"इन्दिरा गांधी" के अवतरणों में अंतर

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|image =Indira Gandhi in 1967.jpg
|imagesize = 200px
|office = [[भारत केका प्रधान मंत्रीप्रधानमन्त्री|भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री]]
|president = [[नीलम संजीव रेड्डी]]<br />[[ज़ैल सिंह|ज्ञानी जैल सिंह]]
|term_start = 14 जनवरी 1980
|term_end = 31 अक्टूबर 1984
|predecessor = [[चौधरी चरण सिंह]]
|successor = [[राजीव गांधी|राजीव गाँधी]]
|president2 = [[सर्वेपल्लि राधाकृष्णन|सर्वपल्ली राधाकृष्णन]]<br />[[ज़ाकिर हुसैन (राजनीतिज्ञ)|ज़ाकिर हुसैन]]<br />[[वी॰ वी॰ गिरि|वराहगिरी वेंकट गिरी]] <small>(कार्यवाहक)</small><br />[[मुहम्मद हिदायतुल्लाह|मोहम्मद हिदायतुल्ला]] <small>(कार्यवाहक)</small><br />[[वी॰ वी॰ गिरि|वराहगिरी वेंकट गिरी]]<br />[[फ़ख़रुद्दीन अली अहमद]]<br />[[बासप्पा दनप्पा जत्ती]] <small>(कार्यवाहक)</small>
|deputy2 = [[मोरारजी देसाई]]
|term_start2 = 24 जनवरी 1966
|term_end2 = 24 मार्च 1977
|predecessor2 = [[गुलज़ारीलाल नन्दा|गुलजारीलाल नन्दा]] <small>(कार्यवाहक)</small>
|successor2 = [[मोरारजी देसाई]]
|office3 = [[भारत के विदेश मंत्री|भारत की विदेश मंत्री]]
|term_start3 = 9 मार्च 1984
|term_end3 = 31 अक्टूबर 1984
|predecessor3 = [[पी॰ वी॰ नरसिम्हा राव|नरसिंह राव]]
|successor3 = [[राजीव गांधी|राजीव गाँधी]]
|term_start4 = 22 अगस्त 1967
|term_end4 = 14 मार्च 1969
|predecessor4 = [[एम. सी. छागला|महोम्मेदाली करीम चागला]]
|successor4 = [[दिनेश सिंह]]
|office5 = [[भारत के रक्षा मंत्री|भारत की रक्षा मंत्री]]
|term_start7 = 27 जून 1970
|term_end7 = 4 फ़रवरी 1973
|predecessor7 = [[यशवंतराव चव्हाण|यशवंतराव चौहान]]
|successor7 = [[उमाशंकर दीक्षित]]
|office8 = [[भारत के वित्त मंत्री|भारत की वित्त मंत्री]]
|term_end8 = 27 जून 1970
|predecessor8 = [[मोरारजी देसाई]]
|successor8 = [[यशवंतराव चव्हाण|यशवंतराव चौहान]]
|birth_date = {{birth date|1917|11|19|df=y}}
|birth_place = [[इलाहाबाद]], [[ब्रिटिश राज|ब्रिटिश भारत]]
|death_place = [[नई दिल्ली]], [[भारत]]
|party = [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]
|spouse = [[फिरोज़ गांधी|फिरोज गांधी]]
|relations = [[जवाहरलाल नेहरू]] (पिता)<br /> [[कमला नेहरू]] (माता)
|children = [[राजीव गाँधीगांधी|राजीव]]<br />[[संजय गांधी|संजय]]
|alma_mater = [[सोमरविल कॉलेज, ऑक्सफोर्ड]]
|religion = [[हिन्दू धर्म|हिन्दू]]
 
[[चित्र:Gandhi and Indira 1924.jpg|thumb|right|युवा इन्दिरा नेहरू और [[महात्मा गांधी]] एक अनशन के दौरान]]
'''इन्दिरा प्रियदर्शिनी गाँधी''' (जन्म उपनाम: नेहरू) ([[१९ नवम्बर|19 नवंबर]] [[१९१७|1917-]]-[[३१ अक्टूबर|31 अक्टूबर]] [[१९८४|1984]]) वर्ष 1966 से 1977 तक लगातार 3 पारी के लिए भारत गणराज्य की [[प्रधानमन्त्री]] रहीं और उसके बाद चौथी पारी में 1980 से लेकर 1984 में उनकी राजनैतिक हत्या तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं। वे [[भारत]] की प्रथम और अब तक एकमात्र महिला प्रधानमंत्री रहीं।
 
== प्रारंभिक जीवन और करीअर ==
[[चित्र:Nehru family.jpg|thumb|left|300px|'''नेहरू परिवार''' [[मोतीलाल नेहरू]] बीच में बैठे हैं और खड़े हैं (बायें से दाएँ) [[जवाहरलाल नेहरू]],[[विजयालक्ष्मी पंडित]], [[कृष्णा हठीसिंह|कृष्णा हथिसिंघ]], इंदिरा और रंजित पंडित, बैठे हैं : स्वरुप रानी, मोतीलाल नेहरू और [[कमला नेहरू]] (लगभग सन् 1927)]]
[[चित्र:The marriage ceremony of Feroze Gandhi and Indira Gandhi, March 26, 1942 at Anand Bhawan, Allahabad.jpg|right|300px|thumb|१९४२ में '''इन्दिरा''' और '''फिरोज''' का विवाह ; यह विवाह न तो परम्परागत था न ही कानूनी विवाह था।]]
इन्दिरा का जन्म 19 नवम्बर 1917 को राजनीतिक रूप से प्रभावशाली [[नेहरू-गांधीनेहरू–गांधी परिवार|नेहरू परिवार]] में हुआ था।<ref>{{cite web|url=https://blogs.timesofindia.indiatimes.com/bloody-mary/19th-november-2017-100-years-of-indira-gandhi-she-was-the-mother-of-every-indian-supremo/|title=19th November 2017: 100 years of Indira Gandhi. She was the mother of every Indian supremo}}</ref> इनके पिता [[जवाहरलाल नेहरू]] और इनकी माता [[कमला नेहरू]] थीं।
 
