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अहीरों का बहु संख्यक कृषक संवर्ग स्वयं को ग्वाल अहीरों से श्रेष्ठ व [[जाट]], [[राजपूत]], [[गुर्जर]] आदि कृषक वर्गों के बराबर का मानता है। ग्वाल अहीरों का प्रमुख व्यवसाय पशुपालन व दुग्ध-व्यापार है तथा यह वर्ग उत्तर प्रदेश की सीमाओं व हरियाणा के फ़रीदाबाद व गुड़गाँव जनपदों में पाया जाता है। प्रारम्भ में तीव्र रहा यह विभेद अब कम हो चला है।<ref name="har2">{{पुस्तक सन्दर्भ|last1=Bhārgava|first1=Gopāla|title=Hariyāṇā kī kalā evaṃ saṃskr̥ti|date=2011|publisher=Kalpaza Pablikeśansa|location=Dillī|isbn=9788178358895|page=194|url=https://books.google.co.in/books?id=74rsagRGPB8C&pg=PA82&dq=%E0%A4%85%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%B0+%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%BE&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjM5IK0k8bMAhVPkY4KHVOGBoU4FBDoAQhEMAk#v=onepage&q=%E0%A4%85%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%B0&f=false|accessdate=6 मई 2016}}</ref> बनारस के ग्वाल अहीरों को 'सरदार' उपनाम से संबोधित किया जाता है।<ref name="banaras">{{पुस्तक सन्दर्भ|last1=Mukharjī|first1=Viśvanātha|title=Banā rahe Banārasa|date=2009|publisher=Bhāratīya Jñānapīṭha|location=Nayī Dillī|isbn=9788126317134|pages=88,110|edition=Punarnavā saṃskaraṇa.|url=https://books.google.co.in/books?id=IWbsoYJ03BUC&pg=PA88&dq=%E0%A4%85%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%B0+%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B0&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjTj4DSmcbMAhXDSI4KHcNsCXYQ6AEIPjAF#v=onepage&q=%E0%A4%85%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%B0%20%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B0&f=false}}</ref><ref name="bhas">{{पुस्तक सन्दर्भ|last1=Siṃha|first1=Dilīpa|title=Bhāshā, sāhitya aura saṃskr̥ti-śikshaṇa|date=2007|publisher=Vāṇī Prakāśana|location=Nayī Dillī|isbn=9788181436191|page=151|edition=1. saṃskaraṇa.|url=https://books.google.co.in/books?id=muewV1BerusC&pg=PA151&dq=%E0%A4%85%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%B0+%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B0&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjTj4DSmcbMAhXDSI4KHcNsCXYQ6AEITTAH#v=onepage&q=%E0%A4%85%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%B0%20%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B0&f=false|accessdate=6 मई 2016}}</ref>
 
मानव वैज्ञानिक कुमार सुरेश सिंह के अनुसार, अहीर समुदाय लगभग 64 बहिर्विवाही उपकुलों मे विभाजित है। कुछ उपकुल इस प्रकार है- जग्दोलिया, चित्तोसिया, सुनारिया, विछवाल, जाजम, ढडवाल, खैरवाल, डीवा, मोटन, फूडोतिया, कोसलिया, खतोड़िया, भकुलान, भाकरिया, अफरेया, काकलीय, टाटला, जाजड़िया, दोधड़, निर्वाण, सतोरिया, लोचुगा, चौरा, कसेरा, लांबा, खोड़ा, खापरीय, टीकला तथा खोसिया। प्रत्येक कुल का एक कुलदेवता है। मजबूत विरासत व मूल रूप से सैन्य पृष्ठभूमि से बाद मेमें कृषक चरवाहा बनी अहीर जाति स्वयं को सामाजिक पदानुक्रम मे ब्राह्मण व राजपूतो व जाटो के बराबर का मानती है। अन्य जातियाँ भी इन्हे महत्वपूर्ण समुदाय का मानती है।<ref name=केएसएस1/>
 
==योद्धा जाति के रूप में==