"पतञ्जलि योगसूत्र": अवतरणों में अंतर

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== सार-संक्षेप ==
''अबअथ योग अनुशासन'' ॥१॥ (पतंजलि को गुरु परम्परा में मिली योग शिक्षा)
 
'''योग चित्तकी वृत्तियों का निरोध ही योग है''' ॥२॥<br>
 
तब दृष्टा अपने स्वरूप में स्थित हो जाता है ॥३॥<br>
गुमनाम सदस्य