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[[चित्र:Tocharian.JPG|thumb|240px|एक तख़्ती पर [[ब्राह्मी लिपि]] में लिखी हुई तुषारी 'बी' भाषा (कूचा, [[आक़्सू विभाग]], [[शिंजियांग|शिनजियांग प्रान्त]], चीन से मिली)]]
[[चित्र:Tocharian3.jpg|thumb|240px|तुषारी पांडुलिपि का अंश]]
'''तुषारी''' या '''तुख़ारी''' (<small>[[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]: Tocharian, टोकेरियन; [[यूनानी भाषा|यूनानी]]: Τόχαροι, तोख़ारोई</small>) [[मध्य एशिया]] की [[तारिम द्रोणी]] में बसने वाले [[तुषारी लोगोंलोग]]ों द्वारा बोली जाने वाली [[हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार|हिन्द-यूरोपीय भाषा परिवार]] की भाषाएँ थीं जो समय के साथ विलुप्त हो गई। एक [[तुर्की भाषाएँभाषा परिवार|तुर्की]] ग्रन्थ में तुषारी को 'तुरफ़ानी भाषा' भी बुलाया गया था। इतिहासकारों का मानना है कि जब तुषारी-भाषी क्षेत्रों में [[तुर्की भाषा परिवार|तुर्की भाषाएँ]] बोलने वाली [[उइग़ुर|उईग़ुर लोगों]] का क़ब्ज़ा हुआ तो तुषारी भाषाएँ ख़त्म हो गई। तुषारी की लिपियाँ [[भारत]] की [[ब्राह्मी लिपि]] पर आधारित थीं और उन्हें तिरछी ब्राह्मी (<small>Slanted Brahmi</small>) कहा जाता है।<ref name="ref03yamuz">[http://books.google.com/books?id=y3KdxBqjg5cC The Blackwell encyclopedia of writing systems], Florian Coulmas, Wiley-Blackwell, 1999, ISBN 978-0-631-21481-6, ''... the Gupta script is a direct descendent of Brahmi writing ... a cursive variety was carried to Central Asia where it was further developed into the Tocharian script, also known as 'Central Asian slanting' ...''</ref>
 
== शाखाएँ ==
तुषारी में लिखी हुए तीसरी से लेकर नौवी सदी ईसवी तक की पांडुलिपियों के आधार पर तुषारी भाषाओँ की दो शाखाएँ मिलती हैं, जिनके बोलने वाले एक-दुसरे को नहीं समझ सकते थे:
* तुषारी 'ए' (<small>Tocharian A</small>) - इसे अग्नेआई (<small>Agnean</small>) या पूर्वी तुषारी भी कहते हैं, हालाँकि इसे तुषारी में 'आरशी' बुलाया जाता था। यह आधुनिक [[शिंजियांग|शिनजियांग]] के [[काराशहर]] और [[तुरफ़ान]] इलाक़े में बोली जाती थी। काराशहर का पुराना नाम 'अग्नि' (<small>Agni</small>) था ([[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में 'अग्निदेश')।
* तुषारी 'बी' (<small>Tocharian B</small>) - उसे कूचेआई (<small></small>) या पश्चिमी तुषारी भी कहते हैं। यह शिजियंग के [[आक़्सू विभाग]] के कूचा क्षेत्र में बोली जाती थी और कुछ हद तक तुषारी 'ए' के क्षेत्र में भी बोली जाती थी।
[[भाषाविज्ञान|भाषावैज्ञानिक]] मानते हैं की यह दोनों एक ही आदिम-तुषारी भाषा से उत्पन्न हुईं जो शायद १००-१००० ईसापूर्व के काल में बोली जाती हो।
 
== लिखाईयाँ ==
तुषारी में लिखी पांडुलिपियों के अंश ताम्र-पत्रों, लकड़ी के तख़्तों और चीनी काग़ज़ पर मिलते हैं जो ८वीं सदी से [[तारिम द्रोणी]] के अत्यंत शुष्क वातावरण की वजह से बचे हुए हैं। बहुत सी लिखाईयाँ [[बौद्ध धर्म]] से सम्बंधित हैं और [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] से अनुवादित की गई हैं। १९८९ में चीनी भाषावैज्ञानिक जी शियानलिन (<small>季羡林</small>) ने मैत्रेयसमिति-नाटक का १९७४ में मिली पांडुलिपि का अनुवाद प्रस्तुत किया।<ref name="ref90biyum">[http://books.google.com/books?id=DRrhSQU8emwC Fragments of the Tocharian A Maitreyasamiti-Nāṭaka of the Xinjiang Museum, China], Xianlin Ji, Werner Winter, Georges-Jean Pinault, Walter de Gruyter, 1998, ISBN 978-3-11-014904-3</ref> धार्मिक लिखाईयों के अलावा कुछ मठों की चिट्ठी-पत्री, कुछ व्यापर-सम्बन्धी दस्तावेज़, कुछ दवाई और जादू सम्बन्धी लिखाईयाँ और एक प्रेम-कविता भी मिली हैं।<ref name="ref59bemic">[http://books.google.com/books?id=ZT4OAQAAMAAJ Encyclopedia of language &amp; linguistics], E. K. Brown, R. E. Asher, J. M. Y. Simpson, Elsevier, 2006, ISBN 978-0-08-044299-0, ''... a solitary love poem and a large number of monastery records, as well as caravan passes and cave graffiti ...''</ref>
 
== इन्हें भी देखें ==
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