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इसके बाद चाणक्य बोले, ‘देखो, मेरी इस बात के पीछे भी गहरा सार है। दूसरों को सुधारने के बजाय खुद को सुधारो। इससे तुम अपने कार्य में विजय अवश्य हासिल कर लोगे। दुनिया को नसीहत देने वाला कुछ नहीं कर पाता जबकि उसका स्वयं पालन करने वाला कामयाबी की बुलंदियों तक पहुंच जाता है।’ इस बात से सभी सहमत हो गए
 
* चाणक्य नीतियाँ
 
- ज्यादा सीधे मत बनो
चाणक्य के अनुसार अगर आप बहुत सीधे हो तो यह आपके लिए सही नहीं है क्योंकि आपने देखा होगा जंगल में जाओगे और देखोगे जो पेड़ ज्यादा सीधा होता है उसे सबसे पहले काटा जाता है।
 
- चालक बनों - मतलब अगर आप सफल होना है तो आपको थोड़ा चालाक होना जरूरी है, अगर आप पूरी चालाकी से थोड़े पावरफुल बन जाओगे तो उसमें कोई बुराई नहीं है।
 
- अपने राज किसी बताओ - हमें अपनी राज अपने किसी सही संबंधी को नहीं बतानी चाहिए, क्योंकि समय के साथ हवा का रुख भी बदलता है।
 
- मुर्ख इंसान को उपदेश देने से बचे - मतलब की अगर आप मुर्ख इंसान को समझाओगे तो आप की ही शांति भंग जाएगी।
 
- किसी भी काम को हद से ज्यादा मत करो - रावण के मरने का कारण बना उसका हद से ज्यादा घमंड करना।
 
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== चाणक्य की कुटिया ==
 
आचार्य ने कहा-आप रात को मेरे घर आ सकते हैं। राजदूत चाणक्य के व्यवहार से प्रसन्न हुआ। शाम को जब वह राजमहल परिसर में ’आमात्य निवास‘ के बारे में पूछने लगा। राज प्रहरी ने बताया- आचार्य चाणक्य तो नगर के बाहर रहते हैं। राजदूत ने सोचा शायद महामंत्री का नगर के बाहर सरोवर पर बना सुंदर महल होगा। राजदूत नगर के बाहर पहूंचा। एक नागरिक से पूछा कि चाणक्य कहा रहते हैं। एक कुटिया की ओर इशारा करते हुए नागरिक ने कहा-देखिए, वह सामने महामंत्री की कुटिया है। राजदूत आश्चर्य चकित रह गया। उसने कुटिया में पहुंचकर चाणक्य के पांव छुए और शिकायत की-आप जैसा चतुर महामंत्री एक कुटिया में रहता है। चाणक्य ने कहा-अगर मैं जनता की कड़ी मेहनत और पसीने की कमाई से बने महलों से रहूंगा तो मेरे देश के नागरिक को कुटिया भी नसीब नहीं होगी। चाणक्य की ईमानदारी पर यूनान का राजदूत नतमस्तक हो गया।
 
चाणक्य निति
 
- आलसी व्यक्ति या छात्र का ना तो वर्तमान होता है और ना ही, भविष्य । हम सभी का ध्यान अलग अलग होता है, अगर आप छात्र हो तो आपका फोकस सिर्फ पढ़ाई पर ही होना चाहिए,
स्टूडेंट लाइफ]] में सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दो, पढ़ाई के समय आलस्य मत करो पढ़ाई के समय आलस को बिल्कुल त्याग दो। छात्रों के लिए आलस बिलकुल भी सही नहीं होता।
 
- जो आप करना चाहते हैं उसे आप हमेशा अपने मन में रखिए और उसे दृढ़ संकल्प बनाकर रखो ,
चाणक्य के अनुसार अगर हम ऐसा करेंगे तो हमारे दिमाग में यही चलेगा कि हमें करना क्या है फालतू की बातें ध्यान ने नही आएगी। और हम उसको कैसे प्राप्त करें यही सोच रहेगी।
 
अधिक चाणक्य निति जानें - चाणक्य नीतियाँ
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== इन्हें भी देखें ==
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