"नवगीत" के अवतरणों में अंतर

351 बैट्स् जोड़े गए ,  7 माह पहले
सम्पादन सारांश रहित
== मात्राओं की गणना ==
कविता या [[गीत]] को उच्चारण करने में लगने वाले समय के माप की इकाई को मात्रा कहते हैं। इसकी गणना करना अत्यन्त सरल है। हृस्व स्वर १ मात्रा जैसे अ, इ, उ, ऋ। दीर्घ स्वर एवं संयुक्त स्वर २ मात्रा जैसे आ ई ऊ ए ऐ ओ औ। व्यंजन यदि स्वर से जुड़ा है तो उसकी अलग कोई मात्रा नहीं गिनी जाती परन्तु दो स्वरों के बीच में यदि दो व्यंजन आते हैं तो व्यंजन की भी एक मात्रा गिनी जाती है। जैसे सब = २ मात्रा और शब्द = ३ मात्रा। इसी प्रकार शिल्प, कल्प अन्य, धन्य, मन्त्र, आदि सभी ३ मात्रा वाले शब्द हैं। यहाँ ध्यान रखने योग्य है कि यदि दो व्यंजन सबसे पहले आकर स्वर से मिलते हैं तो स्वर की ही मात्रा गिनी जायेगी जैसे ॰ त्रिशूल= ४, त्रि = १, शू =२, ल = १, क्षमा =३, क्षम्य = ३, क्षत्राणी = ५, शत्रु =३, चंचल =४, न्यून = ३, सज्जा = ४, सत्य = ३, सदा = ३, सादा = ४, जैसे = ४, कौआ = ४ आदि उदाहरणों से समझना चाहिये।
 
== प्रमुख नवगीतकार ==
सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला, राजेन्द्र प्रसाद सिंह, ठाकुर प्रसाद सिंह, शान्ति सुमन, माहेश्वर तिवारी, सुभाष वशिष्ठ
 
== नवगीत की महत्वपूर्ण पुस्तकें ==