वर्ष 2018 के अंत में 18,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
जबकि हरियाणा में उद्योग 34 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, राष्ट्रीय औसत लगभग 24 से 27 प्रतिशत से अधिक है, नई दिल्ली की राष्ट्रीय राजधानी से सटे गुड़गांव जिला तेजी से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) हब के रूप में उभर रहा है लगभग 350 आईटी और आईटी सक्षम सेवाएं (आईटीईएस) कंपनियां वहां फल-फूल रही हैं। 8-9 प्रतिशत की राष्ट्रीय विकास दर की तुलना में, गुड़गांव जिले की आर्थिक विकास दर अगले पांच वर्षों के दौरान 10-15 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, वर्तमान हरियाणा सरकार द्वारा नई उद्योग नीति लागू करने के परिणामस्वरूप। भूपिंदर सिंह हुड्डा और प्रचलित उदार औद्योगिक वातावरण। गुड़गांव जिले में औद्योगिक क्षेत्र का वार्षिक कारोबार 18,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ 73,500 करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया है। 1375 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 475 बड़ी और मध्यम पैमाने की इकाइयाँ हैं और 4,00067 करोड़ रुपये के निवेश के साथ लगभग 10,000 लघु पैमाने की इकाइयाँ हैं। हरियाणा सरकार द्वारा तैयार की गई आईटी नीति से इस उद्योग को और अधिक रोजगार के अवसरों के सृजन के लिए और अधिक संभावनाएं मिल सकती हैं। विभिन्न इकाइयों को दिए गए प्रमुख प्रोत्साहन में फर्श क्षेत्र अनुपात में छूट, पंजीकरण पर छूट, संपत्ति शुल्क का हस्तांतरण, हरियाणा की दुकानों के तहत छूट और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम शामिल हैं। कपड़ा कोटा शासन की समाप्ति, कम ब्याज दर, तेजी से तकनीकी परिवर्तन और श्रम सुधार आगे उद्योगों की उत्पादकता को बढ़ावा देने की संभावना है। वर्तमान हरियाणा सरकार द्वारा हरियाणा औद्योगिक संवर्धन नियम -2017 के लागू होने से पाँच करोड़ रुपये तक की औद्योगिक इकाइयों में निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। 570 करोड़ रुपये की लागत से कुतुब मीनार-गुड़गांव मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण प्रगति पर है, जो जनवरी 2010 तक पूरा होने की संभावना है। इस परियोजना पर अब तक 154.77 करोड़ रुपये का व्यय किया गया है। इस मेट्रो रेल लिंक की लंबाई 7.08 किमी है और इसमें गार्डन स्टेशन, सिकंदरपुर, डीटी सिटी सेंटर, इफ्को चौक और सुशांत लोक नाम के पांच स्टेशन होंगे। इससे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और गुड़गांव के बीच कनेक्टिविटी में और सुधार होगा। वर्षों से, गुड़गांव जिले में विकास के सभी क्षेत्रों में विशेष रूप से शहरीकरण और औद्योगिक जलवायु बनाने में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसलिए, यह न केवल हरियाणा के प्रमुख शहरों में से एक के रूप में माना जाता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'साइबर सिटी' के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त की है। गुड़गांव को अक्सर 'दूसरा सिंगापुर' और 'मिलेनियम सिटी' के रूप में जाना जाता है। राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर घोषित कई नीतिगत पहलों ने जिले में तेजी से औद्योगिकीकरण के लिए एक प्रोत्साहन प्रदान किया है। दिल्ली-जयपुर रोड के राष्ट्रीय राजमार्ग पर इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकटता में इसका आदर्श स्थान और मौजूदा सड़कों और संचार नेटवर्क और कुल विद्युतीकरण जैसे अच्छी तरह से विकसित बुनियादी ढाँचे के आधार ने गुड़गांव को विदेशी से जुड़े उच्च मूल्य परियोजनाओं के लिए सबसे अधिक स्थान दिया है। भारी निवेश के साथ सहयोग। राज्य सरकार द्वारा आईटी नीति की घोषणा के बाद, गुड़गांव आईटी उद्योग के लिए एक पसंदीदा स्थान बन गया है। आईटी उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, गुड़गांव में एक क्षेत्रीय आईटी उद्योग संवर्धन कार्यालय स्थापित किया गया है। गुड़गांव में इलेक्ट्रॉनिक सिटी हाई-टेक और निर्यात उन्मुख इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी उद्योग के लिए 40 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक सिटी के भीतर 14,000 वर्ग फुट के क्षेत्र में एक सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क विकसित किया जा रहा है। यह सॉफ्टवेयर इकाइयों को आवंटित किया जाता है। पार्क में स्थित इकाइयों के लाभ के लिए उपग्रह संचार लिंक प्रदान किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक सिटी में सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार परिसर को विश्व स्तर की सुविधाओं जैसे पृथ्वी स्टेशन, टेलीकांफ्रेंसिंग, इंटरनेट-मेल सेवा और कला संचार सेवा के अन्य राज्य के साथ कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर निर्यात के लिए योजना बनाई गई है। गुड़गांव की औद्योगिक इकाइयों ने वर्ष 2006-07 के दौरान 20,000 करोड़ रुपये के माल का निर्यात किया है। इसमें से 14,000 करोड़ रुपये का निर्यात आईटी सेक्टर में, 2,500 करोड़ रुपये ऑटोमोबाइल क्षेत्र में, 2,000 करोड़ रुपये रेडीमेड कपड़ों के क्षेत्र में और 1500 करोड़ रुपये अन्य क्षेत्रों में हैं। गुड़गांव से निर्यात की जाने वाली मुख्य वस्तुओं में ब्रिटेन, अल्जीरिया, हंगरी, डेनमार्क, नीदरलैंड, कोलंबिया, श्रीलंका, जापान, बांग्लादेश, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया, कोरिया, दक्षिण अफ्रीका के लिए कार, मोटरसाइकिल, सॉफ्टवेयर, रेडीमेड वस्त्र, खेल के सामान और चावल शामिल थे। अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रिया और मैक्सिको गुड़गांव अब बैंगलोर और चेन्नई के बाद भारत में देश के प्रमुख सॉफ्टवेयर निर्यात स्थानों में तीसरे स्थान पर है। औद्योगिक क्षेत्र में उत्पन्न रोजगार 3.51 लाख व्यक्तियों से अधिक है। कारों, मोटरसाइकिलों, ऑटोमोबाइल भागों, दूरसंचार उपकरणों, बिजली के सामान, सॉफ्टवेयर विकास, हार्डवेयर, खेल के सामान, रबर उत्पादों, रेडीमेड कपड़ों, हल्के इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, टेरी तौलिए, खाद्य पदार्थों, हवा के निर्माण में कई प्रमुख इकाइयाँ हैं। स्थितियां, जूते, कीटनाशक और कीटनाशक।
गुरुग्राम (पूर्व में गुड़गांव) उत्तर भारत में नई दिल्ली के बाहर स्थित है; और पश्चिम भारत में मुंबई और पुणे।
 
