"तिलका मांझी अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र" के अवतरणों में अंतर

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यह जमशेदपुर से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक परित्यक्त विश्व युद्ध II हवाई क्षेत्र की साइट पर बनाया जाएगा।<ref name="TP1">{{cite news|title=GOVT ZEROED IN ON DHALBHUMGARH FOR NEW JAMSHEDPUR AIRPORT |url=http://www.dailypioneer.com/state-editions/govt-zeroed-in-on-dhalbhumgarh-for-new-jamshedpur-airport.html |work=[[The Pioneer (newspaper)|The Pioneer]] |date= 4 June 2017 |accessdate=12 January 2018}}</ref> परियोजना को शुरू में दिसंबर 2020 तक पूरा होने की उम्मीद थी।<ref name="BS1">{{cite news|title=Ground breaking ceremony of Dhalbhumgarh airport by the end of January |url=https://www.business-standard.com/article/pti-stories/ground-breaking-ceremony-of-dhalbhumgarh-airport-by-the-end-of-119011001291_1.html |work=[[Business Standard]] |date= 10 January 2019 |access-date= 21 January 2019}}</ref>हालांकि, देरी के कारण 2022 तक हवाई अड्डे के खुलने की उम्मीद है।<ref name="TOI1">{{cite news|title=Jamshedpur: Dhalbhumgarh airport work to begin this month |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/jamshedpur/jamshedpur-dhalbhumgarh-airport-work-to-begin-this-month/articleshow/71390616.cms |work=[[Times of India]] |date= 1 October 2019 |access-date= 5 October 2019}}</ref>
 
==इतिहास==
पुराने हवाई क्षेत्र को 1942 के आसपास बनाया गया था, आसपास के अन्य हवाई क्षेत्रों के लिए सहायक रनवे के रूप में जो युद्ध के प्रयास के तहत भारत के पूर्वी सीमांत के आसपास बनाया जा रहा था। यह मित्र देशों की सेना द्वारा जापानी सैनिकों को आगे बढ़ाने और चीन के साथ परिवहन संपर्क बनाए रखने के लिए उपयोग किए जाने वाले हवाई क्षेत्रों में से एक था। जैसे ही जापानी सेनाएं चीन सागर में शिपिंग को नियंत्रित करने के लिए आईं, चीन के लिए समुद्री आपूर्ति मार्गों में कटौती कर दी गई और कठिन, हिमालय पर 500 किमी का मार्ग तेजी से इस्तेमाल किया गया।<ref>{{cite news|title=Real steel: Jamshedpur’s little-known war history |url=https://www.cntraveller.in/story/real-steel-Jamshedpur-s-little-known-war-history/ |work=[[Condé Nast Traveller]] |date= 28 May 2015 |accessdate=12 January 2018}}</ref>युद्ध के बाद हवाई क्षेत्र को छोड़ दिया गया था।
 
जून 2017 में, AAI की तकनीकी टीम ने जमशेदपुर के लिए एक हवाई अड्डे के लिए उपयुक्त स्थान के लिए क्षेत्र को छान मारा और चाकुलिया और धालभूमगढ़ का दौरा किया। सभी कारकों पर विचार करने के बाद, टीम ने एयरपोर्ट के लिए धालभूमगढ़ साइट को चुना।<ref name="IB1">{{cite news|title= Jamshedpur to Get Its Domestic Airport Soon at Dhalbhumgarh |url=https://www.infrabuddy.com/jamshedpur-get-domestic-airport-soon-dhalbhumgarh/|work=Infrabuddy.com |date= 5 June 2017 |access-date= 21 January 2019}}</ref>एयरपोर्ट के लिए 3 किलोमीटर का रनवे होना था। एएआई ने रुपये का निवेश करने की योजना बनाई थी। नए हवाई अड्डे और राज्य के लिए 300 करोड़ रुपये परियोजना के लिए 300 एकड़ भूमि प्रदान करना था।<ref name="TP1"/>
 
2017 में, रक्षा मंत्रालय ने सरकार द्वारा स्वामित्व वाली हवाई अड्डे की परियोजना भूमि के आधे से अधिक पर अपना दावा ठोक दिया था। हालांकि, सितंबर 2018 में, रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2018 में प्रस्तावित हवाई अड्डे के निर्माण के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय को मंजूरी दे दी।<ref name="TP3">{{cite news|title= Domestic airport at Dhalbhumgarh receives a shot in the arm |url=https://www.dailypioneer.com/2018/state-editions/domestic-airport-at-dhalbhumgarh-receives-a-shot-in-the-arm.html |work=[[The Pioneer (newspaper)|The Pioneer]] |date= 5 September 2018 |access-date= 21 January 2019}}</ref>
 
झारखंड के मुख्यमंत्री, [[रघुवर दास]] ने 24 जनवरी, 2019 को हवाईअड्डा परियोजना के ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह का प्रदर्शन किया और सरकार ने उसी दिन एएआई के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।<ref name="TP4"/>एमओयू के तहत, हवाई अड्डे के निर्माण के लिए एक संयुक्त उद्यम कंपनी की स्थापना की जाएगी जिसमें एएआई की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी जबकि राज्य सरकार शेष होगी।<ref name="TOI2">{{cite news|title=State to form JV with AAI for Dhalbhumgarh airport |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/ranchi/state-to-form-jv-with-aai-for-dhalbhumgarh-airport/articleshow/67578884.cms |work=[[The Times of India]] |date= 18 January 2019 |access-date= 21 January 2019}}</ref> ज्ञापन के अनुसार, एएआई रुपये का निवेश करेगा। हवाई अड्डे के निर्माण के लिए 100 करोड़ जबकि राज्य परियोजना के लिए आवश्यक 240 एकड़ भूमि प्रदान करेगा। हवाई अड्डे को पहले चरण में एटीआर -72 प्रकार के विमानों को संचालित करने के लिए डिज़ाइन किया जाएगा। बाद में चरणों में बड़े विमानों को संचालित करने के लिए रनवे की लंबाई बढ़ाने के लिए अतिरिक्त 545 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।<ref name="HT1"/>
परियोजना स्थल 240 एकड़ में फैला है और हवाई अड्डे की लागत {INR} 100 करोड़ होगी। 15,000 वर्ग फुट वाले टर्मिनल भवन में छह चेक-इन काउंटर होंगे, 150 यात्रियों को संभालने में सक्षम होंगे। प्रस्तावित रनवे 2,179-मीटर लंबा और 30-मीटर चौड़ा होगा और दूसरे चरण में इसे 4,400 मीटर तक विस्तारित किया जाएगा।<ref name="TOI1"/>
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