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=== प्राचीन इतिहास ===
यहां का प्राचीन विस्तृत लिखित इतिहास है [[राजतरंगिणी]], जो [[कल्हण]] द्वारा 12वीं शताब्दी ई. में लिखा गया था। तब तक यहां पूर्ण हिन्दू राज्य रहा था।
यह [[अशोक|अशोक महान]] के साम्राज्य का हिस्सा भी रहा। लगभग तीसरी शताब्दी में अशोक का शासन रहा था। तभी यहां बौद्ध धर्म का आगमन हुआ, जो आगे चलकर कुषाणों के अधीन समृध्द हुआ था।
उज्जैन के महाराज [[विक्रमादित्य]] के अधीन छठी शताब्दी में एक बार फिर से हिन्दू धर्म की वापसी हुई। उनके बाद ललितादित्या चमार शासक रहा, जिसका काल 697 ई. से 738 ई. तक था। "आइने अकबरी के अनुसार छठी से नौ वीं शताब्दी के अंत तक कश्मीर पर चमारों का शासन रहा।" अवंती वर्मन ललितादित्या का उत्तराधिकारी बना। उसने श्रीनगर के निकट अवंतिपुर बसाया। उसे ही अपनी राजधानी बनाया। जो एक समृद्ध क्षेत्र रहा। उसके खंडहर अवशेष आज भी शहर की कहानी कहते हैं।
यहां [[महाभारत]] युग के गणपतयार और खीर भवानी मन्दिर आज भी मिलते हैं। [[गिलगित|गिलगिट]] में पाण्डुलिपियां हैं, जो प्राचीन पाली भाषा में हैं। उसमें बौद्ध लेख लिखे हैं।
त्रिखा शास्त्र भी यहीं की देन है। यह कश्मीर में ही उत्पन्न हुआ। इसमें सहिष्णु दर्शन होते हैं।
चौदहवीं शताब्दी में यहां मुस्लिम शासन आरंभ हुआ। उसी काल में फारस से से सूफी इस्लाम का भी आगमन हुआ।
*[[चन्द्रापीड]]
*[[तारापीड]]
*[[ललितादित्य मुक्तपीड|ललितादित्य]]
*[[जयपीड]]
*[[अवन्तिवर्मन]]—८५५/६-८८३
 
सन [[१५८९]] में यहां मुगल का राज हुआ। यह अकबर का शासन काल था। मुगल साम्राज्य के विखंडन के बाद यहां पठानों का कब्जा हुआ। यह काल यहां का काला युग कहलाता है।
फिर [[१८१४]] में [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] के शासक [[महाराजा रणजीत सिंह]] द्वारा पठानों की पराजय हुई, व सिख साम्राज्य आया।
 
=== आधुनिक काल ===
अंग्रेजों द्वारा सिखों की पराजय [[१८४६]] में हुई, जिसका परिणाम था [[लाहौर संधि]]। अंग्रेजों द्वारा महाराजा गुलाब सिंह को गद्दी दी गई जो कश्मीर का स्वतंत्र शासक बना। गिलगित एजेन्सी अंग्रेज राजनैतिक एजेन्टों के अधीन क्षेत्र रहा। कश्मीर क्षेत्र से गिलगित क्षेत्र को बाहर माना जाता था। अंग्रेजों द्वारा जम्मू और कश्मीर में पुन: एजेन्ट की नियुक्ति हुई। महाराजा गुलाब सिंह के सबसे बड़े पौत्र [[महाराज हरि सिंह (कश्मीर)|महाराजा हरि सिंह]] [[१९२५.|1925]] ई. में गद्दी पर बैठे, जिन्होंने [[१९४७|1947]] ई. तक शासन किया।
 
== अधिमिलन और समेकन ==
* भारत के साथ समझौते पर हस्ताक्षर से पहले, पाकिस्तान ने कश्मीर की आवश्यक आपूर्ति को काट दिया जो तटस्थता समझौते का उल्लंघन था। उसने अधिमिलन हेतु दबाव का तरीका अपनाना आरंभ किया, जो भारत व कश्मीर, दोनों को ही स्वीकार्य नहीं था।
 
* जब यह दबाव का तरीका विफल रहा, तो पठान जातियों के कश्मीर पर आक्रमण को पाकिस्तान ने उकसाया, भड़काया और समर्थन दिया। तब तत्कालीन महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद का आग्रह किया। यह [[२४ अक्टूबर|24 अक्टूबर]], [[१९४७|1947]] की बात है।
 
* [[नेशनल कांफ्रेंस]], जो कश्मीर सबसे बड़ा लोकप्रिय संगठन था, व अध्यक्ष [[शेख़ अब्दुल्ला|शेख अब्दुल्ला]] थे; ने भी भारत से रक्षा की अपील की।
 
