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[[चित्र:Franz Krüger - Portrait of Emperor Nicholas I - WGA12289.jpg|thumb|300px|right|निकोलस प्रथम]]
'''निकोलस प्रथम''' ([[रूसी भाषा|रूसी]] : Николай I Павлович, निकोलाई पावलोविश ; १७९६-१८५५) : सन १८२५ से १८५५ तक [[रूस]] का [[त्सार|ज़ार]] (सम्राट) था।
 
== परिचय ==
इसका शरीर सुदृढ़ और प्रभावशाली था। इसकी कार्य करने शक्ति अपार थी। आठ, नौ घंटे प्रति दिन राजकाज देखता था। सब जगह से आई रिपोर्टों को स्वत: पढ़ता, क्या करना चाहिए इसका स्वत: निर्णय करता और दिन भर का काम हरेक विभाग को बताता। रूसी शासन को मंत्रालयों में इसने की विभक्त किया। इसके सामने सदा यही समस्या रही, सत्ता और अधिकार किसको दे? इसका किसी पर विश्वास नहीं था। अत: किसी को भी योग्य नहीं मानता था। इसी से शासन को अत्यधिक केंद्रिय किया। ऐतिहासिकों ने इसको बताया था कि रूस के लिए सर्वोत्तम शासनव्यवस्था निरंकुश एकाधिकारी राजतंत्र है। इसने फ्रेंच राज्यक्रांति से उत्पन्न विचार धारा का रूस में प्रवेश नहीं होने दिया।
 
इसकी परराष्ट्र नीति यह थी कि [[काला सागर]] को रूस की [[झील]] बनाया जाए, 'यूरोप के रोगी' [[तुर्की]] का अंत किया जाए और यूरोप की राजनीति में रूस की प्रधानता मानी जाए। तुर्कों के साथ इसने दो युद्ध किए। पहले का अंत (१८२८-२९) [[एड्रियानोपल की संधि]] से हुआ और [[यूनान|ग्रीस]] की स्वाधीनता की नींव पड़ी। दूसरी लड़ाई [[क्रीमिया का युद्ध|क्रीमिया युद्ध]] (१८५३) के नाम से प्रसिद्ध है। तुर्की का साथ इंग्लैड और फ्रांस ने दिया। लड़ाई अभी चल रही थी, जब इसका १८५५ में देहांत हो गया। रूस का मनोरथ पूर्ण न हुआ, पर [[रोमानिया|रूमानिया]] और [[सर्बिया]] की स्वाधीनता का उदय हुआ। तीन सम्राटों के संघ का एक सदस्य होने से इसने [[ऑस्ट्रिया|आस्ट्रिया]] की ओर से [[हंगरी]] में विद्रोह का दमन किया। १८३० में [[वारसॉ|वारसा]] में पोलों ने विद्रोह किया था। परंतु इसका इसने कुचल दिया और ४३ हजार पोल परिवारों को [[काकेशिया]] में बसाया, जिससे पोल पूर्णत: रूसी हो जाएँ और पोलिश स्वाधीनता की भावना का अंत हो जाए।
 
[[श्रेणी:रूस का इतिहास]]
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