"सम्पूर्ण क्रांति" के अवतरणों में अंतर

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बिहार छात्र आन्दोलन का चौथा चरण सात जून, 1974 से जयप्रकाश नारायण के इस आह्वान के अनुसार प्रारम्भ हुआ कि ‘हमें सम्पूर्ण क्रान्ति चाहिए, इससे कम नहीं।’ ‘विधान सभा भंग करो।’ के स्थान पर ‘विधान सभा भंग करेंगे’ के नारे के साथ अहिंसक एवं शान्तिपूर्ण ढंग से सत्याग्रह, ध्रना आदि का कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया। जे.पी. द्वारा निर्देशित आन्दोलन का कार्यक्रम निम्न प्रकार था:-
1. विधान सभा भंग करने का अभियान चलाना<br />
2. विधान सभा के सभी फाटकों पर सत्याग्रह और ध्रनाधरना आयोजित कर सदस्यों को अन्दर न जाने देना।<br />
3. सचिवालय से लेकर ब्लाक स्तर तक प्रशासनिक कामकाज एकदम ठप्प कर देना।<br />
4. अपनी मांगों की पूर्ति के लिए प्रदर्शन, सत्याग्रह कर जेल जाना।
 
; छात्र संघर्ष समिति द्वारा विधायकों के इस्तीफे की मांग
छात्र संघर्ष समिति ने विधान सभा के समक्ष ध्रनाधरना प्रारम्भ करने के पूर्व सभी दलों के विधायकों से त्याग पत्र देने की मांग की और घोषित किया कि बिहार विधान सभा को भंग करने की मांग को लेकर ध्रनेधरने का कार्यक्रम एक सप्ताह तक चलेगा। यदि तब तक विधायकों ने इस्तीफे नहीं दिये तो 12 जून से उनके घरों का घेराव किया जाएगा।
 
बिहार में आन्दोलन नए चरण में पहुंच गया। सम्पूर्ण प्रदेश की जनता संघर्ष करने की मन:स्थिति में आती जा रही थी। वहीं इस आन्दोलन में छात्रेंछात्रों के समर्थक गैर-कम्युनिस्ट विपक्षी दलों में वैचारिक, रणनीति संबंधी एवं संगठनात्मक संकट गंभीर हो गया। हुआ यह कि इन दलों के अनेक विधायकों ने पांच जून की अंतिम तिथि बीत जाने के बावजूद अपनी पार्टी के नेतृत्व द्वारा दिए गए निर्देश के बावजूद विधान सभा की सदस्यता से त्याग पत्र नहीं दिया।
 
विधान सभा के 24 सदस्यीय जनसंघ गुट के विधायकों में लालमुनि चौबे ने अगुवाई की और उनके सहित 12 विधायकों ने विधान सभा की सदस्यता से त्याग पत्र दिया, पर आठ जनसंघी विधायकों ने पार्टी के निर्देश को ठुकरा दिया। जनसंघ ने इन आठ विधायकों तथा तीन अन्य को पार्टी से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया। शेष एक विधायक ने उसी दिन त्याग पत्र दे दिया। तेरह सदस्यीय संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के 7 विधायकों ने इस्तीफा दिया, अन्य ने नहीं। विधान सभा अधायक्षअध्यक्ष हरिनाथ मिश्र के अनुसार उस समय तक केवल 19 विधायकों ने इस्तीफे दिए थे, जिन्हें वे स्वीकार कर चुके थे। संगठन कांग्रेस ने निर्णय किया कि उसके विधायकों के इस्तीफे का प्रश्न 15 व 16 जून को कलकत्ता में हो रही कांग्रेस संगठन ‘महासमिति’ की बैठक तक स्थगित रहेगा तथा इस मामले पर हाई कमान से विचार किया जाएगा। इस प्रकार कांग्रेस के 23 विधायकों में से किसी ने इस्तीफा नहीं दिया।
 
;विधान सभा के सामने सत्याग्रह, 53 सत्याग्रही गिरफ्तार
सात जून को पटना में बिहार विधान सभा के समक्ष छात्र संघर्ष समिति, सर्वोदय मण्डल तथा गैर-कम्युनिस्ट विपक्षी दलों की ओर से ध्रनाधरना दिया गया। ध्रनेधरने के दौरान विधायकों को विधान सभा में जाने से रोकने पर 53 सत्याग्रही गिरफ्तार किए गए, जिनमें सर्वोदय नेता रामनन्दन सिंह, जन संघ के नेता विजयकुमार मिश्र तथा छात्र नेता विद्यानन्द तिवारी शामिल थे।
 
इसी दिन बिहार छात्र संघर्ष समिति की संचालन समिति ने छात्रें का आह्वान किया कि वे एक वर्ष तक अपनी कक्षाओं का बहिष्कार करें और श्री जयप्रकाश नारायण के आन्दोलन में शामिल हों। राज्य के विभिन्न जिलों के छात्रेंछात्रों द्वारा जिलाधीश कार्यालयों, अन्य सरकारी दफ्तरों से लेकर ब्लाक मुख्यालयों पर ध्रनाधरना-प्रदर्शन आदि करने का कार्यक्रम क्रियान्वित किया गया।
 
बिहार सरकार के मंत्री दरोगा प्रसाद राय ने घोषणा की कि विधायकों के निवास स्थान को ‘सुरक्षित क्षेत्र’ घोषित कर वहां पुलिस का पहरा रहेगा। अनाधिकृत व्यक्तियों के जाने पर रोक लगाई जाएगी और मिलने वालों की पूरी जांच की जाएगी।
बेनामी उपयोगकर्ता