"सालासर बालाजी" के अवतरणों में अंतर

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I corrected the name of the village, as was Nagpur while the correct name is Nagaur and the name Jaswantgarh was also incorrect, and the name Pobolav was also incorrect.
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(I corrected the name of the village, as was Nagpur while the correct name is Nagaur and the name Jaswantgarh was also incorrect, and the name Pobolav was also incorrect.)
 
श्रावण शुक्लपक्ष नवमी, संवत् 1811 - शनिवार को एक चमत्कार हुआ। नागपुरनागौर जिले में असोटा गाँव का एक गिन्थाला-जाट किसान अपने खेत को जोत रहा था।
अचानक उसके हल से कोई पथरीली चीज़ टकरायी और एक गूँजती हुई आवाज पैदा हुई। उसने उस जगह की मिट्टी को खोदा और उसे मिट्टी में सनी हुई दो मूर्त्तियाँ मिलीं।
उसकी पत्नी उसके लिए भोजन लेकर वहाँ पहुँची। किसान ने अपनी पत्नी को मूर्त्ति दिखायी। उन्होंने अपनी साड़ी (पोशाक) से मूर्त्ति को साफ़ की।
उसी रात भगवान हनुमान के एक भक्त, सालासर के मोहन दासजी महाराज ने भी अपने सपने में भगवान हनुमान यानि बालाजी को देखा।
भगवान बालाजी ने उसे असोटा की मूर्त्ति के बारे में बताया।
उन्होंने तुरन्त असोटाआसोटा के ठाकुर के लिए एक सन्देश भेजा। जब ठाकुर को यह पता चला कि असोटाआसोटा आये बिना ही मोहन दासजी को इस बारे में थोड़ा-बहुत ज्ञान है, तो वे चकित हो गये।
निश्चित रूप से, यह सब सर्वशक्तिमान भगवान बालाजी की कृपा से ही हो रहा था। मूर्त्ति को सालासर भेज दिया गया और इसी जगह को आज सालासर धाम के रूप में जाना जाता है।
दूसरी मूर्त्ति को इस स्थान से 25 किलोमीटर दूर '''पाबोलाम''' (भरतगढ़जसवंतगढ़) में स्थापित कर दिया गया।
पाबोलामपाबोलाव में सुबह के समय समारोह का आयोजन किया गया और उसी दिन शाम को सालासर में समारोह का आयोजन किया गया।
 
== मार्ग मानचित्र (दिल्ली - सालासर बालाजी) ==
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