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न्यायी"
" नाई " शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के 'नाय' से मानी गयी है, जिसका हिन्दी अर्थ है- नेतृत्व करने वाला अर्थात् वह जो समाज का नेतृत्व करे या न्यायी - न्याय करे ।
"नाई"<ref>{{Cite web|url=Naicastehistory.blogspot.com|title=Nai caste history|last=History|first=Naicaste|date=|website=Blogspot|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref> जाति क्षत्रीय इक्षवाकु और खींचने ही इतीहास कारोके अनुसार यदुवंशी कुल की जाति के रूप में जानी जाती है।
इस जाति के अनेक महान सम्राट, राजा, मंत्री, योद्धा, वीर रक्षक, अंगरक्षक, प्रसिद्ध वैध्य, पंडित (विद्वान), ऋषि, सन्त,योगी, आचार्य आदि श्रेष्ठ व्यक्तित्व रहे हैं।
महापदम नन्द-नाई ( न्यायी ) और उनकी शिशु नागवशी क्षत्रिय-पत्नी की सताने ''नन्द'' वही महापदम नन्द-नाई ( न्यायी ) और उनकी मुरा-पत्नी की सतान ''मौर्य' के रूप मे जाने गये.
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