इन्दिरा को उनका "गांधी" उपनाम [[फिरोजफिरोज़ गांधी|फिरोज़ गाँधी]] से [[विवाह]] के पश्चात मिला था।<ref>[http://hindi.webdunia.com/national-hindi-news/indira-gandhi-former-india-pm-firoge-gandhi-115062500010_1.html इंदिरा इस तरह बनीं गांधी, पढ़ें पूरी कहानी...] (वेबदुनिया)</ref> इनका [[महात्मा गांधी|मोहनदास करमचंद गाँधी]] से न तो खून का और न ही शादी के द्वारा कोई रिश्ता था। इनके पितामह [[मोतीलाल नेहरू]] एक प्रमुख भारतीय राष्ट्रवादी नेता थे। इनके पिता [[जवाहरलाल नेहरू]] भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के एक प्रमुख व्यक्तित्व थे और आज़ाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री रहे।
 
1934–35 में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के पश्चात, इन्दिरा ने [[शान्तिनिकेतन]] में [[रबीन्द्रनाथ ठाकुर|रवीन्द्रनाथ टैगोर]] द्वारा निर्मित [[विश्व-भारती विश्वविद्यालय]] में प्रवेश लिया। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ही इन्हे "प्रियदर्शिनी" नाम दिया था। इसके पश्चात यह इंग्लैंड चली गईं और [[ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय|ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय]] की प्रवेश परीक्षा में बैठीं, परन्तु यह उसमे विफल रहीं और [[ब्रिस्टल]] के [[बैडमिंटन स्कूल]] में कुछ महीने बिताने के पश्चात, 1937 में परीक्षा में सफल होने के बाद इन्होने [[सोमरविल कॉलेज, ऑक्सफोर्ड]] में दाखिला लिया। इस समय के दौरान इनकी अक्सर फिरोज़ गाँधी से मुलाकात होती थी, जिन्हे यह [[इलाहाबाद]] से जानती थीं और जो [[लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स]] में अध्ययन कर रहे थे। अंततः 16 मार्च 1942 को आनंद भवन, इलाहाबाद में एक निजी आदि धर्म [[ब्रह्म]]-[[वेद|वैदिक]] समारोह में इनका विवाह फिरोज़ से हुआ।
 
[[ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय|ऑक्सफोर्ड]] से वर्ष 1941 में भारत वापस आने के बाद वे [[भारतीय स्वतंत्रता संग्राम|भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन]] में शामिल हो गयीं।
 
1950 के दशक में वे अपने पिता के भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल के दौरान गैरसरकारी तौर पर एक निजी सहायक के रूप में उनके सेवा में रहीं। अपने पिता की मृत्यु के बाद सन् 1964 में उनकी नियुक्ति एक [[राज्य सभा|राज्यसभा]] सदस्य के रूप में हुई। इसके बाद वे [[लालबहादुर शास्त्री]] के मंत्रिमंडल में सूचना और प्रसारण मत्री बनीं।<ref>गाँधी, इंदिरा .1982 ''माई ट्रूथ / मेरी सच्चाई ''</ref>
 
[[लालबहादुर शास्त्री]] के आकस्मिक निधन के बाद तत्कालीन [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|काँग्रेस पार्टी]] अध्यक्ष [[के. कामराज]] इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनाने में निर्णायक रहे। गाँधी ने शीघ्र ही चुनाव जीतने के साथ-साथ [[जनप्रियता]] के माध्यम से विरोधियों के ऊपर हावी होने की योग्यता दर्शायी। वह अधिक बामवर्गी आर्थिक नीतियाँ लायीं और कृषि उत्पादकता को बढ़ावा दिया। [[१९७१ का भारत-पाक युद्ध|1971 के भारत-पाक युद्ध]] में एक निर्णायक जीत के बाद की अवधि में अस्थिरता की स्थिती में उन्होंने सन् 1975 में [[आपातकाल (भारत)|आपातकाल]] लागू किया। उन्होंने एवं काँग्रेस पार्टी ने 1977 के आम चुनाव में पहली बार हार का सामना किया। सन् 1980 में सत्ता में लौटने के बाद वह अधिकतर [[पंजाब (भारत)|पंजाब]] के [[अलगाववाद|अलगाववादियों]] के साथ बढ़ते हुए द्वंद्व में उलझी रहीं जिसमे आगे चलकर सन् 1984 में अपने ही अंगरक्षकों द्वारा उनकी राजनैतिक हत्या हुई।
 
== प्रारम्भिक जीवन ==
इन्दिरा का जन्म [[१९ नवम्बर|19 नवंबर]], [[1917१९१७|सन् 1917]] में पंडित जवाहरलाल नेहरू और उनकी पत्नी [[कमला नेहरू]] के यहाँ हुआ। वे उनकी एकमात्र संतान थीं। नेहरू परिवार अपने पुरखों का खोंज [[जम्मू और कश्मीर]] तथा [[दिल्ली]] के[[ब्राह्मण|ब्राह्मणों]] में कर सकते हैं। इंदिरा के पितामह [[मोतीलाल नेहरू]] [[उत्तर प्रदेश]] के [[इलाहाबाद]] से एक धनी बैरिस्टर थे। जवाहरलाल नेहरू पूर्व समय में [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] के बहुत प्रमुख सदस्यों में से थे। उनके पिता मोतीलाल नेहरू [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन|भारतीय स्वतंत्रता संग्राम]] के एक लोकप्रिय नेता रहे। इंदिरा के जन्म के समय [[महात्मा गांधी]] के नेतृत्व में जवाहरलाल नेहरू का प्रवेश स्वतन्त्रता आन्दोलन में हुआ।
 
