"वीर रस" के अवतरणों में अंतर

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'''वीर रस''', नौ [[रस (काव्य शास्त्र)|रसों]] में से एक प्रमुख रस है। जब किसी रचना या वाक्य आदि से वीरता जैसे स्थायी भाव की उत्पत्ति होती है, तो उसे वीर रस कहा जाता है।<ref>[https://www.devakalasansar.com/2019/09/top-best-motivational-poem-in-hindi.html वीर रस की कविता]</ref><ref>{{पुस्तक सन्दर्भ|last1=ओझा|first1=दसरथ|title=हिन्दी नाटक : उद्भव और विकास|date=1995|isbn=8170284023|url=https://books.google.co.in/books?isbn=8170284023|accessdate=8 फरवरी 2016}}</ref><ref>{{पुस्तक सन्दर्भ|last1=गणेश|first1=कुमार|title=UGC-NET/JRF/SLET ‘Hindi’ (Paper III): - पृष्ठ 22|isbn=8174823662|url=https://books.google.co.in/books?isbn=8174823662|accessdate=8 फरवरी 2016}}</ref>
 
युद्ध अथवा किसी कार्य को करने के लिए ह्रदय में जो उत्साह का भाव जागृत होता है उसमें वीर रस कहते हैं
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