* हरि सिंह ने गवर्नर जनरल लार्ड [[माउंटबेटन]] को कश्मीर में संकट के बारे में लिखा, व साथ ही भारत से अधिमिलन की इच्छा प्रकट की। इस इच्छा को माउंटबेटन द्वारा '''[[२७ अक्टूबर|27 अक्टूबर]], [[१९४७|1947]]''' को स्वीकार किया गया।
 
* [[भारत सरकार अधिनियम, १९३५|भारत सरकार अधिनियम, 1935]] और [[भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947]] के तहत यदि एक भारतीय राज्य प्रभुत्व को स्वींकारने के लिए तैयार है, व यदि भारत का गर्वनर जनरल इसके शासक द्वारा विलयन के कार्य के निष्पादन की सार्थकता को स्वीकार करे, तो उसका भारतीय संघ में अधिमिलन संभव था।
 
* पाकिस्तान द्वारा हरि सिंह के विलयन समझौते में प्रवेश की अधिकारिता पर कोई प्रश्न नहीं किया गया। कश्मीर का भारत में विलयन विधि सम्मत माना गया। व इसके बाद पठान हमलावरों को खदेड़ने के लिए [[२७ अक्टूबर|27 अक्टूबर]], [[१९४७|1947]] को भारत ने सेना भेजी, व कश्मीर को भारत में अधिमिलन कर यहां का अभिन्न अंग बनाया।
 
=== संयुक्त राष्ट्र ===
* भारत कश्मीर मुद्दे को [[१ जनवरी|1 जनवरी]], [[१९४८|1948]] को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले गया। परिषद ने भारत और पाकिस्तान को बुलाया, व स्थिति में सुधार के लिए उपाय खॊजने की सलाह दी। तब तक किसी भी वस्तु परिवर्तन के बारे में सूचित करने को कहा। यह [[१७ जनवरी|17 जनवरी]], [[१९४८|1948]] की बात है।
 
* भारत और पाकिस्तान के लिए एक तीन सदस्यी संयुक्त राष्ट्र आयोग (यूएनसीआईपी) [[२० जनवरी|20 जनवरी]], [[१९४८|1948]] को गठित किया गया, जो कि विवादों को देखे। [[२१ अप्रैल|21 अप्रैल]], [[१९४८|1948]] को इसकी सदस्यता का प्रश्न उठाया गया।
 
* तब तक कश्मीर में आपातकालीन प्रशासन बैठाया गया, जिसमें, [[५ मार्च|5 मार्च]], [[१९४८|1948]] को शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में अंतरिम सरकार द्वारा स्थान लिया गया।
 
* [[१३ अगस्त|13 अगस्त]], [[१९४८|1948]] को यूएनसीआईपी ने संकल्प पारित किया जिसमें युद्ध विराम घोषित हुआ, पाकिस्तानी सेना और सभी बाहरी लोगों की वापसी के अनुसरण में भारतीय बलों की कमी करने को कहा गया। जम्मू और कश्मीर की भावी स्थिति का फैसला 'लोगों की इच्छा' के अनुसार करना तय हुआ। संपूर्ण जम्मू और कश्मीर से पाकिस्तान सेना की वापसी, व जनमत की शर्त के प्रस्ताव को माना गया, जो- कभी नहीं हुआ।
 
* संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान के अंतर्गत युध्द-विराम की घोषणा की गई। यूएनसीआईपी संकल्प - [[५ जनवरी|5 जनवरी]], [[१९४९|1949]]। फिर [[१३ अगस्त|13 अगस्त]], [[१९४८|1948]] को संकल्प की पुनरावृति की गई। महासचिव द्वारा जनमत प्रशासक की नियुक्ति की जानी तय हुई।
 
=== निर्माणात्मक वर्ष ===
* ऑल जम्मू और कश्मीर नेशनल कान्फ्रेंस ने [[अक्टूबर]],[[१९५०|1950]] को एक संकल्प किया। एक संविधान सभा बुलाकर वयस्क मताधिकार किया जाए। अपने भावी आकार और संबध्दता जिसमें इसका भारत से अधिमिलन सम्मिलित है का निर्णय लिया जाये, व एक संविधान तैयार किया जाए।
 
* चुनावों के बाद संविधान सभा का गठन [[सितम्बर]], [[१९५१|1951]] को किया गया।
 
* ऐतिहासिक 'दिल्ली समझौता - कश्मीरी नेताओं और भारत सरकार द्वारा- जम्मू और कश्मीर राज्य तथा भारतीय संघ के बीच सक्रिय प्रकृति का संवैधानिक समझौता किया गया, जिसमें भारत में इसके विलय की पुन:पुष्टि की गई।
 