तीव्र तथ्य:
 
भारत एक शीर्ष वैश्विक बाजार है जिसमें 1.3 बिलियन नागरिकों, एक मध्यम वर्ग और 7 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक विकास दर के साथ कई अवसर हैं।
भारत ने 2017 में यू.एस. से कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में $ 2.2 बिलियन का आयात किया (NAICS कोड 334)।
भारत 550 मिलियन से अधिक इंटरनेट कनेक्शन और 500 मिलियन से अधिक स्मार्ट फोन उपयोगकर्ताओं के साथ दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ता दूरसंचार बाजार है।
भारत में आईसीटी बाजार का अनुमान $ 180 बिलियन है और इसे 2025 तक $ 350 बिलियन तक बढ़ने का अनुमान है।
आईसीटी हार्डवेयर बाजार का अनुमान 20 बिलियन डॉलर है।
आईसीटी क्षेत्र की विकास दर प्रति वर्ष 9 प्रतिशत से अधिक है और यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 9 प्रतिशत योगदान देता है।
डिजिटल इंडिया पहल का उद्देश्य डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधार करना है, और यह और अन्य प्रमुख सरकारी पहल आईसीटी क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देगी और अमेरिकी कंपनियों के लिए अवसर खोलेगी।
भारत में सभी प्रमुख वैश्विक वितरकों के साथ एक सुव्यवस्थित वितरण प्रणाली है। कंपनियां सीधे बिक्री कर सकती हैं, लेकिन एजेंट, प्रतिनिधि या वितरक के माध्यम से भारत में स्थानीय उपस्थिति बनाना उचित है। प्रत्यक्ष बिक्री, साथ ही साथी सिस्टम इंटीग्रेटर्स और मूल्य वर्धित पुनर्विक्रेताओं (VAR) का उपयोग करना आम है। क्लाउड प्लेटफ़ॉर्म पर सदस्यता-आधारित बिक्री भी आम है।
 
