"संवत": अवतरणों में अंतर

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'''संवत्‌''', [[समय]]गणना का [[भारत|भारतीय]] मापदंड। भारतीय समाज में अनेक प्रचलित संवत्‌ हैं। मुख्य रूप से दो संवत्‌ चल रहे हैं, प्रथम [[विक्रम संवत्‌]] तथा दूसरा [[शक संवत्]]‌। भारत में [[लोधी संवत]] भी प्रचलन में आया है
 
'''विक्रम संवत्‌''' ई. पू. 57 वर्ष प्रारंभ हुआ। यह संवत्‌ [[मालवा|मालव]]गण के सामूहिक प्रयत्नों द्वारा गर्दभिल्लगंधर्वसेन के पुत्र विक्रमबिक्रमदित्य के नेतृत्व में उस समय विदेशी माने जानेवाले [[शक]] लोगोंलोगो की पराजय के स्मारक रूप में प्रचलित हुआ। जान पड़ता है, भारतीय जनता के देशप्रेम और विदेशियों के प्रति उनकी भावना सदा जागृत रखने के लिए जनता ने सदा से इसका प्रयोग किया है क्योंकि भारतीय सम्राटों ने अपने ही संवत्‌ का प्रयोग किया है। इतना निश्चित है कि यह संवत्‌ मालवगण द्वारा जनता की भावना के अनुरूप प्रचलित हुआ और तभी से जनता द्वारा ग्राह्य एवं प्रयुक्त है। इस संवत्‌ के प्रारंभिक काल में यह कृतसंवत्, तदनंतर मालवसंवत् और अंत में 'विक्रम संवत्‌' रह गया। यही अंतिम नाम इस संवत्‌ के साथ जुड़ा हुआ है। '''शक संवत्‌''' के विषय में बुदुआ का मत है कि इसे [[उज्जयिनी]] के क्षत्रप चेष्टन ने प्रचलित किया। शक राज्यों को [[चंद्रगुप्तउज्जैैयनी विक्रमादित्य]]के नेराजा समाप्तबिक्रमादित्य कर दिया पर उनका स्मारक शक संवत्‌ अभी तक भारतवर्ष में चल रहा है। शक संवत्‌ 78 ई. में प्रारंभ हुआ।
 
ने समाप्त कर दिया पर उनका स्मारक शक संवत्‌ अभी तक भारतवर्ष में चल रहा है। शक संवत्‌ 78 ई. में प्रारंभ हुआ। बिक्रमादित्य परमार वंश के प्रतापी राजा हुुए उनके पिता गंधर्वसेन थे और उनके बडै भाई भृतहरि भी महान योगी हुए आज भी उज्जैन मेे उनकी योग गुफा स्थित है
 
== विक्रम संवत् ==
गुमनाम सदस्य