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[[चित्र:Aristotle.jpg|thumb|200px|अरस्तु]] '''अरस्तु''' (384 ईपू – 322 ईपू) यूनानी दार्शनिक थे। वे [[प्लेटो]] के शिष्य व [[सिकंदर]] के गुरु थे। उनका जन्म [[स्टेगेरिया]] नामक नगर में हुआ था ।  अरस्तु ने [[भौतिक शास्त्र|भौतिकी]], [[आध्यात्मिकता|आध्यात्म]], [[काव्य|कविता]], [[नाटक]], [[संगीत]], [[तर्कशास्त्र]], [[राजनीति|राजनीति शास्त्र]], [[नीतिशास्त्र]], [[जीव विज्ञान]] सहित कई विषयों पर रचना की। अरस्तु ने अपने गुरु प्लेटो के कार्य को आगे बढ़ाया।
[[प्लेटो]], [[सुकरात]] और अरस्तु पश्चिमी दर्शनशास्त्र के सबसे महान दार्शनिकों में एक थे।  उन्होंने पश्चिमी [[दर्शनशास्त्र]] पर पहली व्यापक रचना की, जिसमें नीति, तर्क, विज्ञान, राजनीति और आध्यात्म का मेलजोल था।  [[भौतिक शास्त्र|भौतिक विज्ञान]] पर अरस्तु के विचार ने मध्ययुगीन शिक्षा पर व्यापक प्रभाव डाला और इसका प्रभाव [[पुनर्जागरण]] पर भी पड़ा।  अंतिम रूप से [[न्यूटन (इकाई)|न्यूटन]] के भौतिकवाद ने इसकी जगह ले लिया।
जीव विज्ञान उनके कुछ संकल्पनाओं की पुष्टि उन्नीसवीं सदी में हुई।  उनके तर्कशास्त्र आज भी प्रासांगिक हैं।  उनकी आध्यात्मिक रचनाओं ने मध्ययुग में इस्लामिक और यहूदी विचारधारा को प्रभावित किया और वे आज भी क्रिश्चियन, खासकर रोमन कैथोलिक चर्च को प्रभावित कर रही हैं।  उनके दर्शन आज भी उच्च कक्षाओं में पढ़ाये जाते हैं।
 अरस्तु ने अनेक रचनाएं की थी, जिसमें कई नष्ट हो गई। अरस्तु का राजनीति पर प्रसिद्ध ग्रंथ [[पोलिटिक्स]] है।<ref>भाषा विज्ञान, डा० [[भोलानाथ तिवारी]], किताब महल- दिल्ली, पन्द्रहवाँ संस्करण १९८१, पृष्ठ-४८१</ref>
 
== सिकंदर की शिक्षा ==
मकदूनिया के राजा फिलिप के निमन्त्रण पर वो उनके तेरह वर्षीय पुत्र को पढ़ाने लगे। पिता-पुत्र दोनों ही अरस्तु को बड़ा सम्मान देते थे। लोग यहाँ तक कहते थे कि अरस्तु को शाही दरबार से काफी धन मिलता है और हजारों गुलाम उनकी सेवा में रहते है हालांकि ये सब बातें निराधार थीं। [[सिकंदर महान|एलेक्जैंडर]] के राजा बनने के बाद अरस्तु का काम खत्म हो गया और वो वापस एथेंस आ गये। अरस्तु ने प्लेटोनिक स्कूल और प्लेटोवाद की स्थापना की। अरस्तु अक्सर प्रवचन देते समय टहलते रहते थे इसलिए कुछ समय बाद उनके अनुयायी पेरीपेटेटिक्स कहलाने लगे।
 
== अरस्तु और दर्शन ==
अरस्तु को खोज करना बड़ा अच्छा लगता था खासकर ऐसे विषयों पर जो मानव स्वभाव से जुड़े हों जैसे कि "आदमी को जब भी समस्या आती है वो किस तरह से इनका सामना करता है?” और "आदमी का दिमाग किस तरह से काम करता है?" समाज को लोगों से जोड़े रखने के लिए काम करने वाले प्रशासन में क्या ऐसा होना चाहिए जो सर्वदा उचित तरीके से काम करें। ऐसे प्रश्नों के उत्तर पाने के लिए अरस्तु अपने आस पास के माहौल पर प्रायोगिक रुख रखते हुए बड़े इत्मिनान के साथ काम करते रहते थे। वो अपने शिष्यों को सुबह सुबह विस्तृत रूप से और शाम को आम लोगों को साधारण भाषा में प्रवचन देते थे।
 
एलेक्सेंडर की अचानक मृत्यु पर मकदूनिया के विरोध के स्वर उठ खड़े हुए। उन पर नास्तिकता का भी आरोप लगाया गया। वो दंड से बचने के लिये चल्सिस चले गये और वहीं पर एलेक्सेंडर की मौत के एक साल बाद 62 वर्ष की उम्र में उनकी मृत्यु हो गयी। इस तरह अरस्तु महान दार्शनिक [[प्लेटो]] के शिष्य और [[सिकंदर महान|सिकन्दर]] के गुरु बनकर इतिहास के पन्नो में महान दार्शनिक के रूप में अमर हो गये। Alexander
 
==कृतियां==
* [[ऑन लेनथ एंड शोर्तनेस ऑफ़ लाइफ]]
* [[ऑन यूथ, ओल्ड ऐज , लाइफ एंड डेथ एंड रेसिपिरेशन]]
* [[भौतिक शास्त्र|फिजिक्स]]
* [[ऑन दी हेअवेंस]]
* [[ऑन जेंराशन एंड करप्शन]]
 
== इन्हें भी देखें ==
* [[अर्थशास्त्र (ग्रन्थ)|अर्थशास्त्र ग्रन्थ]]
* [[चाणक्यनीति]]
 
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