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[[चित्र:Nrborderborderentrythreecolorsmay05-1-.JPG|thumb|right|250px|औद्योगिक कचरा अमेरिका की न्यू रिवर, कैलिफोर्निया में बहता हुआ]]
जल प्रदूषण एक प्रमुख वैश्विक समस्या है। इसके लिए सभी स्तरों पर चल रहे मूल्यांकन की और जल संसाधन नीति में संशोधन की आवश्यकता है क्योंकि जल प्रदूषण के कारण पूरे विश्व में कई प्रकार की बीमारियाँ और लोगों की मौत भी हो रही है।<ref name="deathyahoo">{{cite news|url=http://finance.yahoo.com/columnist/article/trenddesk/3748 |author=Pink, Daniel H. |publisher=Yahoo |title=Investing in Tomorrow's Liquid Gold |date=April 19, 2006 |deadurl=yes |archiveurl=https://web.archive.org/20060423172532/http://finance.yahoo.com:80/columnist/article/trenddesk/3748 |archivedate=April 23, 2006 }}</ref> इसके कारण लगभग प्रतिदिन 14,000 लोगों की मौत हो रही है। जिसमें 580 लोग [[भारत]] के हैं। [[चीन]] में शहरों का 90 प्रतिशत जल प्रदूषित होता है। वर्ष 2007 में एक जानकारी के अनुसार चीन में 50 लाख से अधिक लोग सुरक्षित पेय जल की पहुँच से दूर हैं। यह परेशानी सबसे अधिक विकसित देशों में होती है। उदाहरण के लिए [[अमेरिका]] में 45 प्रतिशत धारा में बहते जल, 47 प्रतिशत झील, 32 प्रतिशत खाड़ी के जल के प्रति वर्ग मील को प्रदूषित जल के श्रेणी में लिया गया है। चीन में राष्ट्रीय विकास विभाग के 2007 में दिये बयान के अनुसार चीन की सात नदी में जहरीला पानी है, जिससे त्वचा को हानि होती है।
 
[[पानी]] में मौजूद केमिकल की कुछ मात्रा अनाज में चली जाती है, वही अनाज खाकर लोग कैंसर, डायबिटीज, ह्रदयरोग जैसी समस्या का शिकार बनते है और अपनी जिंदगी से हाथ धोकर बैठते है |
 
कभी कभी प्रदूषित पानी [[जमीन]] पर ही छोड़ दिया जाता है जिससे भूमि प्रदूषण होता है और उस जमीन पर कभी भी अनाज नहीं उगता | एक तो हमारे देश में उपजाऊ जमीन कम है, इस तरह से अगर हम जमीन बर्बाद करेंगे तो एक दिन खाने वाले लोग ज्यादा होंगे और [[भोजन]] कम होगा | इस बात को हम जितना जल्दी समज़ते है उतना ही अच्छा है
 
==कारण==
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