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रतनसिंह
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(रतनसिंह)
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प्राचीन अभिलेख आदि से इससे अधिक रत्नसिंह के संबंध में कोई विवरण उपलब्ध नहीं होता है। अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण से सम्बद्ध विवरण अमीर खुसरो के 'तारीखे अलाई' में मिलता है। अमीर खुसरो के उक्त ग्रंथ से पता चलता है कि सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी 28 जनवरी 1303 ई० (सोमवार) को चित्तौड़ लेने के लिए दिल्ली से रवाना हुआ तथा 26 अगस्त 1303 ई० (सोमवार) को किला फतह हो गया।<ref>पूर्ववत्, पृ०-181 पर उद्धृत।</ref>
 
अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के संबंध में महाकवि [[मलिक मोहम्मद जायसी|मलिक मुहम्मद जायसी]] ने अपने सुप्रसिद्ध महाकाव्य [[पद्मावत]] में लिखा है कि यह आक्रमण राजा रतनसेन की अद्वितीय सुंदरी पत्नी पद्मावती को प्राप्त करने के लिए हुआ था और अनेक वर्षों तक घेरा डालने के बाद असफल होकर खिलजी लौट गया था तथा दुबारा आक्रमण करके विजयी हुआ था। परंतु अब ऐतिहासिक तथ्य सामने आ जाने से इतिहासकार मानने लगे हैं कि आक्रमण का प्रमुख कारण अलाउद्दीन की साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षा एवं चित्तौड़ की सैनिक एवं व्यापारिक उपयोगिता थी। गुजरात, मालवा, मध्य प्रदेश, संयुक्त प्रांत, सिंध आदि भागों के व्यापारिक मार्ग चित्तौड़ से होकर गुजरते थे।<ref>राजस्थान : इतिहास एवं संस्कृति एन्साइक्लपीडिया, डॉ० हुकमचंद जैन एवं नारायण माली, जैन प्रकाशन मंदिर, जयपुर, संस्करण-2010, पृ०-413.</ref> स्वाभाविक है कि अलाउद्दीन खिलजी जैसा महत्वाकांक्षी सुल्तान इसको अवश्य अधिकृत करना चाहता। यह संभव है कि पद्मिनी की सुंदरता जानकर उसका एक उद्देश्य उसे प्राप्त करना भी हो गया हो। कारण जो भी हो परंतु अलाउद्दीन के आक्रमण ने शासन सहित रावल रत्नसिंह के जीवन को भी नष्ट कर दिया तथा अपनी बहुसंख्यक सखियों एवं अन्य रानियोंराजपूतानियो के साथ रानी पद्मिनी जौहर करके सती हो गयी।
 
==इन्हें भी देखें==
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