* जम्मू और कश्मीर का संविधान, संविधान सभा द्वारा [[नवम्बर]], [[१९५६|1956]] को अंगीकृत किया गया। यह [[२६ जनवरी|26 जनवरी]], [[१९५७|1957]] से प्रभाव में आया।
 
* राज्य में पहले आम चुनाव अयोजित गए, जिनके बाद [[मार्च]], [[१९५७|1957]] को शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में नेशनल कांफ्रेंस द्वारा चुनी हुई सरकार बनाई गई।
 
* राज्य विधान सभा में [[१९५९]] में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया, जिसमें राज्य में भारतीय चुनाव आयोग और भारत के उच्चतम न्यायालय के क्षेत्राधिकार के विस्तार के लिए राज्य संविधान का संशोधन पारित हुआ।
 
=== हजरत बल से पवित्र अवशेष की चोरी ===
[[दिसम्बर]], [[१९६३|1963]] में एक दुर्भाग्यशाली घटना में हजरत बल मस्जिद से पवित्र अवशेष की चोरी हो गई। मौलवी फारूक के नेतृत्व के अधीन एक कार्य समिति द्वारा भारी आन्दोलन की शुरूआत हुई, जिसके बाद पवित्र अवशेष की बरामदगी और स्थापना की गई।
 
=== पाकिस्तान के साथ युद्ध ===
 
[[अगस्त]],[[१९६५|1965]] में जम्मू कश्मीर में घुसपैठियों की घुसपैठ के साथ पाकिस्तानी सशस्त्र बलों द्वारा आक्रमण किया गया। जिसका भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब दिया गया। इस युद्ध का अंत [[१० जनवरी|10 जनवरी]], [[१९६६|1966]] को भारत और पाकिस्तान के बीच [[ताशकन्द समझौता|ताशकंद समझौते]] के बाद हुआ।
 
=== राजनैतिक समेकन ===
* '''1953''' : [[शेख़ अब्दुल्ला|शेख अब्दुल्ला]] को कश्मीर के प्रधानमन्त्री पद से हटा कर ग्यारह वर्ष के लिए जेल में डाल दिया गया। ऐसा माना जाता है कि केंद्र सरकार से अनबन की वजह से नेहरु ने इन्हें जेल में डलवाया था।
 
* '''१९५४''' : [[भारतीय संविधान का 35अ अनुच्छेद|धारा 35A]] भारत के राष्ट्रपति के आदेश से अस्तित्व में आयी।
* '''१९६५''' : '''सदर-ए-रियासत''' का नाम बदलकर 'मुक्यमन्त्री' किया गया।
 
* राज्य विधान सभा के लिए [[मार्च]], [[१९६७|1967]] में तीसरे आम चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस सरकार बनी
 
* [[फ़रवरी|फरवरी]], [[१९७२|1972]] में चौथे आम चुनाव हुए जिनमें पहली बार जमात-ए-इस्लामी ने भाग लिया व 5 सीटें जीती। इन चुनावों में भी कांग्रेस सरकार बनी।
 
* भारत और पाकिस्तान के बीच [[३ जुलाई|3 जुलाई]], [[१९७२|1972]] को ऐतिहासिक '[[शिमला समझौता]]' हुआ, जिसमें कश्मीर पर सभी पिछली उद्धोषणाएँ समाप्त की गईं, जम्मू और कश्मीर से संबंधित सारे मुद्दे द्विपक्षीय रूप से निपटाए गए, व - युद्ध विराम रेखा को नियंत्रण रेखा में बदला गया।
 
* '''1974''' : इंदिरा-शेख समझौता हुआ, जिसके अंतर्गत शेख अब्दुल्ला को जम्मू कश्मीर का मुख्यमंत्री बनाया गया। इस वर्ष ये भी निर्णय किया गया कि अब कश्मीर में [[जनमत-संग्रह|जनमत संग्रह]] की जरुरत नहीं है।
 
* [[फ़रवरी|फरवरी]], [[१९७५|1975]] को कश्मीर समझौता समाप्त माना गया, व भारत के प्रधानमंत्री के अनुसार 'समय पीछे नहीं जा सकता'; तथा कश्मीरी नेतृत्व के अनुसार- 'जम्मू और कश्मीर राज्य का भारत में अधिमिलन कोई मामला नहीं' कहा गया।
 
* [[जुलाई]], [[१९७५|1975]] में शेख अब्दुल्ला मुख्य मंत्री बने, जनमत फ्रंट स्थापित और नेशनल कांफ्रेंस के साथ विलय किया गया।
 
