"यदुवंश" के अवतरणों में अंतर

1,729 बैट्स् नीकाले गए ,  1 वर्ष पहले
छो
जब कोई बात पता ना हो तो ना लिखें।
छो (झुठी बात है ये स्वयम की वेब साइट बनाके तो कोई भी चीटेशन दे सकता है।)
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन यथादृश्य संपादिका
छो (जब कोई बात पता ना हो तो ना लिखें।)
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन यथादृश्य संपादिका
यदु ऋग्वेद में वर्णित पाँच भारतीय आर्य जनों (पंचजन, पंचक्षत्रिय या पंचमानुष) में से एक है।<ref>{{cite book|last=Singh|first=Upinder|authorlink=Upinder Singh|title=A History of Ancient and Early Medieval India: From the Stone Age to the 12th Century|url=http://books.google.com/?id=GW5Gx0HSXKUC&pg=PA187|year=2008|publisher=Pearson Education|location=Delhi|isbn=978-8-13171-120-0|page=187}}</ref>
 
हिन्दू महाकाव्य महाभारत, हरिवंश व पुराण में यदु को राजा ययाति व रानी देवयानी का पुत्र बताया गया है। राजकुमार यदु एक स्वाभिमानी व सुसंस्थापित शासक थे। विष्णु पुराण, भगवत पुराण व गरुण पुराण के अनुसार यदु के चार पुत्र थे, जबकि बाकी के पुराणो के अनुसार उनके पाँच पुत्र थे।<ref name="gbook2">{{cite book | url=http://books.google.co.in/books?id=Jmnm-smZm6oC&pg=PA10 | title=Cultural History from the Vāyu Purāna Issue 2 of Deccan College dissertation series, Poona Deccan College Post-graduate and Research Institute (India) |publisher=Motilal Banarsidass Publisher | date=1946 | accessdate=23 September 2014 |first=Devendrakumar Rajaram |last=Patil |page=10}}</ref> बुध व ययाति के मध्य के सभी राजाओं को सोमवंशी या चंद्रवंशी कहा गया है। महाभारत व विष्णु पुराण के अनुसार यदु ने पिता ययाति को अपनी युवावस्था प्रदान करना स्वीकार नहीं किया था जिसके कारण ययाति ने यदु के किसी भी वंशज को अपने वंश व साम्राज्य मे शामिल न हो पाने का श्राप दिया था।<ref>{{cite book |first=Romila |last=Thapar |authorlink=Romila Thapar |year=1996 |origyear=1978 |edition=Reprinted |title=Ancient Indian Social History: Some Interpretations |publisher=Orient Longman |isbn=81-250-0808-X |pages=268–269}}</ref> इस कारण से यदु के वंशज सोमवंश से प्रथक हो गए व मात्र राजा पुरू के वंशज ही कालांतर में सोमवंशी कहे गए। इसके बाद महाराज यदु ने यह घोषणा की कि उनके वंशज भविष्य में यादव या यदुवंशी कहलएंगे।<ref name="एचएसबी">{{पुस्तक सन्दर्भ|last1=भाटी|first1=हरी सिंह|title=भटनेर का इतिहास|date=2000|publisher=कवि प्रकाशन|url=https://books.google.co.in/books?id=QDhuAAAAMAAJ&q=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B5+%E0%A4%AF%E0%A4%BE+%E0%A4%AF%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%B6%E0%A5%80&dq=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B5+%E0%A4%AF%E0%A4%BE+%E0%A4%AF%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%B6%E0%A5%80&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwiasJra5rTNAhUMvo8KHQk4Ag4Q6AEIRzAH|accessdate=19 जून 2016}}</ref> यदु के वंशजों ने अभूतपूर्व उन्नति की परंतु बाद मे वे दो भागों मे विभाजित हो गए।
 
==उत्पत्ति==
184

सम्पादन