हाल के वर्षों में, डेटा संरक्षण और गोपनीयता भारत में एक प्रमुख चिंता का विषय रहा है। सरकार डेटा गोपनीयता, संरक्षण और स्थानीयकरण के लिए विभिन्न बिल और दिशानिर्देश लेकर आई है। सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी मध्यस्थ दिशानिर्देश नियम-2018, एक मसौदा व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, मसौदा ई-कॉमर्स नीति, राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति, इलेक्ट्रॉनिक्स पर राष्ट्रीय नीति और सॉफ्टवेयर उत्पादों पर राष्ट्रीय नीति पेश की है क्योंकि इसका उद्देश्य डिजिटल अर्थव्यवस्था का विकास करना है।
 
भारत पिछले पांच साल में 207 मिलियन से अधिक भारतीयों के डिजिटल तकनीक को तेजी से अपना रहा है। दिसंबर 2018 में स्मार्टफ़ोन की पहुंच 2013 में 5.5 प्रति 100 लोगों से बढ़कर 26.2 हो गई है। 2016 के मध्य से प्रति उपयोगकर्ता मासिक मोबाइल डेटा की खपत में 2016 के बाद से 54 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। प्रति उपयोगकर्ता मासिक फिक्स्ड लाइन डेटा की खपत 2018 में 2014 के दौरान 7.1 जीबी से 18.3 जीबी तक पहुंच गई है (MeitY, 2019)।
 
भारत में 1.2 बिलियन मोबाइल सब्सक्रिप्शन के साथ दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता आधार और सितंबर 2018 तक 560 मिलियन इंटरनेट सब्सक्रिप्शन के साथ दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट सब्सक्राइबर आधार है। भारत सरकार ने भारतीयों को 1.2 बिलियन से अधिक आधारभूत डिजिटली सत्यापन योग्य पहचान जारी की है जो सबसे बड़ा राष्ट्रीय रोलआउट है। विश्व स्तर पर। भारतीय इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने 2018 में 12.3 बिलियन ऐप डाउनलोड दर्ज किए। भारत में अब व्हाट्सएप (MeitY, 2019) जैसे इंस्टेंट-मैसेजिंग सेवाओं पर 294 मिलियन से अधिक सक्रिय सोशल मीडिया उपयोगकर्ता और 200 मिलियन उपयोगकर्ता सक्रिय हैं।
 
भारत में वर्तमान में लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल है और एक चौथाई से भी कम टॉवर फाइबर से जुड़े हुए हैं। भारत अपने प्रमुख कार्यक्रम Net BharatNet ’(MeitY, 2019) के माध्यम से 600,000 गांवों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने के उद्देश्य से दुनिया के सबसे बड़े ग्रामीण ऑप्टिक फाइबर रोल-आउट पर काम कर रहा है।
 
बुनियादी ढांचे की चुनौतियों के बावजूद, भारत में क्लाउड सेवा बाजार तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में भारत में क्लाउड खर्च का अनुमान $ 2.12 बिलियन से अधिक है, जिसमें बेहतर बुनियादी ढाँचे और क्लाउड सेवाओं को अपनाने, स्मार्टफ़ोन के माध्यम से इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), आईओटी जैसी नई तकनीकों की ओर बढ़ते उपयोगकर्ताओं और अंत उपयोगकर्ताओं के लिए एक मजबूत सरकारी धक्का है। और ब्लॉकचेन।
 
चूंकि भारत क्लाउड के माध्यम से वस्तुओं को प्रदान करने की विभिन्न कर योग्यताओं और संभावित जटिलताओं की समीक्षा करता है, इसलिए अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं या सेवा प्रदाताओं के लिए यह सलाह दी जाती है कि वे कर के मुद्दों के बारे में विशेषज्ञों से सलाह लें।
भारत में डेटा स्थानीयकरण, और अनुपालन आवश्यकताओं।
 