* [[जुलाई]], [[१९७७|1977]] को पाँचवे आम चुनाव हुए जिनमें नेशनल कांफ्रेंस पुन: सत्ता में लौटी - 68% मतदाता उपस्थित हुए।
 
* शेख अब्दुल्ला का निधन [[८ सितम्बर|8 सितम्बर]], [[१९८२|1982]] होने पर, उनके पुत्र डॉ॰ फारूख अब्दुल्ला ने अंतरिम मुख्य मंत्री की शपथ ली व छठे आम चुनावों में [[जून]],[[१९८३|1983]] में नेशनल कांफ्रेंस को विजय मिली।
 
* '''1984''' : इस वर्ष भारतीय सेना ने दुनिया के सबसे बड़े और ऊँचे [[ग्लेसियर]] और युद्द के मैदान ([[सियाचिन हिमनद|सियाचीन]]) को अपने कब्जे में कर लिया। इस समय भारतीय सेना को ऐसी खबर मिली थी कि पाकिस्तान सियाचिन पर अधिकार कर रहा है। इस कारण भारत ने भी चढ़ाई शुरू की और पाकिस्तान से पहले वहाँ पहुंच गया। सियाचिन भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
 
* '''1987''' में कश्मीर विधानसभा के चुनाव के दौरान [[नेशनल कांफ्रेंस]] और [[भारतीय राष्त्रीय कांग्रेस]] ने मिलकर बहुत भारी गड़बड़ी की और वहाँ इन्होने चुनाव जीता। चुनाव में बहुत भारी संख्या में जीते जाने पर दोनों पार्टियों के विरुद्ध काफ़ी प्रदर्शन हुए और धीरे-धीरे ये प्रदर्शन आक्रामक और हिंसक हो गया। इस हिंसक प्रदर्शनों का फायदा उठाकर पाकिस्तान ने इन्हीं प्रदर्शनकारियों में अपने हिज्ब उल मुजाहिद्दीन जैसे आतंकवादी संगठन और जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के अलगाववादियों को शामिल कर दिया। बाद में युवा कश्मीरियों को सीमा पार भेज कर उन्हें आतंकी ट्रेनिंग दी जाने लगी। इस तरह के सभी आतंकी गतिविधियों को आईएसआई और अन्य विभिन्न संगठनों का समर्थन प्राप्त था।
* '''२००३''' में भारत और पाकिस्तान के बीच एलओसी सीजफायर अग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए जिसके तहत एलओसी पर गोलीबारी और घुसपैठ कम करने की बातें थीं।
 
* '''२०१८''' : [[भारतीय जनता पार्टी|भाजपा]] और [[जम्मू और कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी|पीडीपी]] की सम्मिलित सरकार गिरी। राष्ट्रपति शासन लागू।
 
* '''५ अगस्त २०१९''' : कश्मीर से '''[[अनुच्छेद ३७०|धारा ३७०]]''' समाप्त करने के लिए विधेयक पारित हुआ। उस दिन [[राज्य सभा|राज्यसभा]] में गृहमंत्री [[अमित शाह]] ने मोर्चा संभाला और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की सिफारिश तथा राज्य के पुनर्गठन का बिल पेश कर दिया। इसके साथ ही पहले से ही तैयार बैठी सरकार ने कश्मीर घाटी के राजनीतिक नेताओं को नजरबंद किया गया, इंटरनेट सहित अन्य संचार सेवाएं रोक दी गईं और पूरे राज्य में [[धारा 144]] लागू कर दी गई। कई अलगाववादी नेताओं को इससे पहले ही नजरबंद किया जा चुका था। राज्य पुनर्गठन बिल में जम्मू-कश्मीर राज्य को दो [[केंद्रशासित प्रदेश|केंद्र शासित प्रदेशों]] में बांटने का प्रस्ताव था (एक लद्दाख तथा दूसरा जम्मू-कश्मीर)। राज्यसभा में इसके पक्ष में 125 वोट पड़े जबकि विपक्ष में 61। यह बिल अगले दिन [[लोक सभा|लोकसभा]] में भी भारी बहुमत से पारित हो गया।
 
* '''३१ अक्टूबर २०१९''' : [[वल्लभ भाई पटेल|सरदार पटेल]] की पुण्यतिथि को 'जम्मू-कश्मीर' तथा 'लद्दाख' नाम से दो केन्द्रशासित प्रदेश बन जाएँगें।
 
== इन्हें भी देखें ==
* [[राजतरंगिणी]]
* [[ललितादित्य मुक्तपीड|ललितादित्य]]
* [[अनुच्छेद ३७०|धारा-370]]
* [[जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019|जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, २०१९]]
* [[कश्मीर]]
 
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