"बेगम हज़रत महल": अवतरणों में अंतर

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वे आख़िरी ताजदर-ए-अवध, वाजिद अली शाह की छोटी<ref>Saul David (2002) ''The Indian Mutiny'', Viking; p. 185</ref> पत्नी थीं। 1856 में अंग्रेज़ों ने अवध पर क़ब्ज़ा कर लिया था और वाजिद अली शाह को कलकत्ते में निर्वासित कर दिया गया था। कलकत्ते में उनके पति निर्वासित होने के बाद, और उनसे तलाक़ होने के बावजूद, बेगम हज़रत महल ने अवध रियासत के राजकीय मामलों को संभाला।<ref>{{cite web|url=http://www.mapsofindia.com/who-is-who/history/begum-hazrat-mahal.html |title=Begum Hazrat Mahal |publisher=Mapsofindia.com |date= |accessdate=18 October 2012}}</ref>
===1857 की भारतीय क्रांति===
[[चित्र:1857Swatantrata sangram.jpg|thumb|200px|left|1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को समर्पित भारत का डाकटिकटडाक टिकट जिसमें बेगम हज़रत महल का चित्र एवं उल्लेख है।|पाठ=]]
 
आज़ादी के पहले युद्ध के दौरान, 1857 से 1858 तक, राजा जयलाल सिंह की अगुवाई में बेगम हज़रत महल के हामियों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के ख़िलाफ़ बग़ावत की; बाद में, उन्होंने लखनऊ पर फिर से क़ब्ज़ा कर लिया और उन्होंने अपने बेटे बिरजिस क़द्र को अवध के वली (शासक) घोषित कर दिया।<ref name="Michael Edwardes 1975 p. 104">Michael Edwardes (1975) ''Red Year''. London: Sphere Books; p. 104</ref>
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