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इब्न बत्तूता दमिश्क और फिलिस्तीन होता एक कारवाँ के साथ मक्का पहुँचा। यात्रा के दिनों में दो साधुओं से उसकी भेंट हुई थी जिन्होंने उससे पूर्वी देशों की यात्रा के सुख सौंदर्य का वर्णन किया था। इसी समय उसने उन देशों की यात्रा का संकल्प कर लिया। मक्के से इब्न बत्तूता इराक, ईरान, मोसुल आदि स्थानों में घूमकर १३२९ (७२९ हि.) में दुबारा मक्का लौटा और वहाँ तीन बरस ठहरकर अध्ययन तथा भगवनदभक्ति में लगा रहा। बाद में उसने फिर यात्रा आरंभ की और दक्षिण अरब, पूर्वी अफ्रीका तथा फारस के बंदरगाह हुर्मुज से तीसरी बार फिर मक्का गया। वहाँ से वह क्रीमिया, खीवा, बुखारा होता हुआ अफगानिस्तान के मार्ग से भारत आया। भारत पहुँचने पर इब्न बत्तूता बड़ा वैभवशाली एवं संपन्न हो गया था।
 
'''भारत प्रवेश''' - भारत के उत्तर पश्चिम द्वार से प्रवेश करके वह सीधा दिल्ली पहुँचा, जहाँ तुगलक सुल्तान मुहम्मद ने उसका बड़ा आदर सत्कार किया और उसे राजधानी का [[कादी|काज़ी]] नियुक्त किया। इस पद पर पूरे सात बरस रहकर, जिसमें उसे सुल्तान को अत्यंत निकट से देखने का अवसर मिला, इब्न बत्तूता ने हर घटना को बड़े ध्यान से देखा सुना। १३४२ में मुहम्मद तुगलक ने उसे चीन के बादशाह के पास अपना राजदूत बनाकर भेजा, परंतु दिल्ली से प्रस्थान करने के थोड़े दिन बाद ही वह बड़ी विपत्ति में पड़ गया और बड़ी कठिनाई से अपनी जान बचाकर अनेक आपत्तियाँ सहता वह कालीकट पहुँचा। ऐसी परिस्थिति में सागर की राह चीन जाना व्यर्थ समझकर वह भूभार्ग से यात्रा करने निकल पड़ा और लंका, बंगाल आदि प्रदेशों में घूमता [[चीन]] जा पहुँचा। किंतु शायद वह मंगोल खान के दरबार तक नहीं गया। इसके बाद उसने पश्चिम एशिया, उत्तर अफ्रीका तथा स्पेन के मुस्लिम स्थानों का भ्रमण किया और अंत में टिंबकट् आदि होता वह १३५४ के आरंभ में मोरक्को की राजधानी "फेज" लौट गया। इसके द्वारा अरबी भाषा में लिखा गया उसका यात्रा वृतांत जिसे रिहृला कहा जाता है, १४वीं शताब्दी में भारतीय उपमहाद्वीप के सामाजिक तथा सांस्कृतिक जीवन के विषय मे बहुत ही रोचक जानकारियाँ देता है।
 
इब्न बतूता ने अफगानिस्तान के ऊंचे पहाड़ों से होते हुए तुर्की के योद्धाओं के नक्शेकदम पर चलते हुए भारत में प्रवेश किया, जिन्होंने एक सदी पहले भारत के हिंदू कृषक लोगों को जीत लिया था और दिल्ली सल्तनत की स्थापना की थी। मुस्लिम सैनिकों की पहली लहर ने कस्बों को लूट लिया और हिंदू उपासकों के देवताओं की छवियों को तोड़ दिया। लेकिन बाद में योद्धा राजाओं ने किसानों को मारने के बजाय कर लगाने के लिए एक प्रणाली स्थापित की। उन्होंने अफगानिस्तान से तुर्क के साथ स्थानीय हिंदू नेताओं को बदल दिया और उपमहाद्वीप के सिरे तक लगभग एक बड़े क्षेत्र को जीत लिया और एकजुट किया। लेकिन दिल्ली में ये मुस्लिम सुल्तान सुरक्षित नहीं थे। उन्हें भारत में हिंदू बहुमत के निरंतर विरोध का सामना करना पड़ा जिन्होंने अपने विजेता के खिलाफ विद्रोह किया, और उन्हें उत्तर से आवधिक मंगोल आक्रमणों की धमकी दी गई। चगताई खान (जिसे इब्न बतूता ने भारत आने पर देखा था) ने भारत पर हमला किया था और 1323 के आसपास नई राजधानी दिल्ली को धमकी दी थी। लेकिन दिल्ली में सामंत सुल्तान मुहम्मद तुगलक की सेनाओं ने सिंधु नदी के पार उनका पीछा किया था।
== यात्राएं ==
{{Commonscat|Ibn Battuta|इब्न-बतूता}}
* [[मक्का (शहर)|मक्का मदीना]]
* [[यमन एवं अदन]]
* [[भारत]]
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