"भारतीय जनसंघ" के अवतरणों में अंतर

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('भारतीय जनसंघ' के संस्थापक प्रो.बलराज मधोक ने देश में प्रखर राष्ट्रवादी और हिन्दुत्ववादी राजनीति की नींव रखी। भारतीय जनसंघ के साथ ही उन्होंने 1951 में आरएसएस की स्टूडेंट ब्रांच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की स्थापना की। इसके साथ ही उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ और इस दौरान लंबे समय तक लखनऊ उनकी राजनीतिक कर्मभूमि रहा। जनसंघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने लखनऊ में पहली राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक रखी। उसके बाद जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी से अलग होकर उन्होंने 1989 में यहीं से चुनाव भी लड़)
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[[चित्र:Oil lamp drawing.png|right|thumb|250px|'''दीपक''' या '''दीया''' - भारतीय जनसंघ का चुनावचिह्न था।]]
[[चित्र:Syama Prasad Mookerjee.jpg|right|thumb|350px|भारतीय जनसंघ के संस्थापक '''डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी]]
'''अखिल भारतीय जनसंघ''' [[भारत]] का एक पुराना राजनैतिक दल है जिससे १९८० में [[भारतीय जनता पार्टी]] बनी। इस दल का आरम्भ [[श्यामा प्रसाद मुखर्जी]] द्वारा [[21 अक्टूबर]] [[1951]] को [[दिल्ली]] में की गयी थी। इस पार्टी का चुनाव चिह्न [[दीपक]] था। इसने [[भारतीय आम चुनाव, १९५१-१९५२|1952 के संसदीय चुनाव]] में सीटें प्राप्त की थी जिसमे डाक्टर मुखर्जी स्वयं भी शामिल थे।
 
प्रधानमंत्री [[इंदिरा गांधी]] द्वारा लागू [[आपातकाल]] (1975-1976) के बाद जनसंघ सहित [[भारत]] के प्रमुख राजनैतिक दलों का विलय कर के एक नए दल [[जनता पार्टी]] का गठन किया गया। आपातकाल से पहले बिहार विधानसभा के भारतीय जनसंघ के विधायक दल के नेता [[लालमुनि चौबे]] ने [[जयप्रकाश नारायण]] के आंदोलन में बिहार विधानसभा से अपना त्यागपत्र दे दिया। जनता पार्टी 1980 में टूट गयी और जनसंघ की विचारधारा के नेताओं नें [[भारतीय जनता पार्टी]] का गठन किया। इसके पश्चात प्रोफेसर बलराज मधोक ने भारतीय जनसंघ का नाम अखिल भारतीय जनसंघ करके चुनाव आयोग में रजिस्टर कराया और भारतीय राजनीति में अखिल भारतीय जनसंघ के नाम से संसदीय चुनाव प्रणाली में भाग लिया।