उनकी परवरिश अपनी माँ की सम्पूर्ण देखरेख में, जो बीमार रहने के कारण नेहरू परिवार के गृह सम्बन्धी कार्यों से अलग रही, होने से इंदिरा में मजबूत सुरक्षात्मक प्रवृत्तिओं के साथ साथ एक निःसंग व्यक्तित्व विकसित हुआ। उनके पितामह और पिता का लगातार राष्ट्रीय राजनीती में उलझते जाने ने भी उनके लिए साथिओं से मेलजोल मुश्किल कर दिया। उनकी अपनी बुओं (पिता की बहनों) के साथ जिसमे [[विजयाल्क्ष्मी पंडित]] भी थीं, मतविरोध रही और यह राजनैतिक दुनिया में भी चलती रही।
 
इन्दिरा ने युवा लड़के-लड़कियों के लिए [[वानर सेना]] बनाई, जिसने विरोध प्रदर्शन और झंडा जुलूस के साथ साथ कांगेस के नेताओं की मदद में संवेदनशील प्रकाशनों तथा प्रतिबंधित सामग्रीओं का परिसंचरण कर [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन|भारतीय स्वतंत्रता संग्राम]] में छोटी लेकिन उल्लेखनीय भूमिका निभाई थी। प्रायः दोहराए जानेवाली कहानी है कि उन्होंने पुलिस की नजरदारी में रहे अपने पिता के घर से बचाकर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज, जिसमे 1930 दशक के शुरुआत की एक प्रमुख क्रांतिकारी पहल की योजना थी, को अपने स्कूलबैग के माध्यम से बहार उड़ा लिया था।
 
सन् 1936 में उनकी माँ कमला नेहरू [[यक्ष्मा|तपेदिक]] से एक लंबे संघर्ष के बाद अंततः स्वर्गवासी हो गईं। इंदिरा तब 18 वर्ष की थीं और इस प्रकार अपने बचपन में उन्हें कभी भी एक स्थिर पारिवारिक जीवन का अनुभव नहीं मिल पाया था। उन्होंने प्रमुख भारतीय, यूरोपीय तथा ब्रिटिश स्कूलों में अध्यन किया, जैसे[[शान्तिनिकेतन]], [[बैडमिंटन स्कूल]] और[[ऑक्सफ़ोर्ड|ऑक्सफोर्ड]]।
 
1930 दशक के अन्तिम चरण में [[ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय]], [[इंग्लैण्ड|इंग्लैंड]] के [[सोमरविल्ले कॉलेज]] में अपनी पढ़ाई के दौरान वे लन्दन में आधारित स्वतंत्रता के प्रति कट्टर समर्थक [[भारतीय लीग]] की सदस्य बनीं।<ref>फ्रैंक, कैथेराइन (2001)''इंदिरा :इंदिरा नेहरू गांधी की जीवनी''</ref>
 
महाद्वीप यूरोप और ब्रिटेन में रहते समय उनकी मुलाक़ात एक [[पारसी]] कांग्रेस कार्यकर्ता, [[फिरोज़ गांधी|फिरोज़ गाँधी]] से हुई और अंततः १६ मार्च १९४२ को आनंद भवन [[इलाहाबाद]] में एक निजी [[आदि धर्मं]] [[ब्रह्म]]-वैदिक समारोह में उनसे विवाह किया<ref>"इंदिरा :इंदिरा नेहरू गांधी की जीवनी - केथरीन फ्रंक्स 2002 पन्ना 177 आईएसबीएन:039573097X"</ref> ठीक[[भारत छोडो आन्दोलन]] की शुरुआत से पहले जब [[महात्मा गांधी]] और कांग्रेस पार्टी द्वारा चरम एवं पुरजोर राष्ट्रीय विद्रोह शुरू की गई। सितम्बर 1942 में वे ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार की गयीं और बिना कोई आरोप के हिरासत में डाल दिये गये थे। अंततः 243 दिनों से अधिक जेल में बिताने के बाद उन्हें [[१३ मई]] [[१९४३|1943]] को रिहा किया गया।<ref>फ्रैंक, केथरीन (2001)''इंदिरा:इंदिरा नेहरू गाँधी''की जीवनी.पन्ना 186</ref> 1944 में उन्होंने फिरोज गांधी के साथ [[राजीव गांधी]]और इसके दो साल के बाद [[संजय गांधी|संजय गाँधी]] को जन्म दिया।
 
सन् 1947 के [[भारत का विभाजन|भारत विभाजन]] अराजकता के दौरान उन्होंने शरणार्थी शिविरों को संगठित करने तथा पाकिस्तान से आये लाखों शरणार्थियों के लिए चिकित्सा सम्बन्धी देखभाल प्रदान करने में मदद की। उनके लिए प्रमुख सार्वजनिक सेवा का यह पहला मौका था।
 
