"ख़ुबानी": अवतरणों में अंतर

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| status_ref =<ref>{{IUCN2009.2 |assessors=Participants of the FFI/IUCN SSC Central Asian regional tree Red Listing workshop, Bishkek, Kyrgyzstan (11–13 जुलाई 2006) |year=2007 |title=Armeniaca vulgaris |id=63405 |downloaded=7 नवम्बर 2009}}</ref>
| regnum = [[पादप]]
| divisio = [[पुष्पीयसपुष्पक पौधा|मैग्नोलियोफाइटा]]
| classis = [[मैग्नोलियोप्सीडा]]
| ordo = [[:en:Rosales|रोज़ेल्स]]
[[चित्र:Turkey.Pasa Baglari005.jpg|thumb|left|तुर्की में उग रहा एक ख़ुबानी का पेड़]]
[[चित्र:Apricot and cross section.jpg|thumb|left|खुबानी और उसका पार अनुभाग]]
[[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] में ख़ुबानी को "ऐप्रिकॉट" (apricot) कहते हैं। [[पश्तो भाषा|पश्तो]] में इसे "ख़ुबानी" ({{Nastaliq|ur|خوبانۍ}}) ही कहते हैं। [[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]] में इसको "ज़र्द आलू" ({{Nastaliq|ur|زردآلو}}) कहते हैं। फ़ारसी में "आलू" का मतलब "आलू बुख़ारा" और "ज़र्द" का मतलब "पीला (रंग)" होता है, यानि "ज़र्द आलू" का मतलब "पीला आलू बुख़ारा' होता है। ध्यान रहे के जिसे हिन्दी में आलू बोलते हैं उसे फ़ारसी में "आलू ज़मीनी" बोलते हैं (यानि ज़मीन के नीचे उगने वाला आलू बुख़ारा)। [[मराठी भाषा|मराठी]] में इसके लिए फ़ारसी से मिलता-जुलता "[[:mr:जर्दाळू|जर्दाळू]]" शब्द है।
 
== विवरण ==
 
== पैदावार ==
विश्व में सबसे ज़्यादा ख़ुबानी [[तुर्की]] में उगाई जाती है जहाँ २००५ में ३९०,००० टन ख़ुबानी पैदा की गई। मध्य-पूर्व तुर्की में स्थित मलत्या क्षेत्र ख़ुबानियों के लिए मशहूर है और तुर्की की लगभग आधी पैदावार यहीं से आती है। तुर्की के बाद [[ईरान]] का स्थान है, जहाँ २००५ में २८५,००० टन ख़ुबानी उगाई गई। ख़ुबानी एक ठन्डे प्रदेश का पौधा है और अधिक गर्मी में या तो मर जाता है या फल पैदा नहीं करता। भारत में ख़ुबानियाँ उत्तर के पहाड़ी इलाकों में पैदा की जाती है, जैसे के [[कश्मीर]], [[हिमाचल प्रदेश]], [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]], वग़ैराह।
 
== प्रयोग ==
सूखी ख़ुबानी को भारत के पहाड़ी इलाक़ों में बादाम, [[अखरोट|अख़रोट]] और न्योज़े की तरह ख़ुबानी को एक [[मेवा|ख़ुश्क मेवा]] समझा जाता है और काफ़ी मात्रा में खाया जाता है। कश्मीर और हिमाचल के कई इलाक़ों में सूखी ख़ुबानी को किश्त या किष्ट कहते हैं। माना जाता है के कश्मीर के किश्तवार क्षेत्र का नाम इसीलिए पड़ा क्योंकि प्राचीनकाल में यह जगह सूखी खुबनियों के लिए प्रसिद्ध थी।
 
खुबानी की प्यूरी को वसा के विकल्प के तौर पर प्रयोग कर सकते हैं। इसकी प्यूरी आलूबुखारे की प्यूरी की तरह बहुत गहरे रंग की नहीं होती और न ही सेब की प्यूरी की तरह जल की अधिकता वाली ही होती है। खुबानी का उद्गम उत्तर पश्चिम के देशों विशेषकर अमेरिका का माना जाता है। कुछ समय बाद यह फल तुर्की पहुंचा। इस समय वहां खुबानी की पैदावार सबसे ज्यादा होती है। खुबानी का रंग जितना चमकीला होगा, उसमें विटामिन-सी और ई और पोटेशियम की मात्रा उतनी ही अधिक होगी। सूखी खुबानी में ताजी खुबानी की तुलना में १२ गुना लौह, सात गुना आहारीय रेशा और पांच गुना विटामिन ए होता है। सुनहरी खुबानी में कच्चे आम व चीनी मिला कर बहुत स्वादिष्ट चटनी बनती है। खुबानी का पेय भी बहुत स्वादिष्ट होता है, जिसे ‘एप्रीकॉट नेक्टर’ कहते हैं।<ref>[http://www.livehindustan.com/news/lifestyle/lifestylenews/50-50-65418.html स्वास्थ्यवर्धक खुबानी]। हिन्दुस्तान लाइव</ref>
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