बेस्ट प्रॉस्पेक्ट्स सब-सेक्टर्स
प्रमुख उद्योग कार्यक्षेत्रों में साइबर सुरक्षा की महत्वपूर्ण अवसंरचना की तत्काल आवश्यकता है।
भारत का साइबर सुरक्षा बाजार $ 2.1 बिलियन का अनुमानित है और प्रति वर्ष 10 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।
ई-कॉमर्स और डिजिटल भुगतान के लिए समाधान।
आईटीईएस-बीपीओ के लिए समाधान (सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाएं - व्यवसाय प्रक्रिया आउटसोर्सिंग)।
हेल्थकेयर आईटी, विशेष रूप से क्लाउड-आधारित समाधान और दूरस्थ निदान और टेलीमेडिसिन समाधान।
एआई, ब्लॉकचैन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां।
IoT और उद्योग 4.0 सहित औद्योगिक स्वचालन।
 
डिजिटल टैकनोलजी
IoT बाजार 2022 तक 2 बिलियन जुड़े उपकरणों (KPMG, 2019) के साथ $ 11.1 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। फोकस क्षेत्रों में कृषि, स्वास्थ्य, पानी की गुणवत्ता, प्राकृतिक आपदा, परिवहन, सुरक्षा, ऑटोमोबाइल, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, स्मार्ट शहर, स्वचालित मीटरिंग और उपयोगिताओं की निगरानी, ​​अपशिष्ट प्रबंधन और तेल और गैस शामिल हैं।
 
साइबर सुरक्षा
सभी आकारों के कारोबार के साथ और सरकार ने आईसीटी सुरक्षा, साइबर सुरक्षा सेवाओं (परामर्श, कार्यान्वयन, समर्थन और प्रबंधित सुरक्षा सेवाओं) पर अपने खर्च में वृद्धि की है, यह सबसे तेजी से बढ़ता हुआ खंड है और भारत में एक प्रमुख अवसर होने की उम्मीद है।
 
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
प्रति उद्योग स्रोतों में वर्टिकल में AI- आधारित समाधानों के बढ़ते प्रभाव के कारण भारतीय कंपनियों द्वारा AI पर खर्च बढ़ने की उम्मीद है। AI को 2035 तक भारत की अर्थव्यवस्था में $ 1 ट्रिलियन जोड़ने की उम्मीद है (KPMG, 2019)। चीन और अमेरिका के बाद एआई पर शोध में भारत का तीसरा स्थान है।
 
रोबोटिक
भारत में उद्योगों में रोबोटिक्स तेजी से बढ़ रहा है। भारत में विनिर्माण उद्योग, दवा, पैकेजिंग, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, धातु, वस्त्र और मोटर वाहन क्षेत्रों जैसे कई क्षेत्रों में रोबोटिक तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है। भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र एक और क्षेत्र है जहाँ महत्वपूर्ण सर्जरी और पुनर्वास के लिए रोबोट तकनीक को तेजी से अपनाया गया है।
 
Blockchain
वर्ष 2018-24 (केपीएमजी, 2019) में ब्लॉकचेन बाजार 58 प्रतिशत के सीएजीआर से बढ़ने की उम्मीद है। बैंकिंग और वित्त क्षेत्रों ने सबसे ज्यादा गोद लिया है। स्वास्थ्य देखभाल, खुदरा और रसद जैसे अन्य उद्योग भी तेजी से गोद लेने में तेजी ला रहे हैं। ब्लॉकचेन का उपयोग व्यापार वित्त, सीमा पार से भुगतान, बिल छूट, आपूर्ति श्रृंखला वित्तपोषण और डिजिटल पहचान के क्षेत्रों में भी किया गया है।
 
हेल्थकेयर आईटी
भारत में इस क्षेत्र में क्लाउड-आधारित समाधानों और दूरस्थ निदान और टेलीमेडिसिन समाधानों में वृद्धि को देखने की उम्मीद है।
 