गांधीगण बाद में [[इलाहाबाद]] में बस गये, जहाँ फिरोज ने एक कांग्रेस पार्टी समाचारपत्र और एक बीमा कंपनी के साथ काम किया। उनका वैवाहिक जीवन प्रारम्भ में ठीक रहा, लेकिन बाद में जब इंदिरा अपने पिता के पास [[नई दिल्ली]] चली गयीं, उनके प्रधानमंत्रित्व काल में जो अकेले तीन मूर्ति भवन में एक उच्च मानसिक दबाव के माहौल में जी रहे थे, वे उनकी विश्वस्त, सचिव और नर्स बनीं। उनके बेटे उसके साथ रहते थे, लेकिन वो अंततः फिरोज से स्थायी रूप से अलग हो गयीं, यद्यपि विवाहित का तगमा जुटा रहा।
जब भारत का पहला आम चुनाव 1951 में समीपवर्ती हुआ, इंदिरा अपने पिता एवं अपने पती जो [[राय बरेली|रायबरेली]] निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़रहे थे, दोनों के प्रचार प्रबंध में लगी रही। फिरोज अपने प्रतिद्वंदिता चयन के बारे में नेहरू से सलाह मशविरा नहीं किया था और यद्दपि वह निर्वाचित हुए, दिल्ली में अपना अलग निवास का विकल्प चुना। फिरोज ने बहुत ही जल्द एक राष्ट्रीयकृत बीमा उद्योग में घटे प्रमुख घोटाले को उजागर कर अपने [[राजनैतिक भ्रष्टाचार]] के विरुद्ध लड़ाकू होने की छबि को विकसित किया, जिसके परिणामस्वरूप नेहरू के एक सहयोगी, वित्त मंत्री, को इस्तीफा देना पड़ा।
 
तनाव की चरम सीमा की स्थिति में इंदिरा अपने पती से अलग हुईं। हालाँकि सन् 1958 में उप-निर्वाचन के थोड़े समय के बाद फिरोज़ को दिल का दौरा पड़ा, जो नाटकीय ढ़ंग से उनके टूटे हुए वैवाहिक वन्धन को चंगा किया। [[कश्मीर]] में उन्हें स्वास्थोद्धार में साथ देते हुए उनकी परिवार निकटवर्ती हुई। परन्तु [[८ सितम्बर|8 सितम्बर]],[[१९६०|1960]] को जब इंदिरा अपने पिता के साथ एक विदेश दौरे पर गयीं थीं, फिरोज़ की मृत्यु हुई।
 
== भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष ==
1959 और 1960 के दौरान इंदिरा चुनाव लड़ीं और [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] की अध्यक्ष चुनी गयीं। उनका कार्यकाल घटनाविहीन था। वो अपने पिता के कर्मचारियों के प्रमुख की भूमिका निभा रहीं थीं।
 
नेहरू का देहांत [[२७ मई|27 मई]], [[१९६४|1964]] को हुआ और इंदिरा नए प्रधानमंत्री [[लालबहादुर शास्त्री|लाल बहादुर शास्त्री]] के प्रेरणा पर चुनाव लड़ीं और तत्काल सूचना और प्रसारण मंत्री के लिए नियुक्त हो, सरकार में शामिल हुईं। हिन्दी के राष्ट्रभाषा बनने के मुद्दे पर दक्षिण के गैर हिन्दीभाषी राज्यों में दंगा छिड़ने पर वह [[चेन्नई]] गईं। वहाँ उन्होंने सरकारी अधिकारियों के साथ विचारविमर्श किया, समुदाय के नेताओं के गुस्से को प्रशमित किया और प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण प्रयासों की देखरेख की। शास्त्री एवं वरिष्ठ मंत्रीगण उनके इस तरह के प्रयासों की कमी के लिए शर्मिंदा थे। मंत्री गांधी के पदक्षेप सम्भवत सीधे शास्त्री के या अपने खुद के राजनैतिक ऊंचाई पाने के उद्देश्य से नहीं थे। कथित रूप से उनका मंत्रालय के दैनिक कामकाज में उत्साह का अभाव था लेकिन वो संवादमाध्यमोन्मुख तथा राजनीति और छबि तैयार करने के कला में दक्ष थीं।
 
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जब [[भारत१९६५ पाकिस्तानका के बीच द्वितीयभारत-पाक युद्ध|1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध चल रहा था]], इंदिरा [[श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर|श्रीनगर]] सीमा क्षेत्र में उपस्थित थी। हालांकि सेना ने चेतावनी दी थी कि पाकिस्तानी अनुप्रवेशकारी शहर के बहुत ही करीब तीब्र गति से पहुँच चुके हैं, उन्होंने अपने को [[जम्मू]] या [[दिल्ली]] में पुनःस्थापन का प्रस्ताव नामंजूर कर दिया और उल्टे स्थानीय सरकार का चक्कर लगाती रहीं और संवाद माध्यमों के ध्यानाकर्षण को स्वागत किया। [[ताशकन्द|ताशकंद]] में सोवियत मध्यस्थता में पाकिस्तान के [[अयूब ख़ान|अयूब खान]] के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ घंटे बाद ही लालबहादुर शास्त्री का निधन हो गया।
 
तब कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष [[के. कामराज]] ने शास्त्री के आकस्मिक निधन के बाद इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
 
