"सस्य आवर्तन": अवतरणों में अंतर

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[[चित्र:Plodozmian.jpg|right|thumb|300px|एक प्रायोगिक खेत पर सस्य आवर्तन का प्रभाव : बायें खेत में [[आलू]]-[[जई]]-[[नीवारिका]]-[[मटर]] सस्यचक्र अपनाकर खेती की जा रही है; दायें खेत में पिछले ४५ वर्षों से केवल [[नीवारिका]] ही उगायी जा रही है।]]
विभिन्न फसलों को किसी निश्चित क्षेत्र पर, एक निश्चित क्रम से, किसी निश्चित समय में बोने को [https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 '''सस्य आवर्तन''' ('''सस्यचक्र''' या '''फ़सल चक्र''' (क्रॉप रोटेशन))] कहते हैं। इसका उद्देश्य पौधों के भोज्य तत्वों का सदुपयोग तथा भूमि की भौतिक, रासायनिक तथा जैविक दशाओं में संतुलन स्थापित करना है।
 
== परिचय ==
सभ्यता के प्रारम्भ से ही किसी खेत में एक निश्चित फसल न उगाकर [https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसलों को अदल-बदल कर उगाने] की परम्परा चली आ रही है। फसल उत्पादन की इसी परंपरा को [https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसल चक्र] कहते हैं अर्थात् किसी निश्चित क्षेत्र पर निश्चित अवधि के लिए भूमि की उर्वरता को बनाये रखने के उद्देश्य से [https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसलों को अदल-बदल कर उगाने की क्रिया को फसल चक्र कहते हैं]।हैं। अथवा, किसी निश्चित क्षेत्रा में एक नियत अवधि में फसलों को इस क्रम में उगाया जाना कि उर्वरा शक्ति का कम से कम हृस हो [https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसल चक्र] कहलाता है।
 
आदिकाल से ही मानव अपने भरण पोषण हेतु अनेक प्रकार की फसले उगाता चला आ रहा है। फसलें मौसम के अनुसार भिन्न-भिन्न होती है। अधिक मूल्यवान फसलों के साथ चुने गये [https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसल चक्रों] में मुख्य दलहनी फसलें, [[चना]], [[मटर]], [[मसूर]], [[अरहर]], [[उर्द]], [[मूँग]], [[लोबिया]], [[राजमा]], आदि का समावेश जरूरी है।
 
==[https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 एक ही फसल या एक ही तरह की फसल उगाने से हानि] ==
किसी खेत में लगातार एक ही फसल उगाने के कारण कम उपज प्राप्त होती है तथा भूमि की उर्वरता खराब होती है। [[भारत]] के अनेक भागों में प्रचलित सबसे लोकप्रिय फसल उत्पादक प्रणाली '''धान-गेहूँ''', मृदा-उर्वरता के टिकाऊपन के खतरे का स्पष्ट आभास कराती प्रतीत हो रही है। इसके कारण उपजाऊ भूमि का क्षरण, जीवांश की माता में कमी, भूमि से लाभदायक सूक्ष्म जीवों की कमी, मित्र जीवों की संख्या में कमी, हानिकारक कीट पतंगों का बढ़ाव, खरपतवार की समस्या में बढ़ोत्तरी, जलधारण क्षमता में कमी, भूमि के भौतिक, रासायनिक गुणों में परिवर्तन, क्षारीयता में बढ़ोत्तरी, भूमिगत जल का प्रदूषण, कीटनाशीयों का अधिक प्रयोग तथा नाशीजीवों में उनके प्रति प्रतिरोधक क्षमता का विकास आदि हानियाँ होतीं हैं।
 
आज न तो केवल उत्पाद वृद्धि रूक गयी है बल्कि एक निश्चित मात्रा में उत्पादन प्राप्त करने के लिए पहले की अपेक्षा न बहुत अधिक मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करना पड़ रहा है क्योंकि भूमि में उर्वरक क्षमता उपयोग का हृस बढ़ गया है। इन सब विनाशकारी अनुभवों से बचने के लिए हमें [https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसल चक्र], फसल सघनता, के सिद्धान्तों को दृष्टिगत रखते हुए [https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसल चक्र] में दलहनी फसलों का समावेश जरूरी हो गया है क्योंकि दलहनी फसलों से एक टिकाऊ फसल उत्पादन प्रक्रिया विकसित होती है।
 
