"सामाजिक संघटन": अवतरणों में अंतर

3 बाइट्स जोड़े गए ,  2 वर्ष पहले
छो
बॉट: पुनर्प्रेषण ठीक कर रहा है
छोNo edit summary
टैग: यथादृश्य संपादिका मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन
छो (बॉट: पुनर्प्रेषण ठीक कर रहा है)
 
== इतिहास ==
समाज का एक संघटन के रूप में प्रतिदर्श या इसकी अवधारणा का विकास 19 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में फ्रांसिस समाजशास्त्री, [[ईमिलीइमाईल डर्खीमदुर्खीम|एमिले डुर्कहेम]] के द्वारा किया गया था। डुर्कहेम के अनुसार, एक संघटन या समाज का प्रकार्य जितना ही विशिष्ट होगा उसका विकास भी उतना ही अधिक होगा, इसका ठीक विपरीत भी सत्य होगा. आमतौर पर, [[संस्कृति]], [[राजनीति]] और [[अर्थशास्त्र]] समाज की तीन प्रमुख गतिविधियां हैं। सामाजिक स्वास्थ्य इन तीन गतिविधियों की सुव्यवस्थित पारस्परिक क्रिया पर निर्भर करता है। इसलिए, सामाजिक संघटन के "[[स्वास्थ्य]]" को संस्कृति, राजनीति और अर्थशास्त्र की पारस्परिक क्रिया के प्रकार्य के रूप में देखा जा सकता है, जिसका एक सिद्धांत के रूप में अध्ययन किया जा सकता है, प्रतिदर्श बनाया जा सकता है और विश्लेषण किया जा सकता है। "संघटनात्मक समाज" की अवधारणा की और अधिक विस्तृत व्याख्या हर्बर्ट स्पेंसर द्वारा उनके निबंध "द सोशल ऑर्गेनिज़्म" में की गयी थी।
 
== संबंधित तथ्य ==
इसकी एक समवृत्त अवधारणा का नाम गाइआ अवधारणा है जिसमें संपूर्ण [[पृथ्वी]] की परिकल्पना एक एकल एकीकृत [[सजीवजीवन|संघटन]] के रूप में की गयी है।
 
== सन्दर्भ ==
85,949

सम्पादन