=== विदेश तथा घरेलू नीति एवं राष्ट्रिय सुरक्षा ===
सन् 1966 में जब श्रीमती गांधी प्रधानमंत्री बनीं, कांग्रेस दो गुटों में विभाजित हो चुकी थी, श्रीमती गांधी के नेतृत्व में [[समाजवाद|समाजवादी]] और [[मोरारजी देसाई]] के नेतृत्व में [[रूढ़िवाद|रूढीवादी]]। [[मोरारजी देसाई]] उन्हें "गूंगी गुड़िया" कहा करते थे। 1967 के चुनाव में आंतरिक समस्याएँ उभरी जहां कांग्रेस लगभग 60 सीटें खोकर 545 सीटोंवाली [[लोक सभा]] में 297 आसन प्राप्त किए। उन्हें देसाई को भारत के [[भारत के उप प्रधानमंत्री]] और [[भारत के वित्त मंत्री|वित्त मंत्री]] के रूप में लेना पड़ा। 1969 में देसाई के साथ अनेक मुददों पर असहमति के बाद [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] विभाजित हो गयी। वे समाजवादियों एवं साम्यवादी दलों से समर्थन पाकर अगले दो वर्षों तक शासन चलाई। उसी वर्ष जुलाई 1969 को उन्होंने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। 1971 में बांग्लादेशी शरणार्थी समस्या हल करने के लिए उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान की ओर से, जो अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे थे, [[पाकिस्तान]] पर युद्ध घोषित कर दिया। 1971 के युद्ध के दौरान राष्ट्रपति [[रिचर्ड मिल्हौस निक्सन|रिचर्ड निक्सन]] के अधीन अमेरिका अपने [[सातवें बेड़े]] को भारत को पूर्वी पाकिस्तान से दूर रहने के लिए यह वजह दिखाते हुए कि पश्चिमी पाकिस्तान के खिलाफ एक व्यापक हमला विशेष रूप से[[कश्मीर]] के सीमाक्षेत्र के मुद्दे को लेकर हो सकती है, चेतावनी के रूप में [[बंगाल की खाड़ी]]में भेजा। यह कदम प्रथम विश्व से भारत को विमुख कर दिया था और प्रधानमंत्री गांधी ने अब तेजी के साथ एक पूर्व सतर्कतापूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति को नई दिशा दी। भारत और सोवियत संघ पहले ही [[मित्रता तथा आपसी सहयोग संधि|मित्रता और आपसी सहयोग]] संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके परिणामस्वरूप 1971 के युद्ध में भारत की जीत में राजनैतिक और सैन्य समर्थन का पर्याप्त योगदान रहा।
 
=== परमाणु कार्यक्रम ===
लेकिन, [[चीनी जनवादी गणराज्य चीन|जनवादी चीन गणराज्य से]] परमाणु खतरे तथा दो प्रमुख महाशक्तियों की दखलंदाजी में रूचि भारत की स्थिरता और सुरक्षा के लिए अनुकूल नहीं महसूस किए जाने के मद्दे नजर, गांधी का अब एक राष्ट्रीय परमाणु कार्यक्रम था। उन्होंने नये पाकिस्तानी राष्ट्रपति [[ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो|ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो]] को एक सप्ताह तक चलनेवाली [[शिमला]] शिखर वार्ता में आमंत्रित किया था। वार्ता के विफलता के करीब पहुँच दोनों राज्य प्रमुख ने अंततः [[शिमला समझौता|शिमला समझौते]] पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत [[कश्मीर]] विवाद को वार्ता और शांतिपूर्ण ढंग से मिटाने के लिए दोनों देश अनुबंधित हुए।
 
कुछ आलोचकों द्वारा नियंत्रण रेखा को एक स्थायी सीमा नहीं बानाने पर इंदिरा गांधी की आलोचना की गई जबकि कुछ अन्य आलोचकों का विश्वास था की पाकिस्तान के 93,000 [[युद्ध-बन्दी|युद्धबंदी]] भारत के कब्जे में होते हुए [[पाकिस्तान शासितआज़ाद कश्मीर|पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर]] को [[पाकिस्तान]] के कब्जे से निकाल लेना चाहिए था। लेकिन यह समझौता [[संयुक्त राष्ट्र]] तथा किसी तीसरे पक्ष के तत्काल हस्तक्षेप को निरस्त किया एवं निकट भविष्य में [[पाकिस्तान]] द्वारा किसी बड़े हमले शुरू किए जाने की सम्भावना को बहुत हद तक घटाया। भुट्टो से एक संवेदनशील मुद्दे पर संपूर्ण आत्मसमर्पण की मांग नहीं कर उन्होंने पाकिस्तान को स्थिर और सामान्य होने का मौका दिया।
 
वर्षों से ठप्प पड़े बहुत से संपर्कों के मध्यम से व्यापार संबंधों को भी पुनः सामान्य किया गया।
 
[[मुस्कुराते बुद्ध|स्माइलिंग बुद्धा]] के अनौपचारिक छाया नाम से 1974 में भारत ने सफलतापूर्वक एक भूमिगत परमाणु परीक्षण [[राजस्थान]] के रेगिस्तान में बसे गाँव [[पोखरण]] के करीब किया। शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परीक्षण का वर्णन करते हुए भारत दुनिया की सबसे नवीनतम परमाणु शक्तिधर बन गया।
 
=== हरित क्रांति ===
[[चित्र:Indira and Nixon.JPG|thumb|right|220px|1971 में [[रिचर्ड मिल्हौस निक्सन|रिचर्ड निक्सन]] और इंदिरा गाँधी। उनके बिच गहरा ब्याक्तिगत विद्वेष था जिसका रंग द्विपक्षीय संबंधों में झलका।]]
1960 के दशक में विशेषीकृत अभिनव कृषि कार्यक्रम और सरकार प्रदत्त अतिरिक्त समर्थन लागु होने पर अंततः भारत में हमेशा से चले आ रहे खाद्द्यान्न की कमी को, मूलतः गेहूं, चावल, कपास और दूध के सन्दर्भ में, अतिरिक्त उत्पादन में बदल दिया। बजाय संयुक्त राज्य से खाद्य सहायता पर निर्भर रहने के - जहाँ के एक राष्ट्रपति जिन्हें श्रीमती गांधी काफी नापसंद करती थीं (यह भावना आपसी था: निक्सन को इंदिरा "चुड़ैल बुढ़िया" लगती थीं<ref>[http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/4633263.stm बीबीसी समाचार]</ref>), देश एक खाद्य निर्यातक बन गया। उस उपलब्धि को अपने वाणिज्यिक फसल उत्पादन के विविधीकरण के साथ ''[[भारत में हरित क्रांति (भारत)|हरित क्रांति]]'' के नाम से जाना जाता है। इसी समय दुग्ध उत्पादन में वृद्धि से आयी श्वेत क्रांति से खासकर बढ़ते हुए बच्चों के बीच कुपोषण से निबटने में मदद मिली। 'खाद्य सुरक्षा', जैसे कि यह कार्यक्रम जाना जाता है, 1975 के वर्षों तक श्रीमती गांधी के लिए समर्थन की एक और स्रोत रही।<ref>[http://indiaonestop.com/Greenrevolution.htm]</ref>
 
