"ईश्वर" के अवतरणों में अंतर

आकार में कोई परिवर्तन नहीं ,  7 माह पहले
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
योग सूत्र में [[पतञ्जलि|पतंजलि]] लिखते है - "क्लेशकर्मविपाकाशयैरपरामृष्टः पुरुषविशेष ईश्वरः"। (क्लेष, कर्म, विपाक और आशय से अछूता (अप्रभावित) वह विशेष पुरुष है।) [[हिन्दू धर्म|हिन्दु धर्म]] में यह ईश्वर की एक मान्य परिभाषा है।
 
ईश्वर जगत के नियंता है और इसका प्रमाण ब्रह्माण्ड की सुव्यवस्थित रचना एवम् इसमें नियम से घटित होने वाली वो घटनाएं है जो कि बिना किसी नियंता के संभव नहीं है। कुछ लोग अल्पज्ञानवश ईश्वर को एक कल्पना मात्र मंत्रमानते है परन्तु विद्वान तथा बुद्धिमान लोग ईश्वर में पूर्ण विश्वास करते है।
 
=== जैन धर्म ===
बेनामी उपयोगकर्ता