अवसर
केपीएमजी के अनुसार, भारतीय ई-कॉमर्स बाजार 2022 तक $ 150 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। ऑनलाइन दुकानदारों के तेजी से विकास के कारण ई-टेलिंग उद्योग बढ़ने की उम्मीद है। बड़े उपकरण भारतीय ई-टेलिंग में सबसे तेजी से बढ़ती श्रेणियों में से एक हैं, जिसका सकल व्यापार मूल्य 2018 में 100 प्रतिशत बढ़ रहा है। भारत का $ 1 बिलियन ऑनलाइन किराना बाजार 2017-2020 से $ 5 बिलियन तक पहुंचने के लिए लगभग 71 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ रहा है। टियर -2 ऑनलाइन शॉपर आबादी ई-टेलिंग के लिए ग्रोथ ड्राइवर है - मेट्रो शहरों की तुलना में 3 गुना तेजी से बढ़ रहा है। ऑनलाइन गतिशीलता 2020 तक सभी सार्वजनिक परिवहन सवारी की वर्तमान 1-2 प्रतिशत हिस्सेदारी से बड़ा होने की उम्मीद है।
 
KPMG के अनुसार, भारत में 2023 तक डिजिटल भुगतान $ 1 ट्रिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। दो साल पहले विमुद्रीकरण लागू होने के बाद डिजिटल भुगतान में काफी वृद्धि हुई है। नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फ़ंड ट्रांसफ़र (NEFT) लेनदेन 2016 में $ 141 बिलियन से बढ़कर 2018 में $ 2.57 ट्रिलियन हो गया। नवप्रवर्तन भारत की डिजिटल भुगतान अर्थव्यवस्था की वृद्धि के लिए सबसे बड़े ड्राइवरों में से एक रहा है। भारत की रीयल-टाइम मनी ट्रांसफर प्लेटफॉर्म इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) को अमेरिका स्थित रिसर्च फर्म फिडेलिटी नेशनल इंफॉर्मेशन सर्विसेज (FIS) द्वारा सर्वश्रेष्ठ वैश्विक भुगतान नवाचार का दर्जा दिया गया है। व्हाट्सएप (लगभग 200 मिलियन उपयोगकर्ताओं के साथ) ने अपने भुगतान सुविधा को चालू कर दिया है जो वर्तमान में केवल भारत में उपलब्ध है, UPI पर आधारित एक सहकर्मी से सहकर्मी प्रणाली भारत में डिजिटल भुगतान क्रांति को गति प्रदान करेगी।
 
केपीएमजी के अनुसार, भारत डिजिटल स्वास्थ्य बाजार 2019-25 के दौरान 35 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ने की उम्मीद है। भारत का टेलीमेडिसिन बाजार, जो 20 प्रतिशत से अधिक की सीएजीआर से बढ़ रहा है, 2020 तक $ 32 मिलियन का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है। डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, दूरसंचार और वायरलेस प्रौद्योगिकियों के साथ तकनीकी समाधानों के अभिसरण से विश्वसनीयता में सुधार होगा। चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने की लागत में लगातार वृद्धि हो रही है और तकनीकी नवाचार के साथ यह पैमाने और कम लागत को सक्षम करेगा, गोद लेने में मदद करेगा। डिजिटल स्वास्थ्य स्टार्ट-अप ने ग्राहकों और निवेशकों के साथ कर्षण प्राप्त किया है।
 
KPMG के अनुसार, भारत में साइबर सुरक्षा बाजार 2023 तक $ 35 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। भारत ने 2018 में एक व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक का मसौदा तैयार किया। भारत में सार्वजनिक क्लाउड बाजार के निकट भविष्य में लगभग $ 2 बिलियन के मूल्य तक पहुंचने की उम्मीद है
आईटी-आईटीईएस उद्योग द्वारा निर्यात के प्रति प्रदर्शन और योगदान
राजस्व
निर्यात
घरेलू
राजस्व
जैसा कि आंकड़े 1 में दिखाया गया है, वित्त वर्ष 2017-18 में भारतीय आईटी-आईटीईएस उद्योग का राजस्व $ 151.0 बिलियन अमरीकी डालर का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2017-17 में अमरीकी डालर 141.0 बिलियन की तुलना में लगभग 7.0% की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले पाँच वर्षों में इस क्षेत्र की समग्र उद्योग वृद्धि नीचे दी गई तालिका में दी गई है।
 
वर्ष / विवरण 2013- 14 2014- 15 2015- 16 2016- 17 2017- 18 (ई) सीएजीआर% (2013-18)
निर्यात 87,3 97,8 107,8 117,0 126,0 10,49
घरेलू 19,0 21,0 21,7 24,0 25,0 5,42
कुल 106,3 118,8 129,5 141,0 151,0 9,55
स्रोत: NASSCOM SR-2018, E: अनुमान
 
 
 
