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गांजा का सेवन करने पर व्यक्ती की उत्तेजना बढ जाती है। गांजे मे मिलाई जाने वाली तम्बाकू [[ मिरजी ]] कर्करोग ( Cancer ) का प्रमुख कारण है परन्तु तम्बाकू ना मिलाया जाए तो गाँजा वरदान साबित होता है जो कैंसर जैसी घातक बिमारी को जड़ से खत्म करने मे सक्षम है। गांजा व्यसनी लोगों के चेहरे पर काले दाग (spots) पड जाते है। गांजा के पौधे के औषध से मनोरुग्ण का ईलाज किया जाता है। फ्रान्स के लोग आत्मविश्वास बढाने के लिए गांजा का सेवन करते है। दुनिया का सबसे बेहतरीन ( Best ) गांजा [[ मलाना हिल्स हिमाचल ]] में ऊगता है।
भारतीय लोग गांजा को शिवशंकर ( God ) का प्रसाद मानते है और सेवन करते है।
 
1985 तक लीगल था. इसी गांजे को हमारे महाग्रंथ में भी सम्मान दिया गया है. हिंदू पौराणिक कथाओं में भी महादेव के साथ गांजे का जिक्र है. तो इसे बैन क्यों किया गया. 1961 में अमेरिकी प्रेशर में आकर यूएन की एक कंवेनशन में इसे सिंथेटिक ड्रग की कैटेगरी में डाल दिया गया. लेकिन भारत ने उस वक्त साइन करने से मना कर दिया. उस वक्त भारत में गांजे के पौथे से आयुर्वेदिक दवाएं बनती थीं. भारत में बैन कराने वाले यूएस के 27 राज्य में गांजा अभी भी लीगल है. यही नहीं 40 देश में गांजा लीगल है.
 
 
 
भारत में बैन करने के पीछे अमेरिका की बड़ी चाल
 
अमेरिका गांजे के पौधे से दवाईयां बनाकर हमारे देश में ज्यादा दाम पर बेंचती है. अगर भारत में गांजा लीगल होता है तो उनका धंधा चौपट हो जाएगा. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में जिस जगह गांजा बैन नहीं है. वहां पेन किलर्स की खरीदी में कमी आई है. यही नहीं शराब भी वहां कम इस्तेमाल होती है. कुल मिलाकर अगर गांजा लीगल हो जाता है तो लिकर और टोबेको इंडस्ट्री चौपट हो सकती है.
 
तो क्या भारत में बिलकुल नहीं मिलता गांजा?
 
ऐसा नहीं है कि भारत में गांजा बैन है तो ये कहीं नहीं मिलता. गांजे का ब्लेक मार्केट इससे तगड़े पैसे भी बना रहा है. हिमाचल गांजे का अड्डा बना हुआ है. वहां 60 हजार किलो गांजा अवैध बनाया जाता है. जिसमें से सिर्फ 1% पकड़ा जाता है. बाकी कहां जाता है ये तो सबको पता ही होगा.
 
 
 
1985 में अगर गांजा बैन नहीं होता तो?
 
राजीव गांधी सरकार में यानी 1985 में अगर गांजा बैन नहीं होता तो इसका सदुपयोग होता और सरकार को टैक्स भी मिलता. ऐसा नहीं है कि अगर इसे लीगल कर दिया गया तो इसका उपयोग सिर्फ नशे के लिए नहीं किया जाएगा. इसके कुछ फायदे भी हैं. भूख बढ़ाने के लिए, डायबिटीज, डायरिया, ज्वाइनडिस, पेन किलर और कैंसर के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है और जो दवाईयां हम महंगी खरीददते हैं वो काफी सस्ते दामों में हमें मिल जाती. लेकिन क्या करें, मजबूरी ऐसी है कि भारत में गांजा बैन है.
 
सरकार की सोच.
 
महिला और बाल विकास विभाग की केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने पैरवी की है कि मनोवैज्ञानिक विकारों को ठीक करने के लिए मारीजुआना (गांजे) पर लगे प्रतिबंध के फैसले में आंशिक बदलाव लाया जाए. ऐसे दुनिया के बहुत से देशों ने किया है. गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्‍यक्षता वाले ग्रुप ऑफ मिनिस्‍टर्स ने पहले इस बारे में एक ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार की है. अब इंतजार कीजिएगा, उस दिन का जब मोदी सरकार यह आदेश जारी कर दे. कि 'आज आधी रात से देश में गांजा सिर्फ नफरत का पात्र नहीं रहा'.
 
== गाँजे का पौधा ==
बेनामी उपयोगकर्ता