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=== आधुनिक प्रवाह ===
वर्तमान समय में [[सहारनपुर]] जिले के [[फैजाबाद]] गाँव के निकट मैदान में आने पर यह आगे 65 मील तक बढ़ती हुई [[हरियाणा]] के [[अम्बाला]] और [[करनाल]] जिलों को [[उत्तर प्रदेश]] के [[सहारनपुर]] और [[मुजफ्फरनगर]] जिलों से अलग करती है। इस भू-भाग में इसमें मस्कर्रा, कठ, [[हिण्डन नदीहिंडन]] और सबी नामक नदियाँ मिलती हैं, जिनके कारण इसका आकार बहुत बढ़ जाता है। मैदान में आते ही इससे पूर्वी यमुना नहर और पश्चिमी नहर निकाली जाती हैं। ये दोनों नहरें यमुना से पानी लेकर इस भू-भाग की सैकड़ों मील धरती को हरा-भरा और उपज सम्पन्न बना देती हैं।
 
इस भू-भाग में यमुना की धारा के दोनों ओर [[पंजाब]] और [[उत्तर प्रदेश]] के कई छोटे बड़े नगरों की सीमाएँ हैं, किन्तु इसके ठीक तट पर बसा हुआ सबसे प्राचीन और पहला नगर दिल्ली है, जो लम्बे समय से भारत की राजधानी है। दिल्ली के लाखों की आबादी की आवश्यकता की पूर्ति करते हुए और वहाँ की ढेरों गंदगी को बहाती हुई यह ओखला नामक स्थान पर पहुँचती है। यहाँ पर इस पर एक बड़ा बांध बांधा गया है जिससे नदी की धारा पूरी तरह नियंत्रित कर ली गयी है। इसी बांध से आगरा नहर निकलती है, जो हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सैकड़ों मील भूमि को सिंचित करती है। दिल्ली से आगे यह हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा बनाती हुई तथा हरियाणा के फरीदाबाद जिले को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से अलग करती हुई उत्तर प्रदेश में प्रवाहित होने लगती है।
 
ब्रजभाषा के भक्त कवियों और विशेषतः वल्लभ सम्प्रदायी कवियों ने गिरिराज गोवर्धन की भाँति यमुना के प्रति भी अतिशय श्रद्धा व्यक्त की है। इस सम्प्रदाय का शायद ही कोई कवि हो, जिसने अपनी यमुना के प्रति अपनी काव्य - श्रद्धांजलि अर्पित न की हो। उनका यमुना स्तुति संबंधी साहित्य ब्रजभाषा भक्ति काव्य का एक उल्लेखनीय अंग है।
 
'''श्री यमुना वन्दना '''
वृजमंडल की आधार ओ यमुना महारानी ।
वृजमंडल की आधार ओ यमुना महारानी ।।
कान्हा तटपर मुरली बजाते थे।
तेरे मन को बहुत लुभाते थे।
तेरा भक्त धरें नित ध्यान ओ यमुना महारानी ।
वृजमंडल की आधार ओ यमुना महारानी ।।
तेरी महिमा वेद पुराणों में ।
साँवरिया तेरी धारों में ।
नित होते आरती गान ओ यमुना महारानी ।
वृजमंडल की आधार ओ यमुना महारानी ।।
जय यमुना मैया
 
 
 
{{गंगा}}