"ईश्वर" के अवतरणों में अंतर

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{{मुख्य|इस्लाम}}
[[File:Allah3.svg|thumb|right|200px|[[अरबी भाषा]] में लिखा '''अल्लाह''' शब्द]]
वो ईश्वर को [[अल्लाह]] कहते हैं। [[इस्लाम|इस्लाम धर्म]] की धार्मिक पुस्तक [[क़ुरआन|कुरान]] है और प्रत्येक मुसलमान ईश्वर शक्ति में विश्ववासविश्वास रखता है।
 
इस्लाम का मूल मंत्र "लॉ इलाह इल्ल , अल्लाह , मुहम्मद उर रसूल अल्लाह" है, अर्थात अल्लाह के सिवा कोई माबूद नही है और मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) उनके आखरी रसूल (पैगम्बर)हैं।
 
इस्लाम मे मुसलमानो को खड़े खुले में पेशाब(इस्तीनज़ा) करने की इजाज़त नही क्योंकि इससे इंसान नापाक होता है और नमाज़ पढ़ने के लायक नही रहता इसलिए इस्लाम मे बैठके पेशाब करने को कहा गया है और उसके बाद पानी से शर्मगाह को धोने की इजाज़त दी गयी है।
=== हिन्दू धर्म ===
{{मुख्य|हिन्दू धर्म}}
[[वेद]] के अनुसार व्यक्ति के भीतर पुरुष ईश्वर ही है। परमेश्वर एक ही है। वैदिक और पाश्चात्य मतों में परमेश्वर की अवधारणा में यह गहरा अन्तर है कि वेद के अनुसार ईश्वर भीतर और परे दोनों है जबकि पाश्चात्य धर्मों के अनुसार ईश्वर केवल परे है। ईश्वर परब्रह्म का सगुण रूप है। [[शिव]] की एक नाम ईस्वर हे |
 
वैष्णव लोग [[विष्णु]] को ही ईश्वर मानते है, तो शैव [[शिव]] को।