1960 के प्रारंभिक काल में संगठित हरित क्रांति गहन कृषि जिला कार्यक्रम (आईऐडिपि) का अनौपचारिक नाम था, जिसके तहत शहरों में रहनेवाले लोगों के लिए, जिनके समर्थन पर गांधी --यूँ की, वास्तव में समस्त भारतीय राजनितिक, गहरे रूपसे निर्भरशील रहे थे, प्रचुर मात्रा में सस्ते अनाज की निश्चयता मिली।<ref>Ibid. #3 पी.295</ref> यह कार्यक्रम चार चरणों पर आधारित था:
# नई और बेहतर मौजूदा बीज किस्मों को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहकारी अनुसंधान की प्रतिबद्धता
# भूमि अनुदान कॉलेजों के रूप में कृषि संस्थानों के विकास की वैज्ञानिक अवधारणा,<ref>किसान, बी.एच.<i>'हरित क्रांति' के परिप्रेक्ष्य में आधुनिक एशियाई अध्ययन, xx नंबर 1 (फरवरी, 1986) पन्ना.177</ref>
दस वर्षों तक चली यह कार्यक्रम गेहूं उत्पादन में अंततः तीनगुना वृद्धि तथा चावल में कम लेकिन आकर्षणीय वृद्धि लायी; जबकि वैसे अनाजों के क्षेत्र में जैसे[[बजड़ी|बाजरा]], [[चना]] एवं मोटे अनाज (क्षेत्रों एवं जनसंख्या वृद्धि के लिए समायोजन पर ध्यान रखते हुए) कम या कोई वृद्धि नहीं हुई--फिर भी इन क्षेत्रों में एक अपेक्षाकृत स्थिर उपज बरकरार रहे।
 
=== 1971 के चुनाव में विजय और द्वितीय कार्यकाल (1971- 1975) ===
 
=== एकछ्त्रवाद की ओर झुकाव ===
गाँधी पर पहले से ही [[सत्तावादी]] आचरण के आरोप लग चुके थे। उनकी मजबूत संसदीय बहुमत का व्यवहार कर, उनकी सत्तारूढ़ [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] ने संविधान में संशोधन कर केन्द्र और राज्यों के बीच के सत्ता संतुलन को बदल दिया था। उन्होंने दो बार विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों को "कानून विहीन तथा अराजक" घोषित कर संविधान के [[संविधान धारा 356|धारा 356]] के अंतर्गत [[राष्ट्रपति शासन]] लागु कर इनके नियंत्रण पर कब्जा किया था। इसके अलावा,[[संजय गांधी|संजय गाँधी]], जो निर्वाचित अधिकारियों की जगह पर गांधी के करीबी राजनैतिक सलाहकार बने थे, के बढ़ते प्रभाव पर, [[पि.एन.हक्सर]], उनकी क्षमता की ऊंचाई पर उठते समय, गाँधी के पूर्व सलाहाकार थे, ने अप्रसन्नता प्रकट की। उनके सत्तावाद शक्ति के उपयोग की ओर नये झुकाव को देखते हुए, [[जयप्रकाश नारायण]], [[सतेन्द्र नारायण सिन्हा]] और [[आचार्य जीवतराम कृपालानी]] जैसे नामी-गिरामी व्यक्तिओं और पूर्व-स्वतंत्रता सेनानियों ने उनके तथा उनके सरकार के विरुद्ध सक्रिय प्रचार करते हुए भारतभर का दौरा किया।
 
=== भ्रष्टाचार आरोप और चुनावी कदाचार का फैसला ===
'''{{मुख्य|उत्तर प्रदेश राज्य बनाम राज नारायण}}'''
[[राजनारायण|राज नारायण]] (जो बार बार [[रायबरेली संसदीय निर्वाचन क्षेत्र]] से लड़ते और हारते रहे थे) द्वारा दायर एक चुनाव याचिका में कथित तौर पर भ्रष्टाचार आरोपों के आधार पर [[१२ जून|12 जून]], [[१९७५|1975]] को [[इलाहाबाद उच्च न्यायालय]] ने इन्दिरा गांधी के [[लोक सभा]] चुनाव को रद्द घोषित कर दिया। इस प्रकार अदालत ने उनके विरुद्ध संसद का आसन छोड़ने तथा छह वर्षों के लिए चुनाव में भाग लेने पर प्रतिबन्ध का आदेश दिया। प्रधानमन्त्रीत्व के लिए लोक सभा ([[भारतीय संसद]] के निम्न सदन) या [[राज्य सभा]] (संसद के उच्च सदन) का सदस्य होना अनिवार्य है। इस प्रकार, यह निर्णय उन्हें प्रभावी रूप से कार्यालय से पदमुक्त कर दिया।
 