चित्र 1: भारतीय आईटी-आईटीईएस उद्योग राजस्व
 
आंकड़े 2 के अनुसार, आईटी सेवा 86.0 बिलियन अमेरिकी डॉलर के 57% के सबसे बड़े हिस्से के लिए निर्यात करती है; ईआरएंडडी और सॉफ्टवेयर उत्पाद 21.8% शेयर के साथ दूसरे सबसे बड़े खंड के रूप में उभरे हैं, इसके बाद बीपीओ निर्यात 21.2% योगदान देता है।
 
 
 
चित्र 2: आईटी / आईटीईएस क्षेत्र के विभिन्न खंडों का राजस्व हिस्सा (% में) स्रोत: नैस्कॉम एसआर-2018
 
निर्यात
जैसा कि आंकड़े 3 में दिखाया गया है, वित्त वर्ष 2017-18 में आईटी-आईटीईएस निर्यात का अनुमान $ 126.0 बिलियन है, जो वित्त वर्ष 2017-17 में 7.7% से अधिक है। विघटनकारी तकनीकों जैसे एसएमएसी (सोशल मीडिया, मोबिलिटी, एनालिटिक्स एंड क्लाउड), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एंबेडेड सिस्टम आदि के समाधान का एक संयोजन उद्योग की जीवन शक्ति बन गया है।
 
भारतीय आईटी-आईटीईएस क्षेत्र में आईटी सेवा सबसे तेजी से बढ़ने वाला खंड है। इस खंड का अनुमान है कि वर्ष २०१ compared-१ generate में अमेरिका के ६ ९ .३ बिलियन डॉलर के ऑर्डर का निर्यात राजस्व पैदा होगा, जबकि वर्ष २०१६-१ generate में यह यूएस $ ६६.० बिलियन था।
 
ITeS / BPO सेगमेंट पिछले कुछ वर्षों में अपने आप को मजबूत कर रहा है और वर्ष 2016-18 में यूएस $ 26 बिलियन की तुलना में वर्ष 2017-18 में ~ US $ 28.4 बिलियन के ऑर्डर का निर्यात राजस्व उत्पन्न करने की उम्मीद है।
 
इंजीनियरिंग आरएंडडी और उत्पाद विकास ने निर्यात में लगभग 12% की वृद्धि दर्ज की है, जो कि वर्ष 2017-18 में वर्ष 2017-18 में $ 25.0 बिलियन के स्तर से 28-18 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
 
वर्ष / खंड 2013- 14 2014-15 2015-16 2016 -17 2017- 18 (ई) सीएजीआर% (2013-18)
आईटी सेवा 49.2 55.3 61.0 66.0 69.3 10.07
आईटीईएस-बीपीओ 20,4 22,5 24,4 26,0 28,4 9,19
सॉफ्टवेयर उत्पाद, इंजीनियरिंग सेवाएं, आर एंड डी 17.7 20.0 22.4 25.0 28.3 13.09
कुल आईटी-आईटीईएस 87.3 97.8 107.8 117.0 126.0 10.32
स्रोत: NASSCOM SR-2018, E: अनुमानित
 
 
 
चित्र 3: आईटी / आईटीईएस सेक्टर में विभिन्न खंडों का निर्यात
 
स्रोत: NASSCOM SR-2018, E: अनुमानित
 
घरेलू बाजार
घरेलू बाजार का आकार अब आईटी / आईटीईएस क्षेत्र में महत्वपूर्ण हो गया है, हालांकि यह मुख्य रूप से निर्यात संचालित है। जैसा कि चित्र 4 में दिखाया गया है, वित्त वर्ष 2017-18 में घरेलू आईटी-आईटीईएस राजस्व (हार्डवेयर को छोड़कर) INR 1738 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2017-17 में INR 1608 बिलियन की तुलना में, y-o-y की वृद्धि ~ 8.7% है। वित्त वर्ष 2018 में, भारत का घरेलू आईटी-बीपीएम बाजार 2016-17 में 38 बिलियन अमेरिकी डॉलर की तुलना में ई-कॉमर्स को छोड़कर, यूएस $ 41 बिलियन (~ (273750 करोड़) तक पहुंचने के लिए 7.9% वाई-ओ-वाई बढ़ने की संभावना है। तेजी से डिजिटलीकरण से विकास को और गति मिलने की उम्मीद है। घरेलू आईटी-बीपीएम उद्योग में भी निरंतर वृद्धि देखी जा रही है क्योंकि विभिन्न सरकारी पहलें प्रौद्योगिकी के उपयोग (पुश फैक्टर) को प्रोत्साहित करती हैं और उद्योगों में भारतीय उद्यम तेजी से बदलते प्रतिस्पर्धी परिदृश्य और हमेशा की मांग वाले ग्राहक के अनुकूल होने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों को तेजी से लागू कर रहे हैं। घरेलू आईटी सेवा क्षेत्र 40.5% शेयर के साथ सबसे बड़ा सेगमेंट है, जो the तक पहुंचने की उम्मीद है। वर्ष २०१६-१ in में ११३६०० करोड़ रुपए की तुलना में वर्ष २०१६-१ in में ores १००५०० करोड़ रुपए की तुलना में INR शर्तों में लगभग १३.१% की वृद्धि हुई है।
 
