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समर्थक थे। कश्मीर आंदोलन के विरोध के बावजूद १९५२ में पहले लोकसभा चुनावों में जनसंघ को लोकसभा में तीन सीटें प्राप्त हुई। वो १९६७ तक संसद में अल्पमत में रहे। इस समय तक पार्टी कार्यसूची के मुख्य विषय सभी भारतीयों के लिए समान नागरिकता कानून, गोहत्या पर प्रतिबंध लगाना और जम्मू एवं कश्मीर के लिए दिया विशेष दर्जा खत्म करना थे।[5][6][7] १९६७ में देशभर के विधानसभा चुनावों में पार्टी, स्वतंत्र पार्टी और समाजवादियों सहित अन्य पार्टियों के साथ मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न हिन्दी भाषी राज
(जिससे १९८० में भारतीय जनता पार्टी बनी)
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(समर्थक थे। कश्मीर आंदोलन के विरोध के बावजूद १९५२ में पहले लोकसभा चुनावों में जनसंघ को लोकसभा में तीन सीटें प्राप्त हुई। वो १९६७ तक संसद में अल्पमत में रहे। इस समय तक पार्टी कार्यसूची के मुख्य विषय सभी भारतीयों के लिए समान नागरिकता कानून, गोहत्या पर प्रतिबंध लगाना और जम्मू एवं कश्मीर के लिए दिया विशेष दर्जा खत्म करना थे।[5][6][7] १९६७ में देशभर के विधानसभा चुनावों में पार्टी, स्वतंत्र पार्टी और समाजवादियों सहित अन्य पार्टियों के साथ मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न हिन्दी भाषी राज)
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'''अखिल भारतीय जनसंघ मूल [[श्यामाप्रसाद मुखर्जी]] द्वारा १९५१(1951) में निर्मित [[भारतीय जनसंघ]] है।'''
 
'''अखिल भारतीय जनसंघ''' [[भारत]] का एक पुराना राजनैतिक दल है । इस दल का आरम्भ [[श्यामा प्रसाद मुखर्जी]] द्वारा [[21 अक्टूबर]] [[1951]] को [[दिल्ली]] में की गयी थी। इस पार्टी का चुनाव चिह्न [[दीपक]] था। इसने [[भारतीय आम चुनाव, १९५१-१९५२|1952 के संसदीय चुनाव]] में ३ सीटें प्राप्त की थी जिसमे डाक्टर मुखर्जी स्वयं भी शामिल थे। कश्मीर आंदोलन के विरोध के बावजूद १९५२ में पहले लोकसभा चुनावों में जनसंघ को [[लोकसभा]] में तीन सीटें प्राप्त हुई। वो १९६७ तक संसद में अल्पमत में रहे। इस समय तक पार्टी कार्यसूची के मुख्य विषय सभी भारतीयों के लिए [[समान नागरिकता कानून]], गोहत्या पर प्रतिबंध लगाना और जम्मू एवं कश्मीर के लिए दिया विशेष दर्जा खत्म करना थे।
 
१९६७ में देशभर के विधानसभा चुनावों में पार्टी, स्वतंत्र पार्टी और समाजवादियों सहित अन्य पार्टियों के साथ [[मध्य प्रदेश]], [[बिहार]] और [[उत्तर प्रदेश]] सहित विभिन्न हिन्दी भाषी राज्यों में गठबंधन सरकार बनाने में सफल रही। इससे बाद जनसंघ ने पहली बार राजनीतिक कार्यालय चिह्नित किया, यद्यपि यह गठबंधन में था। राजनीतिक गठबंधन के गुणधर्मों के कारण संघ के अधिक कट्टरपंथी कार्यसूची को ठण्डे बस्ते में डालना पड़ा।
 
=== जनता पार्टी (१९७७-८०)संपादित करें ===
मुख्य लेख: [[जनता पार्टी]]
 
१९७५ में प्रधानमन्त्री [[इंदिरा गांधी]] ने देश में [[आपातकाल (भारत)|आपातकाल]] लागू कर दिया। जनसंघ ने इसके विरूद्ध व्यापक विरोध आरम्भ कर दिया जिससे देशभर में इसके हज़ारों कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया। १९७७ में आपातकाल ख़त्म हुआ और इसके बाद आम चुनाव हुये। इस चुनाव में जनसंघ का [[भारतीय लोक दल]], [[कांग्रेस (ओ)]] और [[समाजवादी पार्टी (भारत)|समाजवादी पार्टी]] के साथ विलय करके जनता पार्टी का निर्माण किया गया और इसका प्रमुख उद्देश्य चुनावों में इंदिरा गांधी को हराना था।
 
१९७७ के आम चुनाव में जनता पार्टी को विशाल सफलता मिली और [[मोरारजी देसाई]] के नेतृत्व में सरकार बनी। उपाध्याय के 1979 में निधन के बाद जनसंघ के अध्यक्ष अटल बिहारी बाजपेयी बने थे अतः उन्हें इस सरकार में [[विदेश मंत्रालय]] कार्यभार मिला। हालाँकि, विभिन्न दलों में शक्ति साझा करने को लेकर विवाद बढ़ने लगे और ढ़ाई वर्ष बाद देसाई को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा। गठबंधन के एक कार्यकाल के बाद १९८० में आम चुनाव करवाये गये।
 
(१९८० से अबतक)संपादित करें
 
==== अखिल भारतीयजनसंघ की स्थापना और आरम्भिक कालसंपादित करें ====
अखिल भारतीय जनसंघ पार्टी 1980 में जनता पार्टी के विघटन के बाद नवनिर्मित पार्टियों में से एक थी। यद्यपि तकनीकी रूप से यह जनसंघ का ही दूसरा रूप है , इसके अधिकतर कार्यकर्ता इसके पूर्ववर्ती थे और प्रो.बलराज मधोक को इसका प्रथम अध्यक्ष बनाया गया।
 
प्रधानमंत्री [[इंदिरा गांधी]] द्वारा लागू [[आपातकाल]] (1975-1976) के बाद जनसंघ सहित [[भारत]] के प्रमुख राजनैतिक दलों का विलय कर के एक नए दल [[जनता पार्टी]] का गठन किया गया। आपातकाल से पहले बिहार विधानसभा के भारतीय जनसंघ के विधायक दल के नेता [[लालमुनि चौबे]] ने [[जयप्रकाश नारायण]] के आंदोलन में बिहार विधानसभा से अपना त्यागपत्र दे दिया। जनता पार्टी 1980 में टूट गयी और जनसंघ की विचारधारा के नेताओं नें [[भारतीय जनता पार्टी]] का गठन किया। इसके पश्चात प्रोफेसर बलराज मधोक ने भारतीय जनसंघ का नाम अखिल भारतीय जनसंघ करके चुनाव आयोग में रजिस्टर कराया और भारतीय राजनीति में अखिल भारतीय जनसंघ के नाम से संसदीय चुनाव प्रणाली में भाग लिया।