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'''कब्ज''' [[मानव का पोषण नाल|पाचन तंत्र]] की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई व्यक्ति (या जानवर) का [[मल]] बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्याग में कठिनाई होती है। कब्ज अमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी आवृति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है।
सामान्य आवृति और अमाशय की गति व्यक्ति विशेष पर निर्भर करती है। (एक सप्ताह में 7 से 12 बार मल निष्कासन की प्रक्रिया सामान्य मानी जाती है। कब्ज होने से शौच करने में बाधा उत्पन्न होती है, पाचनतंत्र प्रभावित होता है,जिसके कारण शौच करने में बहुत पीड़ा होती होती है ,किसी को केवल गैस की समस्या होती है. किसी को खाने का पाचन ठीक से नहीं हो पाता है। और आजकल कब्ज की समस्याओ से बच्चे और युवा पीढ़ी दोनों परेशान हो चुके है। व्यक्ति दो या तीन दिन तक शौच नहीं हो पाता है।तो कब्ज की समस्या उत्पन्न हो जाती है।  
 
* कम [[रेशा]]युक्त भोजन का सेवन करना ; भोजन में फायबर (Fibers) का अभाव।
* अल्पभोजन ग्रहण करना।
* शरीर में [[जल|पानी]] का कम होना
* कम चलना या काम करना ; किसी तरह की शारीरिक मेहनत न करना; आलस्य करना; शारीरिक काम के बजाय दिमागी काम ज्यादा करना।
* कुछ खास दवाओं का सेवन करना
* [[बृहदान्त्र|बड़ी आंत]] में घाव या चोट के कारण (यानि बड़ी आंत में कैंसर)
* [[अवटु ग्रंथि|थायरॉयड]] [[हार्मोन]] का कम बनना
* [[कैल्सियम]] और [[पोटैशियम]] की कम मात्रा
* [[मधुमेह]] के रोगियों में पाचन संबंधी समस्या
* कंपवाद (पार्किंसन बीमारी)
* [[चाय]], [[कॉफ़ी|कॉफी]] बहुत ज्यादा पीना। धूम्रपान करना व शराब पीना।
* गरिष्ठ पदार्थों का अर्थात् देर से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करना।
* आँत, [[यकृत|लिवर]] और [[प्लीहा|तिल्ली]] की बीमारी।
* दु:ख, चिन्ता, डर आदि का होना।
* सही समय पर भोजन न करना।
खाने में ऐसी चीजें ले, जि‍नसे पेट स्‍वयं ही साफ हो जाय।
 
* '''[[साधारण नमक|नमक]]''' – छोटी हरड और काल नमक समान मात्रा में मि‍लाकर पीस लें। नि‍त्‍य रात को इसकी दो चाय की चम्‍मच गर्म पानी से लेने से दस्‍त साफ आता हैं।
* '''[[ईसबगोल]]''' – दो चाय चम्‍मच ईसबगोल 6 घण्‍टे पानी में भि‍गोकर इतनी ही मि‍श्री मि‍लाकर जल से लेने से दस्‍त साफ आता हैं। केवल मि‍श्री और ईसबगोल मि‍ला कर बि‍ना भि‍गोये भी ले सकते हैं।
* '''[[चना]]''' – कब्‍ज वालों के लि‍ए चना उपकारी है। इसे भि‍गो कर खाना श्रेष्‍ठ है। यदि‍ भीगा हुआ चना न पचे तो चने उबालकर नमक अदरक मि‍लाकर खाना चाहि‍ए। चेने के आटे की रोटी खाने से कब्‍ज दूर होती है। यह पौष्‍ि‍टक भी है। केवल चने के आटे की रोटी अच्‍छी नहीं लगे तो गेहूं और चने मि‍लाकर रोटी बनाकर खाना भी लाभदायक हैं। एक या दो मुटठी चने रात को भि‍गो दें। प्रात: जीरा और सौंठ पीसकर चनों पर डालकर खायें। घण्‍टे भर बाद चने भि‍गोये गये पानी को भी पी लें। इससे कब्‍ज दूर होगी।
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