पिछले 5 वर्षों में आईटी-आईटीईएस उद्योग घरेलू राजस्व वृद्धि की प्रवृत्ति निम्नानुसार है:
 
वर्ष / सेगमेंट 2013- 14 2014- 15 2015- 16 2016- 17 2017-18 (ई) सीएजीआर% (2013-18)
आईटी सेवा 72721.6 81662 89562 100500 113600 11.37
आईटीईएस-बीपीओ 19593,8 21490 23364 26800 26800 8,90
सॉफ्टवेयर उत्पाद इंजीनियरिंग सेवाएं 22468.8 25788 27907 33500 33500 10.32
कुल IT-ITeS 114784.2 128940 140833 160800 173800 10.75
स्रोत: NASSCOM SR-2018, E: अनुमानित
 
 
 
चित्र 4: आईटी / आईटीईएस सेक्टर में विभिन्न खंडों का घरेलू राजस्व
सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) का लक्ष्य देश में अपने आगामी 28 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से निर्यात को बढ़ावा देना है।
 
एसटीपीआई ने 28 ऐसे केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है, जिनमें सॉफ्टवेयर उत्पादों के नवाचार और आरएंडडी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। केंद्रों पर तैयार किए गए उत्पाद घरेलू बाजार की मांग को पूरा करेंगे और निर्यात को भी मजबूत करेंगे।
 
 
“वर्षों से, आईटी उद्योग ने मूल्य श्रृंखला को आगे बढ़ाया है। हमारा उद्देश्य अधिक सॉफ्टवेयर उत्पादों का निर्माण करना है और वैश्विक बाजारों का एक बड़ा हिस्सा हड़पना है। वर्तमान में, हमारे सॉफ्टवेयर उत्पादों का निर्यात $ 500 बिलियन के वैश्विक बाजार आकार के मुकाबले $ 8 बिलियन है। लेकिन 2025 तक, वे संभावित रूप से $ 80-90 मिलियन तक कूद सकते हैं। एसटीपीआई के महानिदेशक ओंकार राय ने कहा कि सॉफ्टवेयर उत्पादों के नवाचारों में व्यवधान की शक्ति है और हमारे नियोजित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) नए उत्पादों के विकास को बढ़ावा देने में मदद करेंगे। '
 
नए सीओई चेन्नई, बेंगलुरु, लखनऊ, भुवनेश्वर, पटना, मोहाली, हैदराबाद, गुरुग्राम में आ रहे हैं और उनमें से छह उत्तर पूर्वी क्षेत्र में भी हैं। इन अत्याधुनिक केंद्रों को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय, संबंधित राज्य सरकारों, उद्योग के खिलाड़ियों और एसटीपीआई के स्वयं के योगदान के साथ लगभग 400 करोड़ रुपये की आवश्यकता है।
 
“केंद्र एसटीपीआई या शैक्षणिक संस्थानों में आ सकते हैं। STPI में इलेक्ट्रोप्रेनुर पार्क भी है, जिसे पहली बार 2016 में दिल्ली विश्वविद्यालय के भीतर भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) के सहयोग से स्थापित किया गया था और दूसरा भुवनेश्वर में आ रहा है। हमारे प्रत्येक सीओई हर साल 20 स्टार्ट-अप का पोषण करेंगे। राय ने कहा कि इस तरह के चार केंद्र पहले ही लॉन्च किए जा चुके हैं।
 
