"वाप्पला पंगुन्नि मेनन": अवतरणों में अंतर

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==उत्तर काल==
 
पटेल और मेनन के बीच की रिश्ता अमूल्य था। मेनन, पटेल के बाए हाथ जैसे था और स्वतंत्र भारत के एकता में महत्त्वपूर्ण योगदान निभा चुके है।हर राजनीतिज्ं, अंग्रेज सरकार के नीचे काम करनेवाले प्रशासन कर्मचारियों से असहानूभुतिपूर्णअसहनुभूतिपूर्ण थे। कुछ काँग्रेस कर्म्चारी प्रशासन सेवा को व्ंचितवंचित करना चाह्तेचाहते थे, क्योंकि उनके गिरफ्तारी में इन्हीं अफ्सरों का हाथ था। पंडित नेह्रूनेहरु को तक प्र्शासन कर्मचारियों से ज्यादा प्यार नहीं था। लेकिन मेनन को सन १९५१ ओदीशाओडिशा के राज्यपाल का स्थान दिया गया। कुछ समय वे वित्त आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं। पटेल के देहांत के बाद, मेनन नव- निर्मित भारतीय प्रशासन सेवा से इस्तीफा ले लिए। <br />
उन्होने उसके पश्चात , भारतीय एकीकरण पर एक किताब की रचना की, जो एकीकरण,सत्ता का स्थानांतरण और बटवारे का सजीव चित्रण था। बाद में वे "स्व्तंत्र पार्टिपार्टी" के सद्स्य हो गए। स्वतंत्र भारत के शांतिपूर्ण अवस्था में मेनन का बहुत बडा हाथ है। अगर सिमलाशिमला में मेनन ने भिन्न राष्ट्रों को मौंट्बैटन के सहयोग के साथ केन्द्र सरकार से जोड्ने की योजना नहीं बनाया होता, तो भारत का नक्षा आज कुछ और ही होता। [[अंग्रेज]] सरकार की अनुक्र्मांकित समाज में, मेनन जैसे मामूली वातावरन से आकर सरकार के सबसे ऊँचे श्रेणियों पर पहुँचनेवाला शायद ही कोई है। आश्चर्य की बात यह है कि किसी ने भी आज तक इनकी आत्मकथा लिखी नहीं है। सेवा निर्वृत्ति के बाद मेनन [[बेंगालुरु]] में रह्ने लगे।१९६६ में उनकी देहांत हुई।
 
==कलात्मक चित्रण==
गुमनाम सदस्य