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कुछ चमकते तारों के समूह आकाश को विभिन्न भागों में बाँट देते हैं। इन तारों के समूह को [[तारामंडल]] (constellations) कहते हैं। पूरे आकाश को 89 तारामंडलों में विभक्त करके उन तारामंडलों के नाम रख दिए गए हैं। राशिचक्र के तारामंडल बहुत प्रसिद्ध हैं, इनकी संज्ञा मेष, वृष आदि है। किसी एक तारामंडल के तारों को उनके दृश्य (visual) कांतिमान (magnitude) के अवरोह क्रम में चुन लिया जाता है। फिर तारामंडल के नाम के आगे ग्रीक भाषा के अक्षर रखकर तारों का नामकरण किया जाता है, जैसे मेष राशि के सबसे चमकीले तारे का नामकरण एल्फातरीज़ किया गया है। कुछ तारामंडलों में तारों की संख्या इतनी अधिक है कि ग्रीक वर्णमाला के अक्षरों की संख्या उनके लिए कम पड़ जाती है। ऐसे तारों के नामकरण के लिए तारामंडल के पूर्व लैटिन अक्षर तथा आवश्यकता पड़ने पर संख्याएँ लिख देते हैं। कुछ तारे अतिप्रकाशित होने के कारण अतिप्रसिद्ध हैं तथा उनके नाम तारामंडलों के संदर्भ के बिना भी जाने जा सकते हें, जैसे लुब्धक (Sirius), मघा (Regulus), चित्रा (Spica) आदि। इस प्रकार के नामकरण से तारों को पहचानने में सहायता मिलती है।
 
== तारों के कांतिमान (StellerStellar Magnitudes) ==
खाली आँखों से देखने पर कुछ तारे अधिक चमकीले तथा कुछ कम चमकीले दिखाई देते हैं। इनकी कांति (luminosity) के यूनाधिक्य के अनुसार हम तारों को कई कांतिमानों में वर्गित कर लेते हैं। तारे हमसे बहुत अधिक दूरी पर स्थित हैं। दूरी के बढ़ने से कम चमकीले तारे हम दिखाई नहीं देते। बिना यंत्र की सहायता के हमारी आँखें छठे कांतिमान तक के तारे देख सकती हैं। कांतिमानों का वर्गीकरण इस प्रकार है किजो तारे सबसे अधिक चमकीले दिखलाई पड़ते हैं, उनका कांतिमान न्यूनतम संख्या माना जाता है, उससे कम चमकीले तारों का उससे अधिक इत्यादि। कांतिमान के तारे की अपेक्षा उसे पूर्ववर्ती कांतिमान तारे की चमक अथवा २.५१२ गुना अधिक होती है। इस प्रकार प्रथम कांतिमान का तारा द्वितीय कांतिमान के तारे से २.५१२ गुना चमकीला तथा द्वितीय कांतिमान का तारा तृतीय कांतिमान के तारे से २.५१२ गुना चमकीला होता है। यदि हम छठे कांतिमान के तारे की चमक १ मान लें, तो प्रथम कांतिमान से छठे कांतिमान तक के तारों की चमक १००:३९.८२:१५.८५:६.३१ : २.५१ : १ अनुपात में होगी। इस दृश्य कांतिमान के मापन में सूर्य की कांतिमान - २६.७२, चंद्रमा का - १२.५ तथा लुब्धक तारे कर कांतिमान - १.५ है। माउंट पालोमार वेधशाला के २०० इंच व्यास के (वर्तमान काल के विशालतम) परावर्ती (reflector) दूरदर्शी से हम २३ कांतिमान तक के तारे देख सकते हैं। By-Raghav gurjar
 
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