"विकिपीडिया:अनुरोधित लेख": अवतरणों में अंतर

(छोटा सा सुधार किया।, तिरोहे तीन मिसरी शायरी एक बिल्कुल नयी विधा है जिसे मैंने नाम दिया है तिरोहे। इन्डियन वर्चुअल युनिवर्सिटी आफ पीस एन्ड एजूकेशन बंगलौर ने मुझे डॉ आफ हिंदी लिटरेचर की मानिद डिग्री से नवाज़ा है तिरोहे का जन्म दाता सत्येन्द्र गुप्ता नजीबाबाद का रहने वाला हूँ)
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल एप सम्पादन Android app edit
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन
* [[विकिपीडिया:अनुवाद किये जाने हेतु लेखों की सूची]]
 
[[श्रेणी:विकिपीडिया के अनुरोधित लेख|गज़ल तिरोही ]]
बिना बादल भी तो बरसात नहीं होती
मेले की मुलाक़ात मुलाक़ात नहीं होती
खुलकर दिल से दिल की बात नहीं होती
 
चुराते दिल को यार तो कोई बात होती
नज़रें चुराना यार कोई बात नहीं होती
हर रात मिलन की भी रात नहीं होती
 
मैंने देखा है अक्सर ऐसा भी कईं बार
साथ साथ रहते हैं पर बात नहीं होती
ऐसे भी तो गुज़र यार हयात नहीं होती
 
डर लगने लगता है मुझको उस घड़ी
पहरों जब उनसे मुलाक़ात नहीं होती
दिल से दिल की जब बात नहीं होती
 
मैकदे वो साक़ी वो पैमाने भी न रहे अब
अंगडाई लेती अब नशीली रात नहीं होती
बरसात में भी खुलके बरसात नहीं होती
 
आना है मौत ने तो वो आएगी एक दिन
पहले उससे कभी मुलाक़ात नहीं होती
दवा कोई भी तो आबे हयात नहीं होती
आबे हयात - जीवन अमृत
डॉ सत्येन्द्र गुप्ता ]]
9

सम्पादन