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'''ब्रिटिश भारत में रियासतें''' ([[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]]:Princely states; उच्चारण:"प्रिंस्ली स्टेट्स्") [[ब्रिटिश राज]] के दौरान अविभाजित [[भारत]] में नाममात्र के स्वायत्त राज्य थे। इन्हें आम बोलचाल की भाषा में "[[रियासत]]", "रजवाड़े" या व्यापक अर्थ में '''देशी रियासत''' कहते थे। ये [[ब्रिटिश साम्राज्य]] द्वारा सीधे शासित नहीं थे बल्कि भारतीय शासकों द्वारा शासित थे। परन्तु उन भारतीय शासकों पर परोक्ष रूप से ब्रिटिश शासन का ही नियन्त्रण रहता था।
 
सन् 1947 में जब भारत आज़ाद हुआ तब यहाँ 5621000 रियासतें थीं। इनमें से अधिकांश रियासतों ने ब्रिटिश सरकार से लोकसेवा प्रदान करने एवं कर (टैक्स) वसूलने का [[संविदा|'ठेका']] ले लिया था। कुल 565 में से केवल 21 रियासतों में ही [[सरकार]] थी और [[मैसूर]], [[हैदराबाद]] तथा [[कश्मीर]] नाम की सिर्फ़ 3 रियासतें ही क्षेत्रफल में बड़ी थीं। 15 अगस्त,1947 को ब्रितानियों से मुक्ति मिलने पर इन सभी रियासतों को विभाजित भारत ([[भारतीय अधिराज्य|भारत अधिराज्य]]) और विभाजन के बाद बने मुल्क [[पाकिस्तान]] में मिला लिया गया।
 
15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश सार्वभौम सत्ता का अन्त हो जाने पर केन्द्रीय गृह मन्त्री [[वल्लभ भाई पटेल|सरदार वल्लभभाई पटेल]] के नीति कौशल के कारण हैदराबाद, कश्मीर तथा जूनागढ़ के अतिरिक्त सभी रियासतें शान्तिपूर्वक भारतीय संघ में मिल गयीं। 26 अक्टूबर को कश्मीर पर पाकिस्तान का आक्रमण हो जाने पर वहाँ के [[महाराज हरि सिंह|महाराजा हरी सिंह]] ने उसे भारतीय संघ में मिला दिया। पाकिस्तान में सम्मिलित होने की घोषणा से [[जूनागढ़]] में विद्रोह हो गया जिसके कारण प्रजा के आवेदन पर राष्ट्रहित में उसे भारत में मिला लिया गया। वहाँ का नवाब [[पाकिस्तान]] भाग गया। 1948 में सैनिक कार्रवाई द्वारा हैदराबाद को भी भारत में मिला लिया गया। इस प्रकार हिन्दुस्तान से देशी रियासतों का अन्त हुआ।
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