अब तक, भारतीय आईटी उद्योग साल-दर-साल 13 प्रतिशत बढ़ रहा है। हालांकि, नए सीओई इस वृद्धि को 20 फीसदी तक लाने में मदद करेंगे, उन्होंने महसूस किया।
 
STPI की शहरों की एक सरणी में मौजूद है- बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, त्रिवेंद्रम, कानपुर, कोलकाता भुवनेश्वर, मुंबई, नागपुर, वारंगल, काकीनाडा, लखनऊ पुणे, सूरत, तिरुपति, विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम। एसटीपीआई पंजीकृत इकाइयों से पिछले वित्त वर्ष में देश के सॉफ्टवेयर निर्यात का 50 प्रतिशत से अधिक का मूल्य 4.16 ट्रिलियन रुपये था।
2018-19 में भारत से आईटी निर्यात 7-9 पीसी बढ़कर 137 बी डॉलर हो जाने की उम्मीद है: नैसकॉम बाय विशाल कृष्णा 21 फरवरी 2018 +0 भारतीय सॉफ्टवेयर में मूल्य में गिरावट नहीं देखी जा रही है। एआई और क्लाउड के माध्यम से नई सेवाओं के आगमन के लिए धन्यवाद, आईटी निर्यात बड़ा हो रहा है। नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) ने वर्तमान वर्ष के लिए प्रमुख रुझानों और अगले साल के लिए नैसकॉम इंडिया लीडरशिप फोरम में सूचना प्रौद्योगिकी पर विश्व कांग्रेस (डब्ल्यूसीआईटी) के साथ मिलकर दृष्टिकोण की घोषणा की। "वर्ष 2017-18 एक म्यूट नोट पर शुरू हुआ, लेकिन वर्ष की दूसरी छमाही में बेहतर वृद्धि से प्रेरित होकर निर्यात राजस्व 16.7 बिलियन डॉलर हो सकता है, जो निर्यात राजस्व के लिए 7.8 प्रतिशत और घरेलू राजस्व में 10 प्रतिशत की वृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है। नैसकॉम के चेयरमैन रमन रॉय कहते हैं, "जीएमवी के संदर्भ में ई-कॉमर्स सेक्टर के 17 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है।" रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत का आईटी निर्यात 7-9 प्रतिशत बढ़कर 135 बिलियन डॉलर - 2018-19 में 137 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। चालू वित्त वर्ष के दौरान आईटी निर्यात $ 126 बिलियन होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7-8 प्रतिशत अधिक है। घरेलू राजस्व, हार्डवेयर को छोड़कर, इस वर्ष 26 बिलियन डॉलर के मुकाबले अगले वित्त वर्ष में 10-12 प्रतिशत बढ़कर 28 बिलियन डॉलर- 29 बिलियन डॉलर होने की उम्मीद है। 2018-19 के दौरान, उद्योग को एक लाख नई नौकरियों को जोड़ने की उम्मीद है, वही संख्या जो चालू वर्ष के दौरान जोड़ी गई है। नैसकॉम के अध्यक्ष आर चंद्रशेखर ने कहा कि यह रुझान वैश्विक आर्थिक विकास और डिजिटल खर्च में वृद्धि पर आधारित है। नैसकॉम को उम्मीद है कि उद्योग का भविष्य 'डिजिटल एट स्केल' में निहित होगा क्योंकि वैश्विक डिजिटल खर्च सालाना 20 प्रतिशत बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2018 में भारत का डिजिटल राजस्व 30 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो कि क्षेत्र द्वारा निर्मित डिजिटल क्षमताओं में एक ठोस आधार के लिए आधार है। "यह सॉफ्टवेयर और सेवा उद्योग के लिए $ 150 बिलियन को पार करने के लिए एक महान मील का पत्थर है - एक दशक से भी कम समय में आकार में ट्रिपलिंग। बी 2 बी स्टार्टअप क्षेत्र की वृद्धि भी भारत और दुनिया के लिए अभिनव समाधान बनाने के लिए भारत के लिए एक अनूठा अवसर का प्रतिनिधित्व करती है। हालांकि नैसकॉम के चेयरमैन रमन रॉय ने कहा, "आगे झूठ और भी रोमांचक है। छोटे डिजिटल पायलटों से लेकर उत्पाद खिलाड़ियों के साथ POCs तक, हम डिजिटल के औद्योगीकरण को आगे बढ़ा रहे हैं।"
 
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