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Parichay
(Parichay)
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'''परिवार''' (family) साधारणतया पति, पत्नी और बच्चों के समूह को कहते हैं, किंतु दुनिया के अधिकांश भागों में वह सम्मिलित वासवाले रक्त संबंधियों का समूह है जिसमें [[विवाह]] और दत्तक प्रथा स्वीकृत व्यक्ति भी सम्मिलित हैं।
 
== परिचय एवं महत्व ==
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[[संस्कार|सभी समाजों में बच्चों का जन्म और पालन पोषण परिवार में होता है। बच्चों का संस्कार करने और समाज के आचार व्यवहार में उन्हें दीक्षित करने का काम मुख्य रूप से परिवार में होता है। इसके द्वारा समाज की सांस्कृतिक विरासत एक से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित होती है। व्यक्ति की सामाजिक मर्यादा बहुत कुछ परिवार से ही निर्धारित होती है। नर-नारी के यौन संबंध मुख्यत: परिवार के दायरे में निबद्ध होते हैं।]] औद्योगिक सभ्यता से उत्पन्न जनसंकुल समाजों और नगरों को यदि छोड़ दिया जाए तो व्यक्ति का परिचय मुख्यत: उसके परिवार और कुल के आधार पर होता है। संसार के विभिन्न प्रदेशों और विभिन्न कालों में यद्यपि रचना, आकार, संबंध और कार्य की दृष्टि से परिवार के अनेक भेद हैं किंतु उसके यह उपर्युक्त कार्य सार्वदेशिक और सार्वकालिक हैं। उसमें देश, काल, परिस्थिति और प्रथा आदि के भेद स एक या अनेक पीढ़ियों का और एक या अनेक दंपतियों अथवा पति-पत्नियों के समूहों का होना संभव है, उसके सदस्य एक पारिवारिक अनुशासन व्यवस्था के अतिरिक्त पति और पत्नी, भाई और बहन, पितामह और पौत्र, चाचा और भतीजे, सास और पुत्रवधू जैसे संबंधों तथा कर्तव्यों एवं अधिकारों से परस्पर आबद्ध, अन्य सामाजिक समूहों के संदर्भ में एक घनिष्टतम अंतरंग समूह के रूप में रहते हैं। परिवार के दायरे में स्त्री और पुरुष के बीच कार्यविभाजन भी सार्वत्रिक और सार्वकालिक है। स्त्रियों का अधिकांश समय घर में व्यतीत होता है। भोजन बनाना, बच्चों की देख रेख और घर की सफाई करना और कपड़ों की सिलाई आदि ऐसे काम हैं जो स्त्री के हिस्से में आते हैं। पुरुष बाहरी तथा अधिक श्रम के कार्य करता है, जैसे खेती, व्यापार, उद्योग, पशुचारण, शिकार और लड़ाई आदि। तब भी यह कार्यविभाजन सब समाजों में एक सा नहीं है, कोई बड़ी सामान्य सूची भी बनाना कठिन है क्योंकि कई समाजों में स्त्रियाँ भी खेती और शिकार जैसे कामों में हिस्सा लेती हैं। परिवार को सेंट जॉर्ज से विरासत में मिला है और सार्वभौमिक विवाह [[शहादत]] [[आदमी]] [[महिला]] और [[बच्चे]] और [[भगवान]] द्वारा चुनी गई [[भविष्यवाणियों]] की अवधारणा विरासत में मिली है। [[जीवन]] [[दिन]] का [[प्रकाश]] [[सूर्य]] का [[रात]] का [[चंद्रमा]] [[अंधेरा]] का [[अंधेरा]] [[मौत]] [[नींद]] और [[आत्मा]] की [[आत्महत्या]] और [[आत्मा]] [[कोमा]] [[मनुष्य|मानव]] और सभी [[जीवित प्राणी]] के रूपों [[पृथ्वी]] [[बलिदान]] जीवित और मानव प्राणियों में [[समय]] [[अंतरिक्ष]] [[समय]] पृथ्वी पर सभी बुद्धिमान जीवन के तीन तरीके और परिवार की अवधारणाएं हैं जो आज दुनिया के पैर हैं
Aajad Bishnoi।
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