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ब्रिगेडियर शेर जंग थापा, एमवीसी (15 अप्रैल 1907 - 25 फरवरी 1999) भारतीय सेना अधिकारी थे। '''द हीरो ऑफ़ स्कार्डू''' के रूप में सम्मानित थे।<ref>[http://www.bharat-rakshak.com/LAND-FORCES/History/1948War/173-Skardu-Hero.html# "Skardu Hero"] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131219120319/http://www.bharat-rakshak.com/LAND-FORCES/History/1948War/173-Skardu-Hero.html |date=19 December 2013 }} ''Bharat Rakshak''</ref> यह लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर रहते हुए भारतीय सेना के दूसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार, [[महावीर चक्र]] (MVC) के प्राप्तकर्ता थे।<ref>Pradeep Thapa Magar. 2000. ''Veer haruka pani Veer Mahaveer.''Kathmandu: Jilla Memorial Foundation.p.100.</ref>
 
== व्यक्तिगत जीवन ==
शेर जंग थापा का जन्म 15 अप्रैल 1907 को [[ऐब्टाबाद]], [[पंजाब]], [[ब्रिटिश भारत]] (अब पाकिस्तान) में हुआ था।<ref name=Pradeep102>Pradeep Thapa Magar. Ibid. p.102.</ref> उनके दादा, सूबेदार बालकृष्ण थापा (2/5 जीआर (एफएफ)), अपने पैतृक घर से टपक गाँव, गोरखा जिला, भारत में चले गए थे।<ref name=Pradeep102/> शेर जंग के पिता, अर्जुन थापा, ब्रिटिश भारतीय सेना में एक मानद कप्तान [[2/5 जीआर (एफएफ)]] और [[द्वितीय विश्व युद्ध]] के अनुभवी थे।
 
बचपन के दौरान, उनका परिवार एबटाबाद से [[धर्मशाला]] चला गया जहाँ थापा ने अपनी शिक्षा जारी रखी और कॉलेज में भाग लिया। उन्हें कॉलेज में एक उत्कृष्ट हॉकी खिलाड़ी के रूप में जाना जाता था। 1 गोरखा रेजिमेंट के कैप्टन [[डगलस ग्रेसी]], जो एक हॉकी खिलाड़ी भी थे, के बारे में कहा जाता है कि वे थापा से प्रभावित थे। थापा का जम्मू और कश्मीर राज्य बलों में एक कमीशन अधिकारी पद प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका थी। [[४]] [[महाराजा]] द्वारा शासित [[ब्रिटिश भारत]] में [[जम्मू और कश्मीर]] सबसे बड़ी रियासतों में से एक था। सितंबर 1947 तक इसके राज्य बलों का नेतृत्व आमतौर पर ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा किया जाता था।