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(श्री शब्द का उपयोग जीवित मनुष्य के आगे सम्मान पूर्वक लगाया जाता है,इनके अलावा अजर अमर मनुष्य या देवी देवताओं के आगे भी सम्मान पूर्वक लगाया जाता है)
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{{स्रोतहीन|date=अक्टूबर 2018}}
'''श्री''' एक [[हिन्दी]] में प्रत्येक पुरुष के नाम के आगे लगाया जाने वाला सम्मानजनक शब्द है। इसके अतिरिक्त यह हिन्दू देवी लक्ष्मी के पर्याय के रूप में तथा सम्पत्ति सम्पदा धन इत्यादि के पर्याय के रूप में उपयोग किया जाता है। श्री शब्द का उपयोग जीवित मनुष्य के आगे सम्मान पूर्वक लगाया जाता है,इनके अलावा अजर अमर मनुष्य या देवी देवताओं के आगे भी सम्मान पूर्वक लगाया जाता है
श्री भारतीय परंपरा में सम्मानजनक उपाधी है। पत्र लेखन और उदबोधन में किसी व्यक्ति के नाम के पूर्व श्री लगाया जाता है। परिवार वरिष्ठों के नामों के बाद भी यह विशेषण लगाया जाता है जैसे पिताश्री,माताश्री, भ्राताश्री आदि।
श्री उपाधी संस्कृत शब्द ' स्री'से निर्मित है जो स्री लिंगी विशेषण होकर भी अनेक प्रतिष्ठित विद्वानों,वीरों के नाम के पूर्व लगाया जाता है।
 
यह एक लक्ष्मी का भी नाम है।अनेक देवियों के नाम के पूर्व श्री विशेषण लगाया जाता है।जैसे श्री लक्ष्मी, श्री पार्वती।
 
यह एक समानार्थक शब्द भी है जो लक्ष्मी,पद्मालया,पद्मा,कमला,श्री,हरिप्रिया,
इन्दिरा,लोकमातृ,मा,क्षीरोदतनया,रमा,
भार्गवी,लोकजननी,क्षीरसागरकन्यका,
वृषाकपायी , सम्पद्,सम्पत्ति,श्री,लक्ष्मी,भग,
भूति आदि अर्थ में प्रसिद्ध है।
 
ब्रह्मसूर्विश्वकेतुः स्यादनिरुद्ध उषापतिः। लक्ष्मीः पद्मालया पद्मा कमला श्रीर्हरिप्रिया। इन्दिरा लोकमाता मा क्षीरोदतनया रमा। भार्गवी लोकजननी क्षीरसागरकन्यका॥
(अमरकोश)
 
विष्णु की पत्नी लक्ष्मी होने के कारण धनसमृद्धि और सौंदर्य से परिपूर्ण है। इस संदर्भ में संस्कृत वचन प्रसिद्ध है।
 
सम्पत्तिः श्रीश्च लक्ष्मीश्च विपत्त्यां विपदापदौ। आयुधं तु प्रहरणं शस्त्रमस्त्रमथास्त्रियौ॥
 
== सन्दर्भ ==
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