जब गांधी ने फैसले पर अपील की, राजनैतिक पूंजी हासिल करने को उत्सुक विपक्षी दलों और उनके समर्थक, उनके इस्तीफे के लिए, सामूहिक रूप से चक्कर काटने लगे। ढेरों संख्या में यूनियनों और विरोधकारियों द्वारा किये गये हरताल से कई राज्यों में जनजीवन ठप्प पड़ गया। इस आन्दोलन को मजबूत करने के लिए, [[जयप्रकाश नारायण]] ने पुलिस को निहत्थे भीड़ पर सम्भब्य गोली चलाने के आदेश का उलंघन करने के लिये आह्वान किया। कठिन आर्थिक दौर के साथ साथ जनता की उनके सरकार से मोहभंग होने से विरोधकारिओं के विशाल भीड़ ने संसद भवन तथा दिल्ली में उनके निवास को घेर लिया और उनके इस्तीफे की मांग करने लगे।
=== आपातकालीन स्थिति (1975-1977) ===
'''{{मुख्य|आपातकाल (भारत)}}'''
गाँधी ने व्यवस्था को पुनर्स्थापित करने के पदक्षेप स्वरुप, अशांति मचानेवाले ज्यादातर विरोधियों के गिरफ्तारी का आदेश दे दिया। तदोपरांत उनके मंत्रिमंडल और सरकार द्वारा इस बात की सिफारिश की गई की राष्ट्रपति [[फ़ख़रुद्दीन अली अहमद]] इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद फैले अव्यवस्था और अराजकता को देखते हुए [[आपातकालीन स्थिति]] की घोषणा करें। तदनुसार, अहमद ने आतंरिक अव्यवस्था के मद्देनजर [[२६ जून|26 जून]] [[१९७५|1975]] को संविधान की [[अनुच्छेद 352|धारा- 352]] के प्रावधानानुसार आपातकालीन स्थिति की घोषणा कर दी।
 
=== डिक्री द्वारा शासन / आदेश आधारित शासन ===
</blockquote>
 
यह भी आरोपित होता है कि वह आगे राष्ट्रपति अहमद के समक्ष वैसे [[आदेश|आध्यादेशों]] के जारी करने का प्रस्ताव पेश की जिसमे [[भारत कीभारतीय संसद|संसद]] में बहस होने की जरूरत न हो और उन्हें [[आदेश आधारित शासन]] की अनुमति रहे।
 
साथ ही साथ, गांधी की सरकार ने प्रतिवादिओं को उखाड़ फेंकने तथा हजारों के तादाद में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के गिरिफ्तारी और आटक रखने का एक अभियान प्रारम्भ किया;[[जग मोहन]] के पर्यवेक्षण में, जो की बाद में दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर रहे, [[जामा मस्जिद, दिल्ली|जामा मस्जिद]] के आसपास बसे बस्तियों के हटाने में संजय का हाथ रहा जिसमे कथित तौर पर हजारों लोग बेघर हुए और सैकड़ों मारे गये और इस तरह देश की राजधानी के उन भागों में सांप्रदायिक कटुता पैदा कर दी; और हजरों पुरुषों पर बलपूर्वक [[नसबंदी]] का परिवार नियोजन कार्यक्रम चलाया गया, जो प्रायश: बहुत निम्नस्तर से लागु किया गया था।
=== ओपरेशन ब्लू स्टार और हत्या ===
{{मुख्य|ऑपरेशन ब्लू स्टार}}
गांधी के बाद के वर्ष [[पंजाब (भारत)|पंजाब]] समस्याओं से जर्जर थे। सितम्बर 1981 में [[जरनैल सिंह भिंडरावाले]] का [[अलगाववादीअलगाववाद]] सिख आतंकवादी समूह सिख धर्म के पवित्रतम तीर्थ, [[हरिमन्दिर साहिब]] परिसर के भीतर तैनात हो गया। स्वर्ण मंदिर परिसर में हजारों नागरिकों की उपस्थिति के बावजूद गांधी ने आतंकवादियों का सफया करने के एक प्रयास में सेना को धर्मस्थल में प्रवेश करने का आदेश दिया। सैन्य और नागरिक हताहतों की संख्या के हिसाब में भिन्नता है। सरकारी अनुमान है चार अधिकारियों सहित उनासी सैनिक और 492 आतंकवादी; अन्य हिसाब के अनुसार, संभवत 500 या अधिक सैनिक एवं अनेक तीर्थयात्रियों सहित 3000 अन्य लोग गोलीबारी में फंसे.<ref>रामचंद्र गुहा''गाँधी के बाद भारत ''पन्ना 563</ref> जबकि सटीक नागरिक हताहतों की संख्या से संबंधित आंकडे विवादित रहे हैं, इस हमले के लिए समय एवं तरीके का निर्वाचन भी विवादास्पद हैं।
इन्दिरा गांधी के बहुसंख्यक अंगरक्षकों में से दो थे [[सतवंत सिंह]] और [[बेअन्त सिंह]], दोनों सिख.[[३१ अक्टूबर]] [[१९८४|1984]] को वे अपनी सेवा हथियारों के द्वारा 1, सफदरजंग रोड, नई दिल्ली में स्थित प्रधानमंत्री निवास के बगीचे में इंदिरा गांधी की राजनैतिक हत्या की। <ref name="ibn">http://khabar.ibnlive.in.com/news/115182/12/4 जब हिल उठा देशः इंदिरा गांधी की हत्या</ref> वो [[ग्रेट ब्रिटेन|ब्रिटिश]] अभिनेता [[पीटर उस्तीनोव]] को आयरिश टेलीविजन के लिए एक वृत्तचित्र फिल्माने के दौरान साक्षात्कार देने के लिए सतवंत और बेअन्त द्वारा प्रहरारत एक छोटा गेट पार करते हुए आगे बढ़ी थीं। इस घटना के तत्काल बाद, उपलब्ध सूचना के अनुसार, बेअंत सिंह ने अपने बगलवाले शस्त्र का उपयोग कर उनपर तीन बार गोली चलाई और सतवंत सिंह एक स्टेन कारबाईन का उपयोग कर उनपर बाईस चक्कर गोली दागे. उनके अन्य अंगरक्षकों द्वारा बेअंत सिंह को गोली मार दी गई और सतवंत सिंह को गोली मारकर [[गिरफ़्तारी|गिरफ्तार]] कर लिया गया।
 
