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| father = देसाई धुलप्पा गौदुरु
| birth_date = {{birth date|df=yes|1778|10|23}}
| birth_place = काकती, [[बेलगाम|बेलगाँव]] तहसील, बेलगाँव जिला, [[मैसूर]], [[ब्रिटिश राज|ब्रितानी भारत]]
| death_date = {{Death date and age|df=yes|1829|02|21|1778|10|23}}
| death_place = बैलहोंगल तहसील, बेलगाँव, [[मैसूर]], [[ब्रिटिश राज|ब्रितानी भारत]]
| nationality = [[भारतीय]]
| other_names = रानी चेन्नम्मा, कित्तूर रानी चेन्नमा
}}
 
'''रानी चेनम्मा''' ([[कन्नड़ भाषा|कन्नड]]: ಕಿತ್ತೂರು ರಾಣಿ ಚೆನ್ನಮ್ಮ) ([[१७७८]] - [[१८२९]]) [[भारत]] के [[कर्नाटक]] के [[कित्तूर]] राज्य की रानी थीं। सन् १८२४ में (सन् १८५७ के भारत के स्वतंत्रता के प्रथम संग्राम से भी ३३ वर्ष पूर्व) उन्होने [[हड़प नीति]] (डॉक्ट्रिन ऑफ लेप्स) के विरुद्ध अंग्रेजों से सशस्त्र संघर्ष किया था। संघर्ष में वह वीरगति को प्राप्त हुईं। भारत में उन्हें भारत की स्वतंत्रता के लिये संघर्ष करने वाले सबसे पहले शासकों में उनका नाम लिया जाता है।<ref>{{Cite web|url=http://pib.nic.in/newsite/printrelease.aspx?relid=148944|title=Rani Chennamma of Kitturu|website=pib.nic.in|access-date=2018-02-21}}</ref>
 
रानी चेनम्मा के साहस एवं उनकी वीरता के कारण देश के विभिन्न हिस्सों खासकर कर्नाटक में उन्हें विशेष सम्मान हासिल है और उनका नाम आदर के साथ लिया जाता है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के संघर्ष के पहले ही रानी चेनम्मा ने युद्ध में अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। हालांकि उन्हें युद्ध में कामयाबी नहीं मिली और उन्हें कैद कर लिया गया। अंग्रेजों के कैद में ही रानी चेनम्मा का निधन हो गया।<ref name=south>{{cite book|last=Gopalakrishnan|first=Subramanian (Ed.)|title=The South Indian rebellions : before and after 1800|year=2007|publisher=Palaniappa Brothers|location=Chennai|isbn=9788183795005|pages=102–103|url=https://books.google.com/books?id=i81mLhBEBgQC&pg=PA103&dq=Kittur+Rani+Chennamma&hl=en&sa=X&ei=71GaUP3ANcrLrQeA24DQBg&ved=0CC8Q6AEwATgK#v=onepage&q&f=false|edition=1st|author2=Gopalakrishnan, edited by S. }}</ref>
डाक्ट्रिन ऑफ लैप्स के अलावा रानी चेन्नम्मा का अंग्रेजों की कर नीति को लेकर भी विरोध था और उन्होंने उसे मुखर आवाज दी। रानी चेन्नम्मा पहली महिलाओं में से थीं जिन्होंने अनावश्यक हस्तक्षेप और कर संग्रह प्रणाली को लेकर अंग्रेजों का विरोध किया।
 
अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध में रानी चेन्नम्मा ने अपूर्व शौर्य का प्रदर्शन किया, लेकिन वह लंबे समय तक अंग्रेजी सेना का मुकाबला नहीं कर सकी। उन्हें कैद कर बेलहोंगल किले में रखा गया जहां उनकी [[२१ फ़रवरी|२१ फरवरी]] [[१८२९]] को उनकी मौत हो गई। [[पुणे]]-[[बंगलौर|बेंगलूरु]] राष्ट्रीय राजमार्ग पर [[बेलगाम]] के पास कित्तूर का राजमहल तथा अन्य इमारतें गौरवशाली अतीत की याद दिलाने के लिए मौजूद हैं।
 
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