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'''सम्पूर्ण क्रान्ति''' [[जयप्रकाश नारायण]] का विचार व नारा था जिसका आह्वान उन्होने [[इन्दिरा गांधी|इंदिरा गांधी]] की सत्ता को उखाड़ फेकने के लिये किया था।
 
लोकनायक नें कहा कि सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियाँ शामिल है - राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक क्रांति। इन सातों क्रांतियों को मिलाकर सम्पूर्ण क्रान्ति होती है।
 
[[पटना]] के ऐतिहासिक गांधी मैदान में जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का आहवान किया था। मैदान में उपस्थित लाखों लोगों ने जात-पात, तिलक, [[दहेज प्रथा|दहेज]] और भेद-भाव छोड़ने का संकल्प लिया था। उसी मैदान में हजारों-हजार ने अपने [[यज्ञोपवीत|जनेऊ]] तोड़ दिये थे। नारा गूंजा था:
: जात-पात तोड़ दो, तिलक-दहेज छोड़ दो।
: समाज के प्रवाह को नयी दिशा में मोड़ दो।
 
सम्पूर्ण क्रांति की तपिश इतनी भयानक थी कि केन्द्र में कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोना पड़ गया था। जय प्रकाश नारायण जिनकी हुंकार पर नौजवानों का जत्था सड़कों पर निकल पड़ता था। बिहार से उठी सम्पूर्ण क्रांति की चिंगारी देश के कोने-कोने में आग बनकर भड़क उठी थी। जेपी के नाम से मशहूर जयप्रकाश नारायण घर-घर में क्रांति का पर्याय बन चुके थे। [[लालू प्रसाद यादव|लालू यादव]], [[नितीश कुमार|नीतीश कुमार]], [[रामविलास पासवान]] और [[सुशील कुमार मोदी]], आज के सारे नेता उसी छात्र युवा संघर्ष वाहिनी का हिस्सा थे।
 
:’’सम्पूर्ण क्रांति से मेरा तात्पर्य समाज के सबसे अधिक दबे-कुचले व्यक्ति को सत्ता के शिखर पर देखना है |’’ <br /> - लोकनायक जय प्रकाश नारायण
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