गांधी को उनके सरकारी कार में अस्पताल पहुंचाते पहुँचाते रास्ते में ही दम तोड़ दीं थी, लेकिन घंटों तक उनकी मृत्यु घोषित नहीं की गई। उन्हें [[अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान]] में लाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उनका ऑपरेशन किया। उस वक्त के सरकारी हिसाब 29 प्रवेश और निकास घावों को दर्शाती है, तथा कुछ बयाने 31 बुलेटों के उनके शरीर से निकाला जाना बताती है। उनका अंतिम संस्कार [[३ नवम्बर|3 नवंबर]] को [[राजघाट समाधि परिसर|राज घाट]] के समीप हुआ और यह जगह [[शक्ति स्थल]] के रूप में जानी गई। उनके मौत के बाद, [[नई दिल्ली]] के साथ साथ भारत के अनेकों अन्य शहरों, जिनमे कानपुर, आसनसोल और इंदौर शामिल हैं, में सांप्रदायिक अशांति घिर गई और हजारों सिखों के मौत दर्ज किये गये। गांधी के मित्र और जीवनीकार [[पुपुल जयकर]], ऑपरेशन ब्लू स्टार लागू करने से क्या घटित हो सकती है इस सबध में इंदिरा के तनाव एवं पूर्व-धारणा पर आगे प्रकाश डालीं हैं।
 
== निजी जिंदगी ==
इन्दिरा ने [[फिरोज़ गांधी|फिरोज़ गाँधी]] से विवाह किया।<ref>{{cite web|url=https://www.dawn.com/news/1368925/two-daughters-and-sons-in-law|title=Jinnah and Nehru two bitter rivals given grief by their Parsi sons-in-law}}</ref> शुरू में [[संजय गांधी|संजय]] उनका वारिस चुना गया था, लेकिन एक उड़ान दुर्घटना में उनकी मृत्यु के बाद, उनकी माँ ने अनिच्छुक [[राजीव गांधी]] को पायलट की नौकरी परित्याग कर फरवरी 1981 में राजनीति में प्रवेश के लिए प्रेरित किया।
 
इन्दिरा मृत्यु के बाद राजिव गांधी प्रधानमंत्री बनें। मई 1991 में उनकी भी राजनैतिक हत्या, इसबार [[लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम]] के आतंकवादियों के हाथों हुई। राजीव की विधवा, [[सोनिया गांधी]] ने [[संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन]] को 2004 के [[लोक सभा]] निर्वाचन में एक आश्चर्य चुनावी जीत का नेतृत्व दिया।
* उनकी हत्या का जिक्र[[टॉम क्लेन्सि]] द्वारा अपने उपन्यास [[एक्जीक्यूटिव ऑर्डर्स]] में किया गया है।
* यद्यपि कहीं भी नाम का उल्लेख नहीं मिलता है, [[रोहिंतों मिस्त्री]] के ''[[ऐ फाईन बैलेंस]]'' में इंदिरा गांधी ही स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री है।
* [[सलमान रुश्दी|सलमान रुशदी]] के उपन्यास ''[[मिडनाइट्स चिल्ड्रेन|मिडनाइट्स चिल्ड्रन]]'' में इंदिरा, जिन्हें सारे उपन्यास में "दा विडो" बुलाया जाता है, स्वयं जिम्मेदार है अपने अविस्मरनीय चरित्र के पतन के लिए। इंदिरा गाँधी का यह चित्रण, इसमे उनके एवं उनकी नीतिओं, दोनों के रूखे प्रदर्शन से कुछ खेमों में विवादित है।
* [[शशि थरूर]] की ''[[दा ग्रेट इंडियन नोवेल]]'' में प्रिय [[दुर्योधन]] का चरित्र साफ़ साफ़ इंदिरा गाँधी को संदर्भित करता है।
* "[[आँधी|आंधी]]", [[गुलज़ार (गीतकार)|गुलज़ार]] द्वारा निर्देशित एक हिन्दी चलचित्र (फीचर फ़िल्म) है, जो आंशिक रूप से इंदिरा की जिंदगी के कुछ घटनाओं, विशेष रूप से उनकी ([[सुचित्रा सेन]] द्वारा फिल्माया गया) उनके पति के साथ कठिन सम्बन्ध ([[संजीव कुमार]] द्वारा फिल्माया गया), का काल्पनिक अनुकरण है।
* [[यन्न मार्टेल]] के ''[[लाइफ ऑफ़ पाई]]'' में 1970 के दशक के मध्य में भारत के राजनितिक माहौल का जिक्र करते समय "श्रीमती गाँधी" नाम से इंदिरा गाँधी का कई बार उल्लेख किया गया है।
 
 
== इन्हें भी देखें==
*[[फिरोज़ गांधी|फिरोज गांधी]]
*[[बांग्लादेश मुक्ति युद्ध]]
*[[उत्तर प्रदेश राज्य बनाम राज नारायण]]
*[[आपातकाल (भारत)]]
*[[1984 के सिख-विरोधी दंगे|१९८४ सिख विरोधी दंगे]]
*[[ऑपरेशन ब्लू स्टार]]
*[[वंशवाद]]
|PLACE OF BIRTH=[[Allahabad]], [[उत्तर प्रदेश]], [[भारत]]
|DATE OF DEATH={{death date|1984|10|31|mf=y}}
|PLACE OF DEATH=[[नई दिल्ली|New Delhi]], [[भारत]]
}}
{{authority control}}
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