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यह एक विवादित भूमि है जिसका हाइकोर्ट में केस चल रहा है एवं हिन्दू समाज इससे मंदिर बोलता है और मुस्लिम इसे मस्जिद । यहां शुक्रवार को नमाज़ एवं मंगलवार को पूजा की जाती है । इस लिए इससे पूर्ण रूप से मंदिर बोलना गलत है।
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(यह एक विवादित भूमि है जिसका हाइकोर्ट में केस चल रहा है एवं हिन्दू समाज इससे मंदिर बोलता है और मुस्लिम इसे मस्जिद । यहां शुक्रवार को नमाज़ एवं मंगलवार को पूजा की जाती है । इस लिए इससे पूर्ण रूप से मंदिर बोलना गलत है।)
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नगर के उत्तर में स्थित यह किला एक छोटी पहाड़ी पर बना हुआ है। लाल बलुआ पत्थर से बना यह विशाल किला समृद्ध इतिहास के आइने का झरोखा है, जो अनेक उतार-चढ़ावों को देख चुका है। 14वीं शताब्दी के (1344 ) आसपास सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने यह किला बनवाया था। 1857 के विद्रोह दौरान इस किले का महत्व बढ़ गया था। क्रांतिकारियों ने विद्रोह के दौरान इस किले पर अधिकार कर लिया था। बाद में ब्रिटिश सेना ने किले पर पुन: अधिकार कर लिया और यहां के लोगों पर अनेक प्रकार के अत्याचार किए। हिन्दु, मुस्लिम और अफगान शैली में बना यह किला पर्यटकों को लुभाने में सफल होता है।धार के किले में खरबूजा महल है जहां पर पेशवा बाजीराव द्वितीय का जन्म हुआ था ।किले के पास बंदी छोड़ बाबा की दरगाह है ऐसी मान्यता है कि यहां पर मनौती लेने से कोर्ट कचहरी से मुक्ति मिलती है।
 
=== भोशालामंदि ===
=== भोजशाला मंदिर ===
{{मुख्य|भोजशाला}}
भोशालामूरूसेहैंजिसे[[राजा भोज|राजा भो]]<nowiki/>ने
[[चित्र:Goddess वाघदेवी माॅ सरस्वती from Dhar.JPG|right|thumb|200px|धार से ब्रिटिश संग्रहालय ले जायी गयी '''सरस्वती''' की मूर्ति|कड़ी=Special:FilePath/Goddess_वाघदेवी_माॅ_सरस्वती_from_Dhar.JPG]]
भोजशाला मूल रूप से एक [[मंदिर]] हैं जिसे [[राजा भोज]] ने बनवाया था। लेकिन जब [[अलाउद्दीन खिलजी]] दिल्ली का सुल्तान बना तो यह क्षेत्र उसके साम्राज्य में मिल गया। उसने इस मंदिर को मस्जिद में तब्दील करवा दिया। भोजशाला मंदिर में संस्कृत में अनेक अभिलेख खुदे हुए हैं जो इसके इसके मंदिर होने की पुष्टि करते हैं।
 
 
=== अमझेरा ===
ाय
धार से लगभग 40 किलोमीटर दूर सरदारपुर तहसील में अमझेरा गांव स्थित है। इस गांव में शैव और वैष्णव संप्रदाय के अनेक प्राचीन मंदिर बने हुए हैं। यहां के अधिकांश शैव मंदिर महादेव, चामुंडा, अंबिका को समर्पित हैं। लक्ष्मीनारायण और चतुभरुजंता मंदिर वैष्णव संप्रदाय के लोकप्रिय मंदिर हैं। गांव के निकट ही ब्रह्म कुंड और सूर्य कुंड नामक दो टैंक हैं। गांव के पास ही राजपूत सरदारों को समर्पित तीन स्मारक बने हुए हैं। जोधपुर के राजा राम सिंह राठौर ने 18-19वीं शताब्दी के बीच यहां एक किला भी बनवाया था। किले में इस काल के तीन शानदार महल भी बने हुए हैं। किले के रंगमहल में बनें भिति‍चित्रों से दरबारी जीवन की झलक देखने को मिलती है। कहा जाता है कि यहीं [[श्रीकृष्ण]] ने [[रुक्मिणी]] का हरण किया था। यहाँ पूर्व-उत्तर में अमका-झमका का मन्दिर है जहाँ रुक्मिणी प्रतिदिन पूजन के लिए जाती थी।
 
 
अलाउद्दीखिजीदि्लीसु्तानाषेत्रकसाज्यमेंमनेंदिकोस्जिेंबदीदियालिमेंस्ृमेंनिलेदेहुोककेमंहोनेकीपष्टितहैं
 
=== अमझा ===
धार से लगभग 40 किलोमीटर दूरकिोमर सरदारपुरदर तहसीलसरदारपुरतहसील मेंें अमझेराअमझ गांवगंव स्थित है। इस गांव में शैव और वैष्णव संप्रदाय के अनेक प्राचीन मंदिर बने हुए हैं। यहां के अधिकांश शैव मंदिर महादेव, चामुंडा, अंबिका को समर्पित हैं। लक्ष्मीनारायण और चतुभरुजंता मंदिर वैष्णव संप्रदाय के लोकप्रिय मंदिर हैं। गांव के निकट ही ब्रह्म कुंड और सूर्य कुंड नामक दो टैंक हैं। गांव के पास ही राजपूत सरदारों को समर्पित तीन स्मारक बने हुए हैं। जोधपुर के राजा राम सिंह राठौर ने 18-19वीं शताब्दी के बीच यहां एक किला भी बनवाया था। किले में इस काल के तीन शानदार महल भी बने हुए हैं। किले के रंगमहल में बनें भिति‍चित्रों से दरबारी जीवन की झलक देखने को मिलती है। कहा जाता है कि यहीं [[श्रीकृष्ण]] ने [[रुक्मिणी]] का हरण किया था। यहाँ पूर्व-उत्तर में अमका-झमका का मन्दिर है जहाँ रुक्मिणी प्रतिदिन पूजन के लिए जाती थी।
कानवन धार से 35 कीमी दूर कण्व ऋषि की पावन भूमी कानवन लेबड़ नयागांव 4 लेन पर है यहाँ का माँ कालिका का मन्दिर नागेश्वर महादेव का मन्दिर नीलकंठेश्वर मन्दिर माँ संतोषी का मन्दिर चामुंडा का मन्दिर गांगी नदी व गांग माता का मन्दिर प्रशिद्ध
 
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