"चाणक्यनीति" के अवतरणों में अंतर

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इसके बाद चाणक्य बोले, ‘देखो, मेरी इस बात के पीछे भी गहरा सार है। दूसरों को सुधारने के बजाय खुद को सुधारो। इससे तुम अपने कार्य में विजय अवश्य हासिल कर लोगे। दुनिया को नसीहत देने वाला कुछ नहीं कर पाता जबकि उसका स्वयं पालन करने वाला कामयाबी की बुलंदियों तक पहुंच जाता है।’ इस बात से सभी सहमत हो गए
 
* चाणक्य नीतियाँ
 
- ज्यादा सीधे मत बनो
चाणक्य के अनुसार अगर आप बहुत सीधे हो तो यह आपके लिए सही नहीं है क्योंकि आपने देखा होगा जंगल में जाओगे और देखोगे जो पेड़ ज्यादा सीधा होता है उसे सबसे पहले काटा जाता है।
 
- चालक बनों - मतलब अगर आप सफल होना है तो आपको थोड़ा चालाक होना जरूरी है, अगर आप पूरी चालाकी से थोड़े पावरफुल बन जाओगे तो उसमें कोई बुराई नहीं है।
 
- अपने राज किसी बताओ - हमें अपनी राज अपने किसी सही संबंधी को नहीं बतानी चाहिए, क्योंकि समय के साथ हवा का रुख भी बदलता है।
 
- मुर्ख इंसान को उपदेश देने से बचे - मतलब की अगर आप मुर्ख इंसान को समझाओगे तो आप की ही शांति भंग जाएगी।
 
- किसी भी काम को हद से ज्यादा मत करो - रावण के मरने का कारण बना उसका हद से ज्यादा घमंड करना।
 
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== चाणक्य की कुटिया ==
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