== लाभ ==
[https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसल चक्र] से मृदा उर्वरता बढ़ती है, भूमि में कार्बन-नाइट्रोजन के अनुपात में वृद्धि होती है। भूमि के पी.एच. तथा क्षारीयता में सुधार होता है। भूमि की संरचना में सुधार होता है। मृदा क्षरण की रोकथाम होती है। फसलों का बिमारियों से बचाव होता है, कीटों का नियन्त्रण होता है, खरपतवारों की रोकथाम होती है, वर्ष भर आय प्राप्त होती रहती है, भूमि में विषाक्त पदार्थ एकत्र नहीं होने पाते हैं। उर्वरक - अवशेषों का पूर्ण उपयोग हो जाता है सीमित सिंचाई सुविधा का समुचित उपयोग हो जाता है।
 
[https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 सस्यचक्र] [https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 से निम्नलिखित लाभ होते हैं:]
 
*1. '''पोषक तत्वों का समान व्यय'''- फसलों की जड़ें गहराई तथा फैलाव में विभिन्न प्रकार की होती हैं, अत: गहरी तथा उथली जड़ वाली फसलों के क्रमश: बोने से पोषक तत्वों का व्यय विभिन्न गहराइयों पर समान होता है, जैसे गेहूँ, कपास।
*15. '''अधिक उपज'''- उपर्युक्त कारणों से फसल की उपज प्राय: अधिक हो जाती है।
 
==[https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसल चक्र निर्धारण के मूल सिद्धान्त] ==
[https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसल चक्र] के निर्धारण में कुछ मूलभूत सिद्धान्तों को ध्यान में रखना जरूरी होता है जैसे-
*अधिक खाद चाहने वाली फसलों के बाद कम खाद चाहने वाली फसलों का उत्पादन,
*अधिक पानी चाहने वाली फसल के बाद कम पानी चाहने वाली फसल
*फसल का समावेश जलवायु तथा किसान की आर्थिक क्षमता के अनुरूप करना चाहिए।
 
==[https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 कुछ उपयोगी फसल चक्र] ==
उत्तर प्रदेश में कुछ प्रचलित [https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसल चक्र] इस प्रकार हैं जैसे -
 
*'''परती पर आधारित [https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसल चक्र]''' : परती-गेहूँ, परती-आलू, परती-सरसों, धान-परती
 
*'''[[हरी खाद]] पर आधारित [https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसल चक्र]''' : इसमें फसल उगाने के लिए हरी खाद का प्रयोग किया जाता है। जैसे हरी खाद - गेहूँ, हरी खाद-धान, हरी खाद-केला, हरी खाद-आलू, हरी खाद-गन्ना, आदि
 
*'''दलहनी फसलों पर आधारित [https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसल चक्र]''' : मूंग-गेहूँ, धान-चना, कपास-मटर-गेहूँ, ज्वार-चना, बाजरा-चना, मूंगफली-अरहर, मूंग-गेहूँ, धान-चना, कपास-मटर-गेहूँ, ज्वार-चना, बाजरा-चना, धान-मटर, धान-मटर-गन्ना, मूंगफली-अरहर-गन्ना, मसूर-मेंथा, मटर-मेंथा।
 
*'''अन्न की फसलों पर आधारित [https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसल चक्र]''' : मक्का-गेहूँ, धान-गेहूँ, ज्वार-गेहूँ, बाजरा-गेहूँ, गन्ना-गेहूँ, धान-गन्ना-पेड़ी, मक्का-जौ, धान-बरसीम, चना-गेहूँ, मक्का-उर्द-गेहूँ।
 
*'''सब्जी आधारित [https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसल चक्र]''' : भिण्डी-मटर, पालक-टमाटर, फूलगोभी-मूली, बन्दगोभी-मूली, बैंगन-लौकी, टिण्डा-आलू-मूली, घुईयां-शलजम-भिण्डी-गाजर, धान-आलू-टमाटर, धान-लहसुन-मिर्च, धान-आलू-लौकी इत्यादि हैं।
 
== बाहरी कड़ियाँ==
*[http://www.healthinhindi.blogspot.in/2012/05/blog-post_9020.html फसल चक्र]
*[http://www.krishisewa.com/cms/crop_system/454-fruit-based-cropping-system.html शुष्क क्षेत्रों में फल आधारित बहुफसलीय खेती प्रणाली] (कृषिसेवा)
*'''[https://agriculturestudyy.blogspot.com/2019/10/crop-rotation.html?m=1 फसल चक्र]'''
 
[[श्रेणी:फ़सलें]]
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