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(जयमल राठौड़ व वीर फत्ता सिसोदिया के केसरिया व फूलकंवर के नेतृत्व में जोहर का वर्णन)
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==व्यक्तिगत जीवन==
उदयसिंह का जन्म [[चित्तौड़गढ़]] में अगस्त १५२२ में हुआ था और इनका निधन १५७२ में हुआ था ,अपने पिता [[महाराणा सांगा]] के निधन के बाद [[रतन सिंह द्वितीय]] को नया शासक नियुक्त किया गया रत्न सिंह ने १५३१ में शासन किया था।<ref>Mahajan V.D. (1991, reprint 2007) ''History of Medieval India'', Part II, S. Chand, New Delhi, ISBN 81-219-0364-5, p.11</ref>[[राणा विक्रमादित्य सिंह]] के शासनकाल के दौरान [[तुर्की]] के सुल्तान गुजरात के बहादुर शाह ने [[चित्तौड़गढ़]] पर १५३४ में हमला कर दिया था इस कारण '''[https://www.rajgk.in/2020/02/maharana-udai-singh-history-in-hindi.html उदयसिंह]''' को [[बूंदी]] भेज दिया था ताकि उदयसिंह सुरक्षित रह सके।<ref name="tod"/> १५३७ में [[बनवीर]] ने [[राणा विक्रमादित्य सिंह|विक्रमादित्य]] का गला घोंटकर हत्या कर दी थी और उसके बाद उन्होंने उदयसिंह को भी मारने का प्रयास किया लेकिन उदयसिंह की धाय (nurse) [[पन्ना धाय]] ने उदयसिंह को बचाने के लिए अपने पुत्र चन्दन का बलिदान दे दिया था इस कारण उदयसिंह ज़िंदा रह सके थे ,[[पन्ना धाय]] ने यह जानकारी किसी को नहीं दी थी कि बनवीर ने जिसको मारा है वो उदयसिंह नहीं बल्कि उनका पुत्र चन्दन था। इसके बाद [[पन्ना धाय]] [[बूंदी]] में रहने लगी। लेकिन उदयसिंह को आने जाने और मिलने की अनुमति नहीं दी।और उदयसिंह को खुफिया तरीक से [[कुम्भलगढ़]] में २ सालों तक रहना पड़ा था।
 
इसके बाद १५४० में [[कुम्भलगढ़]] में उदयसिंह का राजतिलक किया गया और मेवाड़ का राणा बनाया गया। उदयसिंह के सबसे बड़े पुत्र का नाम [[महाराणा प्रताप]] था जबकि पहली पत्नी का नाम [[महारानी जयवंताबाई]] था।<ref name="tod1">Tod, James (1829, reprint 2002). ''Annals & Antiquities of Rajas'than'', Vol.I, Rupa, New Delhi, ISBN 81-7167-366-X, p.252-64</ref> कुछ किवदन्तियों के अनुसार उदयसिंह की कुल २२ पत्नियां और ५६ पुत्र और २२ पुत्रियां थी। उदयसिंह की दूसरी पत्नी का नाम सज्जा बाई सोलंकी था जिन्होंने [[शक्ति सिंह]] और विक्रम सिंह को जन्म दिया था जबकि [[जगमाल सिंह]] ,चांदकंवर और मांकनवर को जन्म धीरबाई भटियानी ने दिया था ,ये उदयसिंह की सबसे पसंदीदा पत्नी थी। इनके अलावा इनकी चौथी पत्नी रानी वीरबाई झाला थी जिन्होंने जेठ सिंह को जन्म दिया था।
==कार्य==
 
१५४१ ईस्वी में वे [[मेवाड़]] के राणा हुए और कुछ ही दिनों के बाद [[अकबर]] ने मेवाड़ की राजधानी चित्तौड़ पर चढ़ाई की। हजारों मेवाड़ियों की मृत्यु के बाद जब लगा कि गढ़ अब न बचेगा तब [[जयमल]] और [[फतेह सिंह|फत्ता]] आदि वीरों के हाथ में उसे छोड़ उदयसिंह [[अरावली]] के घने जंगलों में चले गए। वहाँ उन्होंने नदी की बाढ़ रोक [[उदयसागर]] नामक सरोवर का निर्माण किया था। वहीं उन्होंने अपनी नई राजधानी [[उदयपुर]] बसाई। [[चित्तौड़गढ़|चित्तौड़]] के विध्वंस के चार वर्ष बाद उदयसिंह का [[https://www.rajgk.in/2020/02/maharana-udai-singh-history-in-hindi.html देहांत]] हो गया था और अगला शासक [[जगमाल सिंह]] को बनाया गयाथा लेकिन कुछ ही दिनों बाद जगमाल को हटा कर [[महाराणा प्रताप]] को गद्दी पर बैठाया गया।
 
== युद्ध ==
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