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==इतिहास==
[[चित्र:राष्ट्रीय पर्यावरण शहीदी स्मारक खेजडली, जोधपुर .jpg|thumb|250px|खेजड़ली स्मारक, जोधपुर।]]
सम्वत् 1542 तक गुरु जाम्भोजी की कीर्ति चारों और फेल गई थी और इसी साल राजस्थान में भयंकर अकाल पड़ा जिसमें जाम्भोजी महाराज ने अकाल पीडि़तों की अन्न व धन्न से भरपूर सहायता की। सम्वत् 1542 की कार्तिक बदी 8 को जांभोजी महाराज ने एक विराट यज्ञ का आयोजन सम्भराथल धोरे पर किया<ref name="Biśnoī1991">{{cite book|author=श्रीकृष्ण बिश्नोई|title=Biśnoī dharma-saṃskāra|url=https://books.google.com/books?id=VQMcAAAAIAAJ|year=1991|publisher=Dhoka Dhorā Prakāśana|page=36}}</ref> और 29 नियमों की दीक्षा एवं पाहल देकर बिश्नोई धर्म की स्थापना की।
 
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