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* संतुलित आहार की आदतें, मीठी श्वास व गहरी नींद
* बड़ी आंत की नियमित गतिविधि व संतुलित शारीरिक गतिविधियां
* नाड़ी स्पंदन, [[रक्तचाप|रक्तदाब]], शरीर का भार व व्यायाम सहनशीलता आदि सब कुछ व्यक्ति के आकार, आयु व लिंग के लिए सामान्य मानकों के अनुसार होना चाहिए।
* शरीर के सभी अंग सामान्य आकार के हों तथा उचित रूप से कार्य कर रहे हों।
* पाचन शक्ति सामान्य एवं सक्षम हो।
: '' अष्टादशेषु पुराणेषु व्यासस्य वचन द्वयं ।
: ''परोपकारः पुण्याय, पापाय परपीडनम्॥
अर्थात [[पुराण|अट्ठारह पुराणों]] में [[वेद व्यासवेदव्यास|महर्षि व्यास]] ने दो बातें कहीं हैं - [[परहितवाद|परोपकार]] से पुण्य मिलता है और दूसरों को पीड़ा देने से [[पाप]]।
* प्राणी मात्र के कल्याण की भावना हो।
* 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' (सभी सुखी हों) का आचरण हो।
अर्थात जिस व्यक्ति का मांस धातु समप्रमाण में हो, जिसका शारीरिक गठन समप्रमाण में हो, जिसकी इन्द्रियाँ थकान से रहित सुदृढ़ हों, रोगों का बल जिसको पराजित न कर सके, जिसका व्याधिक्ष समत्व बल बढ़ा हुआ हो, जिसका शरीर भूख, प्यास, धूप, शक्ति को सहन कर सके, जिसका शरीर व्यायाम को सहन कर सके , जिसकी पाचनशक्ति (जठराग्नि) सम़ावस्थ़ा में क़ार्य करती हो, निश्चित कालानुसार ही जिसका बुढ़ापा आये, जिसमें मांसादि की चय-उपचय क्रियाएँ सम़ान होती हों - ऐसे १० लक्षणो लक्षणों व़ाले व्यक्ति को आचार्य चरक ने स्वस्थ माना है।
 
;[[काश्यप संहिता|काश्यपसंहिता]] के अनुसार आरोग्य के लक्षण-
::''अन्नाभिलाषो भुक्तस्य परिपाकः सुखेन च ।
::''सृष्टविण्मूत्रवातत्वं शरीरस्य च लाघवम् ॥
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