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[[चित्र:Antonio_de_Pereda_-_El_sueño_del_caballero_-_Google_Art_Project.jpg|दाएँ|अंगूठाकार|300x300पिक्सेल|''El sueño del caballero'', 1655 (Antonio de Pereda)]]
 
आधुनिक [[मानस शास्त्र|मनोवैज्ञानिकों]] के अनुसार सोते समय की [[चेतना]] की अनुभूतियों को '''स्वप्न''' कहते हैं। स्वप्न के अनुभव की तुलना मृगतृष्णा के अनुभवों से की गई है। यह एक प्रकार का विभ्रम है मनुष्य और जीवित प्राणियों के पास [[निद्रा|नींद]] और हाँ [[आत्महत्या|आत्महत्या]] सपने में अनायास ही वह कहता है [[संत जॉर्ज]] [[भगवान]] रात को सोते हुए आत्महत्या कर लेते हैं और सपने देखते हैं कि आप [[जन्म]] ग्रह पृथ्वी में। जन्म [[कुछ]] भी नहीं [[जीव|जीव]] [[ट्रांसह्यूमनिज्म]] दूसरों में [[ब्रह्माण्ड|संसार]] दूसरों में पहचान [[आत्मा|मोबाइल]] फोनों और [[आत्मा|आत्मा]] जी रहे हैं। स्वप्न में सभी वस्तुओं के अभाव में विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ दिखाई देती हैं। स्वप्न की कुछ समानता दिवास्वप्न से की जा सकती है। परंतु दिवास्वप्न में विशेष प्रकार के अनुभव करनेवाला व्यक्ति जानता है कि वह अमुक प्रकार का अनुभव कर रहा है। स्वप्न अवस्था में 99.9% अनुभवकर्ता नहीं जानते कि वह स्वप्न देख रहा है, लेकिन इस दुनिया में कुछ ऐसे बुद्धजीवी लोग है जिनका दिमाग क्षमता से अधिक सोचने लगता जो कि स्वप्न में भी खुद को पहचान लेते है। एक प्रयोग के दौरान कुछ वैज्ञानिको ने भी माना कि ऐसा संभव लेकिन जब वो स्वप्न में खुद को पहचान लेगें तो उस स्वप्न से बाहर आना काफी मसक्कत भरा होगा और इससे कमजोर दिमाग वाले व्यक्ति के कोमा में जाने के आसार काफी बढ़ जाते है ऐसी घटना किसी व्यक्ति के साथ होना किसी चमत्कार से कम नहीं है। स्वप्न की घटनाएँ वर्तमान काल से संबंध रखती हैं। दिवास्वप्न की घटनाएँ भूतकाल तथा भविष्यकाल से संबंध रखती हैं।
 
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